॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

चुट्कुले-1 ( अनूगूँज )

Posted by सागर नाहर on 7, July 2006

Akshargram Anugunj
एक बार संजय भाई की दुर्घटना वश एक पाँव की हड्डी टूट गई, अस्पताल में पास के बिस्तर पर सागर चन्द लेटे थे जिनकी दोनो पाँव की हड्डी टूटी हुई थी,
संजय भाई से रहा नहीं गया सागर से पूछ बैठे ” आप की दो पत्नियाँ है क्या?

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एक आदमी कार का दरवाजा खोल कर दौड़ कर एक मेडिकल स्टोर में गया और उसने कहा जल्दी से हिचकी बन्द करने की दवा दो”
दुकानदार काऊँटर कूद कर बाहर आया और उस आदमी को एक कस कर थप्पड़ मार दिया और बोला अब आप की हिचकी बन्द हो गई होगी ?
उस बेचारे ने कहा कि आप भी दवा किसी को भी दे देते हो हिचकी मुझे नहीं गाड़ी में बैठी मेरी पत्नी को हो रही है।
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होमियोपेथ डॉक्टर ने एक महिला को दवा देते हुए कहा ये तीन पुड़िया दवा दे रहा हुं रात को सोते समय लेना है।
महिला ने कहा डॉक्टर साहब इस बार जरा पतले कागज में बाँधना पिछली बार पुड़िया निगलने में बड़ी तकलीफ़ पड़ी थी।
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एक मालिक ने अपने क्लर्क से पूछा आप मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास करते हो?
क्लर्क ने कहा जी हाँ साहब!
बहुत अच्छी बात है तो हुआ युँ कि तुम्हारे जिन दादा की अन्तिम क्रिया में जाने की बात कह कर तुम दो दिन की छुट्टी लेकर गये थे; तुम्हारे दादा तुम्हारे जाने के बाद तुमसे मिलने यहाँ आये थे ।
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एक गरीब आदमी ने रात को सोते समय अपने भूखे बच्चों को कहा आज रात जो बिना खाना खाये सो जायेगा उसे पाँच रुपये का इनाम मिलेगा।
बेचारे बच्चे पाँच पाँच रुपये ले कर सो गये,
अगली सुबह उसने फ़िर बच्चों से कहा आज खाना उसे मिलेगा जो मुझे पाँच रुपये देगा।
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एक व्यक्ति अपने मित्र से कह रहा था वाकई मुझे पता चल गया है कि पूरे भारत में एकता और अखंडता है।”
दूसरे ने पूछा कैसे पता चला?
उसने कहा मैं जब दिल्ली गया तब वहाँ के लोग मुझे देखकर हंसते थे, मुंबई गया तब भी,कोलकाता और चेन्नई गया तब भी।
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2 Responses to “चुट्कुले-1 ( अनूगूँज )”

  1. Raviratlami Says:

    सागर भाई, धन्यवाद.

    चुटकुलों की संख्या बढ़ा सकें तो अच्छा होगा. अपने अन्य चिट्ठाकार मित्रों को भी प्रेरित करें ताकि इंटरनेट हिन्दी चुटकुलों से भी समृद्ध हो सके.

  2. सागर चन्द नाहर Says:

    रवि साहब
    यह पहली प्रविष्टि है इस श्रेणी में और भी रचनायें प्रकाशित होगी

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