ब्रह्माण्ड की उत्पति के सिद्धांत पर कुछ सवाल ?
Posted by सागर नाहर on 28, August 2006
पिछले दिनों विज्ञान विश्व नाम के नये चिट्ठे पर ब्रह्माण्ड की उत्पति पर प्रचलित कुछ सिद्धान्तों पर विस्तृत विवरण दिया था, पढ़ कर बहुत मजा आया पर जिज्ञासु मन में कई सवाल भी पैदा हो गये हैं, अगर कोई इन सवालों का जवाब दे सके तो मेहरबानी होगी।
- अगर बिग बैंग हुआ था तो उसका केन्द्र रूपी पदार्थ, (अत्याधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दू(infinitesimally small ))कहाँ से आया?
- स्टडी स्टेट थियरी के अनुसार कोई बिग बैंग नहीं हुआ था, अगर बिग बैंग नहीं हुआ था तो पूरे ब्रह्मण्ड में पाया जाने वाला तापमान जो आर्नो पेन्झियास और रॉबर्ट विल्सन के टेलिस्कॉप से 2.700 कल्विन निश्चित हुआ है वह ताप कहाँ से आया?
- डॉ जयन्त नार्लीकर और डॉ फ़्रेड होईल के सिद्धान्त के अनुसार ब्रह्मण्ड फ़ैल नहीं रहा है, हमें आकाश गंगाओं को दूर जाने का भ्रम हो रहा है क्यो कि हमार पास उस दूरी को मापने के जो यंत्र हैं, वह क्रमश: सिकुड़ते जा रहे हैं।क्या यह थियरी सही है?
- भौतिक विज्ञान के नियम स्पेस टाईम पर आधारित है अगर स्पेस टाईम बिग बैंग के साथ ही उत्पन्न हुआ तो उसके पहले की स्थिती को किस आधार पर समझा जाये?
- अगर समय और काल का जन्म बिग बैंग के साथ/बाद हुआ हो तो ” उसके पहले” शब्द का गलत नहीं है?
- अगर सारी वस्तुएं ब्रह्मण्ड में स्थित है तो ब्रह्मण्ड खुद किसमें स्थित है?
- अगर विशाल काय तारों से लेकर सुक्षम जीवाणु तक सबका अन्त निश्चित है तो प्रकृति कहो या सर्जनहार का, इन सब को बनाने के पीछे क्या उद्देश्य है?
- अनुमानित बिग क्रंच जो लगभग १० खरब वर्ष बाद होगा, क्या वह निश्चित है कि होगा ही क्यों कि बिग बैंग के समय और बाद में पदार्थ और प्रतिपदार्थ के मिलन से जो विस्फ़ोट हुए हैं है, उसमें बहुत सारा पदार्थ नष्ट हो चुका है, तो क्या फ़िर से बिग बैंग हो पायेगा? और अगर नहीं हुआ तो क्या ब्रह्मण्ड की समाप्ति हो जायेगी, जहाँ करोड़ों तेज प्रकाश मान तारें हैं, उसकी बजाय सर्वत्र अंधकार छा जायेगा?


28, August 2006 at 4:08 pm
आपके सवाल मुश्किल भी हैं और इनका जवाब हिन्दी में दे पाना और भी मुश्किल है। निम्न दो किताबें बहुत अच्छी हैं और आपको इनका जवाब इनमे मिल जायगा।
1. The first three minute by Steven Weinberg
2. The collapsing Universe by Issac Asimov
बहुत से लोग A brief history of time by Stephens Hawking के बाारे में कहते हैं पर मुझे यह किताब अच्छी नहीं लगती, कुछ दार्शनिक ज्यादा लगती है।
29, August 2006 at 2:23 am
बहुते टेकनिक्ल प्रश्न पूछे हैं, सागर भाई. हम तो मछली पकडने चले..हमारे बस का नही है….
29, August 2006 at 3:40 am
सागर जी, अगले अंक मे मै आपके सारे तो नही कुछ सवालो का जवाब देने की कोशीश करुंगा
29, August 2006 at 10:57 am
[...] सागर जी क्या ख्याल है, आपके प्रश्नो की सुची कम हुयी या और बढ गयी ?________________________________________________________ [...]