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	<title>Comments on: एक मुस्लिम विद्वान: डॉ. कल्बे सादिक</title>
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	<description>गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं</description>
	<pubDate>Wed, 23 Jul 2008 13:23:05 +0000</pubDate>
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		<title>By: Razia mirza</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-2290</link>
		<dc:creator>Razia mirza</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jul 2008 16:37:26 +0000</pubDate>
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		<description>सागर जी, सबसे पहले आपका शुक्रिया अदा करुंगी जो आपने मेरे ब्लोग पर बडे अच्छे कमेन्ट दीये.दुसरा शुक्रिया ये अदा करुंगी कि आप डो.कल्बे सादिक साहब की बात अपने ब्लोग के ज़रीये जनता के सामने लाये। मै भी डो.कल्बे सादिक़ साहब की बात से संपूर्ण सहमत हुं।आभार।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सागर जी, सबसे पहले आपका शुक्रिया अदा करुंगी जो आपने मेरे ब्लोग पर बडे अच्छे कमेन्ट दीये.दुसरा शुक्रिया ये अदा करुंगी कि आप डो.कल्बे सादिक साहब की बात अपने ब्लोग के ज़रीये जनता के सामने लाये। मै भी डो.कल्बे सादिक़ साहब की बात से संपूर्ण सहमत हुं।आभार।</p>
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		<title>By: Jitu</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-341</link>
		<dc:creator>Jitu</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 07:22:39 +0000</pubDate>
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		<description>हर कौम मे मानसिक रुप से प्रगतिशील और पिछले लोग होते है। लेकिन सवाल यही है कौम मे प्रगतिशील लोगों का बहुमत है या अल्पमत। अक्सर देखा गया है, प्रगतिशील लोगों की आवाज को अनसुना कर दिया जाता है। आज मुसलमान समाज फिर एक दोराहे पर खड़ा है, एक तरफ़ एकता, प्रगति, शिक्षा, स्वावलम्बिता है तो दूसरी तरफ़, अशिक्षा, द्वेष, जिहाद, कट्टरता और धर्मान्धता है। देखना यह है प्रगतिशील लोगों की सुनी जाती है या कठमुल्ले मौलवियों की मानी जाती है।

फैसला आम मुसलमान को ही करना है, जो आप इन्सान की तरह रोजी रोटी के लिए मेहनत कर रहा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हर कौम मे मानसिक रुप से प्रगतिशील और पिछले लोग होते है। लेकिन सवाल यही है कौम मे प्रगतिशील लोगों का बहुमत है या अल्पमत। अक्सर देखा गया है, प्रगतिशील लोगों की आवाज को अनसुना कर दिया जाता है। आज मुसलमान समाज फिर एक दोराहे पर खड़ा है, एक तरफ़ एकता, प्रगति, शिक्षा, स्वावलम्बिता है तो दूसरी तरफ़, अशिक्षा, द्वेष, जिहाद, कट्टरता और धर्मान्धता है। देखना यह है प्रगतिशील लोगों की सुनी जाती है या कठमुल्ले मौलवियों की मानी जाती है।</p>
<p>फैसला आम मुसलमान को ही करना है, जो आप इन्सान की तरह रोजी रोटी के लिए मेहनत कर रहा है।</p>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-340</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 06:00:08 +0000</pubDate>
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		<description>मेरा सदा से मत रहा हैं की प्रगतेशील मुस्लिम विद्वानो को आगे लाना चाहिए, अगर मुस्लिम इस काम में बाधक बने तो हिन्दूओ को उन्हे समर्थन दे कर आगे बढ़ाना चाहिए. इसी में मुस्लिमो की तथा देश की भलाई हैं. 
सादिकजी (जी से मुस्लिलमानो को आपत्ति हो तो पता नहीं) जैसो को प्रचार मिलना चाहिए जबकी होता यह हैं की टूचे छोटे मोटे मोलवी खुराफ़ात कर सारा प्रचार ले जाते हैं और मुझ जैसे लोग उन्हे कोसने लग जाते हैं.
