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	<title>Comments on: अमृता प्रीतम, इमरोज एवं साहिर लुधियानवी</title>
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	<description>गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं</description>
	<pubDate>Wed, 23 Jul 2008 13:18:27 +0000</pubDate>
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		<title>By: जगदीश भाटिया</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/08/15/amruta/#comment-257</link>
		<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 15:27:58 +0000</pubDate>
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		<description>नाहर जी, 
आप लिंक पर ध्यान से देखें यह लेख अमृता जी ने नहीं किन्ही विनोद भट्ट का लिखा है जिसे नवनीत ठक्कर ने अनुवादित किया है। 
रही बात पोस्ट को हटाने की तो भैया यह आपका ब्लाग है, इसका निर्धारण मुझे नहीं करना है कि आप क्या लिखें। आप हमें टिप्पणी करने का हक देते हैं तो हम टिप्पणी  कर देते हैं। 

और पंकज भाई, जाहिर है  कि मैं लिंक में दिये गये विनोद भट्ट के लेख पर ही टिप्पणी कर रहा था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नाहर जी,<br />
आप लिंक पर ध्यान से देखें यह लेख अमृता जी ने नहीं किन्ही विनोद भट्ट का लिखा है जिसे नवनीत ठक्कर ने अनुवादित किया है।<br />
रही बात पोस्ट को हटाने की तो भैया यह आपका ब्लाग है, इसका निर्धारण मुझे नहीं करना है कि आप क्या लिखें। आप हमें टिप्पणी करने का हक देते हैं तो हम टिप्पणी  कर देते हैं। </p>
<p>और पंकज भाई, जाहिर है  कि मैं लिंक में दिये गये विनोद भट्ट के लेख पर ही टिप्पणी कर रहा था।</p>
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	<item>
		<title>By: नीरज दीवान</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/08/15/amruta/#comment-254</link>
		<dc:creator>नीरज दीवान</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 12:06:07 +0000</pubDate>
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		<description>तभी अपन चुप थे उस वक़्त क्योंकि अमृता जी के बारे में बहुत कुछ छपा और पढ़ा था. लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं कि दिवंगत आत्माओं के अच्छे-बुरे पर चिंतन नहीं करना चाहिए. किंतु संयत शब्दों में और तथ्यपूर्ण बहस ज़रूर की जानी चाहिए. अमृता जी और साहिर दोनों महान रचनाधर्मी हैं. वे हमारे दिलों में बसे हैं और बसे रहेंगे. प्यार का विवाह से कोई नाता प्रतीत नहीं होता. विवाह संस्था है जो सामाजिक बंधनों की मोहताज होती है. जबकि प्यार किसी से भी हो जाता है. प्रेम बेशर्त होता है, बंधनों से परे. इस मसले पर विस्तृत बहस होती रही है. आगे भी चलती रहेगी. विवाहेत्तर प्रेम संबंधों पर चर्चा के लिए भी बड़ा दिल और खुला दिमाग़ चाहिए जैसे इस लेख को पढ़ने पर प्रतीत होता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तभी अपन चुप थे उस वक़्त क्योंकि अमृता जी के बारे में बहुत कुछ छपा और पढ़ा था. लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं कि दिवंगत आत्माओं के अच्छे-बुरे पर चिंतन नहीं करना चाहिए. किंतु संयत शब्दों में और तथ्यपूर्ण बहस ज़रूर की जानी चाहिए. अमृता जी और साहिर दोनों महान रचनाधर्मी हैं. वे हमारे दिलों में बसे हैं और बसे रहेंगे. प्यार का विवाह से कोई नाता प्रतीत नहीं होता. विवाह संस्था है जो सामाजिक बंधनों की मोहताज होती है. जबकि प्यार किसी से भी हो जाता है. प्रेम बेशर्त होता है, बंधनों से परे. इस मसले पर विस्तृत बहस होती रही है. आगे भी चलती रहेगी. विवाहेत्तर प्रेम संबंधों पर चर्चा के लिए भी बड़ा दिल और खुला दिमाग़ चाहिए जैसे इस लेख को पढ़ने पर प्रतीत होता है.</p>
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	<item>
		<title>By: Pankaj Bengani</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/08/15/amruta/#comment-252</link>
		<dc:creator>Pankaj Bengani</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 11:41:36 +0000</pubDate>
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		<description>नही भाईसा,

आपको लेख मिटाने की क्या आवश्यक्ता है? आपके लेख मे कोई दोष नहीं।

मैने आपके द्वारा दी गई लिंक पर लिखा गया लेख देखा। सचमुच औछी भाषा का प्रयोग करके बेहुदा लिखा हुआ है। भाटियाजी भी सही है कि इंसानी रिश्तों को युँ आसानी से समझाया नही जा सकता और किसी दिवंगत व्यक्ति के बारे में ऐसी बातें करने का को ओचित्य भी नही है। पर भाटियाजी ने स्पष्ट नही किया कि ओछी मानसिकता से लिखा गया लेख किसका कह रहे हैं? आपका यह लिंक मे दिया है उसका।