सागर भाई अच्छा किया हैं आपने.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा सदा से मत रहा हैं की प्रगतेशील मुस्लिम विद्वानो को आगे लाना चाहिए, अगर मुस्लिम इस काम में बाधक बने तो हिन्दूओ को उन्हे समर्थन दे कर आगे बढ़ाना चाहिए. इसी में मुस्लिमो की तथा देश की भलाई हैं.<br />
सादिकजी (जी से मुस्लिलमानो को आपत्ति हो तो पता नहीं) जैसो को प्रचार मिलना चाहिए जबकी होता यह हैं की टूचे छोटे मोटे मोलवी खुराफ़ात कर सारा प्रचार ले जाते हैं और मुझ जैसे लोग उन्हे कोसने लग जाते हैं.<br />
सागर भाई अच्छा किया हैं आपने.</p>
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		<title>By: pratyaksha26</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-339</link>
		<dc:creator>pratyaksha26</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 05:37:02 +0000</pubDate>
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		<description>डा. कल्बे सादिक के विचार आपने सबके सामने लाया , अच्छा लगा</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>डा. कल्बे सादिक के विचार आपने सबके सामने लाया , अच्छा लगा</p>
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	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-338</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 05:35:20 +0000</pubDate>
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		<description>जनाब कल्बे सादिक की बात सही है - मगर सागर भाई ये जनाब शिया फिरके से हैं जिसे दूसरे सुननी मुसलमान नही मानते। मैं भी कल्बे सादिक की चंद बातों से इत्तेफाक करता हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जनाब कल्बे सादिक की बात सही है - मगर सागर भाई ये जनाब शिया फिरके से हैं जिसे दूसरे सुननी मुसलमान नही मानते। मैं भी कल्बे सादिक की चंद बातों से इत्तेफाक करता हूं।</p>
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		<title>By: ratna</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-337</link>
		<dc:creator>ratna</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 04:31:11 +0000</pubDate>
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		<description>Good Work, Keep it up.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Good Work, Keep it up.</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-336</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2006 02:12:33 +0000</pubDate>
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		<description>आप वाकई साधुवाद के पात्र हैं, क्या शोध है! अच्छा लगा भाई, आपकी मेहनत देख कर.
शुभकामनायें...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप वाकई साधुवाद के पात्र हैं, क्या शोध है! अच्छा लगा भाई, आपकी मेहनत देख कर.<br />
शुभकामनायें&#8230;</p>
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	</item>
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		<title>By: अतुल</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2006/09/06/kalbesadiq/#comment-334</link>
		<dc:creator>अतुल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Sep 2006 19:12:08 +0000</pubDate>
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		<description>आज जरुरत इस बात की है कि मुस्लिम विद्वान जो प्रगतिशील धारा के हैं उनके विचार भी आवाम के सामने लाये जाये। पर मीडिया चाहे वह पथरचिमि हो या भारतीय इस्लाम का विद्रूप चेहरा दिखाने में ही मशगूल रहता है। जब हम मिरा नायर के अठ्ठारहवी सदी के सती चित्रण पर भड़क सकते हैं तो इमराना प्रकरण या एसएमएस तलाक पर क्यों नही? मुस्लिम समाज में सब के सब जाहिल नही, सब के सब जेहादी नही, उन्हें लेबलाईज करना , जनरलाइज करके राष्ट्रद्रोही , आँतकवादी करार देना भी एक तरह कि फतवेबाजी नही तो और क्या है? 

	जरूरत आज सूफी धारा को आगे बढ़ाने और मौलाना कल्बे सादिक सरीखे विद्वानो के बी विचार सुनने की है। सागर भाई साधुवाद के पात्र हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज जरुरत इस बात की है कि मुस्लिम विद्वान जो प्रगतिशील धारा के हैं उनके विचार भी आवाम के सामने लाये जाये। पर मीडिया चाहे वह पथरचिमि हो या भारतीय इस्लाम का विद्रूप चेहरा दिखाने में ही मशगूल रहता है। जब हम मिरा नायर के अठ्ठारहवी सदी के सती चित्रण पर भड़क सकते हैं तो इमराना प्रकरण या एसएमएस तलाक पर क्यों नही? मुस्लिम समाज में सब के सब जाहिल नही, सब के सब जेहादी नही, उन्हें लेबलाईज करना , जनरलाइज करके राष्ट्रद्रोही , आँतकवादी करार देना भी एक तरह कि फतवेबाजी नही तो और क्या है? </p>
<p>	जरूरत आज सूफी धारा को आगे बढ़ाने और मौलाना कल्बे सादिक सरीखे विद्वानो के बी विचार सुनने की है। सागर भाई साधुवाद के पात्र हैं।</p>
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