आपके लेख मे तो मुझे कोई दोष नही दिखता। और फिर किसी के विरोध दर्ज कराने पर लेख मिटाने की बात करने की क्या आवश्यक्ता है? :-)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नही भाईसा,</p>
<p>आपको लेख मिटाने की क्या आवश्यक्ता है? आपके लेख मे कोई दोष नहीं।</p>
<p>मैने आपके द्वारा दी गई लिंक पर लिखा गया लेख देखा। सचमुच औछी भाषा का प्रयोग करके बेहुदा लिखा हुआ है। भाटियाजी भी सही है कि इंसानी रिश्तों को युँ आसानी से समझाया नही जा सकता और किसी दिवंगत व्यक्ति के बारे में ऐसी बातें करने का को ओचित्य भी नही है। पर भाटियाजी ने स्पष्ट नही किया कि ओछी मानसिकता से लिखा गया लेख किसका कह रहे हैं? आपका यह लिंक मे दिया है उसका।</p>
<p>आपके लेख मे तो मुझे कोई दोष नही दिखता। और फिर किसी के विरोध दर्ज कराने पर लेख मिटाने की बात करने की क्या आवश्यक्ता है? <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/08/15/amruta/#comment-251</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 11:21:15 +0000</pubDate>
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		<description>आदरणीय जगदीश भाई साहब
जब तक अमृता जी जिन्दा रही वे अपने प्यार साहिर को कभी नहीं भूली। इमरोज साहब को कभी परेशानी नहीं हुई, खुद अमृता जी ने अपनी आत्मकथाओं तथा अपने कई लेखों में उन्होने साहिर के साथ अपने प्रेम  का जिक्र  किया है। उन्हें अपना प्रेम कभी शर्म नहीं लगा। यह लेख जिसकी कड़ी मैने यहाँ दी है वह खुद अमृता जी के लिखे लेख का हिन्दी अनुवाद है।
आप जानते हैं कि कितना खुला दिल है अपना जो आप पिछले लेखों से जान ही चुके होंगे, फ़िर भी आपको लगता है कि मेरे इस लेख से अमृता जी के प्रति अन्याय हुआ है तो मैं इस लेख को मिटा देता हुँ। और आपसे तथा सदगत अमृता प्रीतम जी से क्षमा चाहता हूँ।     
आप की इस बात से जरूर सहमत हुँ " कि कितना जानता हुँ अमृता के बारे में ?"</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय जगदीश भाई साहब<br />
जब तक अमृता जी जिन्दा रही वे अपने प्यार साहिर को कभी नहीं भूली। इमरोज साहब को कभी परेशानी नहीं हुई, खुद अमृता जी ने अपनी आत्मकथाओं तथा अपने कई लेखों में उन्होने साहिर के साथ अपने प्रेम  का जिक्र  किया है। उन्हें अपना प्रेम कभी शर्म नहीं लगा। यह लेख जिसकी कड़ी मैने यहाँ दी है वह खुद अमृता जी के लिखे लेख का हिन्दी अनुवाद है।<br />
आप जानते हैं कि कितना खुला दिल है अपना जो आप पिछले लेखों से जान ही चुके होंगे, फ़िर भी आपको लगता है कि मेरे इस लेख से अमृता जी के प्रति अन्याय हुआ है तो मैं इस लेख को मिटा देता हुँ। और आपसे तथा सदगत अमृता प्रीतम जी से क्षमा चाहता हूँ।<br />
आप की इस बात से जरूर सहमत हुँ &#8221; कि कितना जानता हुँ अमृता के बारे में ?&#8221;</p>
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	<item>
		<title>By: जगदीश भाटिया</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/08/15/amruta/#comment-249</link>
		<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 11:01:10 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">https://nahar.wordpress.com/2006/08/15/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%/#comment-249</guid>
		<description>बहुत ही ऒछी मानसिकता से लिखा हुआ लेख है यह। मर जाने के बाद किसी के बारे में इस प्रकार लिखना और लिंक देना बहुत शर्म की बात है।
अमृता के रिश्तों को समझने के लिये नाहर जी बहुत बड़ा दिल और बहुत खुला दिमाग चाहिये।
कितना जानते है आप अमृता के बारे में?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत ही ऒछी मानसिकता से लिखा हुआ लेख है यह। मर जाने के बाद किसी के बारे में इस प्रकार लिखना और लिंक देना बहुत शर्म की बात है।<br />
अमृता के रिश्तों को समझने के लिये नाहर जी बहुत बड़ा दिल और बहुत खुला दिमाग चाहिये।<br />
कितना जानते है आप अमृता के बारे में?</p>
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