॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

मेरा घोषणा पत्र

Posted by सागर नाहर on 23, December 2006

मित्रों
चुनाव आते ही चिठ्ठा जगत में इस सर्दी में भी सरगर्मी छा गयी है, सारे भूले बिसरे और जिन्होने अपनी दुकान मुहर्त के बाद खोली ही नहीं या कभी कभार खोली सब के सब मैदान में आ जुटे हैं, तो हम पीछे क्यों रहें हम भी अपने चिठ्ठे पर कई दिनों से जमी धूल को साफ़ कर मैदान में आ रहा हूँ, सारे उम्मीदवार सावधान हों जायें, इस वर्ष के स्वघोषित सर्वश्रेष्ठ हिन्दी चिठ्ठाकार की सवारी आ रही है।
सब लोगों ने अपने अपने चुनावी घोषणा पत्र तैयार कर लिये और अपने अपने चिठ्ठे पर प्रकाशित भी कर दिये तो भाई हम पीछे कैसे रहते, हम भी अपना घोषणा पत्र तैयार कर दिया हूँ। सारे लोगों ने अपने अपने घोषणा पत्र में अपने बारे में बड़ी बड़ी घोषणायें करी है कि ये करेंगे, वो करेंगे पर हम ऐसी वैसी कोई घोषणा नहीं कर रहे हैं। पहले आप इस उम्मीदवार के बारे में पूर्ण जानकारी ले लेवें।

  • एक भारतीय नेता में जो गुण होने चाहिये वे सारे के सारे गुण मुझमें है, मसलन दलबदलू हूँ, एक ठेठ देसी नेता की तरह जनता को कभी कभार ही दर्शन नेता हूँ, देता कुछ भी नहीं (टिप्पणी) पर पाने (टिप्पणी) की उम्मीद बहुत करता हूँ।
  • एक शातिर भारतीय नेता की तरह फ़ूट डालो और राज करो की नीती पर अमल करता रहता हूँ, लगातार चर्चा में रहने के लिये कुछ ना कुछ खुराफ़ात करता रहता हूँ। आज के जमाने में एक नेता को बिल्कुल ऐसा ही होना चाहिये, बाकी जिस तरह अटल जी जैसे कवि ह्रदय के लिये राजनीती उचित नहीं थी सो आज के सीधे सादे और गुरू और चेले जैसे नेताओं का राजनीती में क्या काम?
  • जनता को काम के जुगाड़ भी कभी कभार दे देता रहता हूँ।
  • सबसे खास बात यह है कि जज मण्डली में भी अपनी बहुत (जैक) पहूँच है।

और भी कई विशेषतायें मुझमें है जो आप अच्छी तरह जानते हैं। मैं खुद अपने मुँह से अपना बखान करूं ठीक नहीं लगता।

अब लीजिये पेश में है मेरा घोषणा पत्र:

  1. में एक भारतीय नेता की तरह चुनाव जीतने के बाद कभी कभार ही दर्शन दूंगा, यानि कभी कभार ही चिठ्ठा लिखूंगा, (धर्मेन्द जी को में आदर्श मानकर ये घोषणा पत्र तैयार कर रहा हूँ)और इसकी तैयारी मैने कुछ महीनों से शुरू भी कर दी है।
  2. मैने एक ऐसा सोफ़्टवेयर तैयार कर लिया है जो उन चिठ्ठाकारों के चिठ्ठों पर एक से ज्यादा नाम से औटोमैटिक पाँच पाँच टिप्पणियाँ कर देगा, मुझे वोट देंगे उनके लिये भले ही उन लोगों ने कुछ नया लिखा हो या नहीं। टिप्पनीयाँ कब-कब होगी ये चुनाव जीतने के बाद बताया जायेगा।
  3. हिन्दी चिठ्ठा जगत में भी गुटबाजी शुरू करवा दूंगा। मेरे चुनाव जीतने के बाद लोगों को एक दूसरे के चिठ्ठे पर असभ्य टिप्पनीयाँ करने की छूट होगी, विरोध करने वाले चिठ्ठाकार को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
  4. एक दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाने और किसी को नीचा दिखाने की छूट होगी, किसी तरह का कोई प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जायेगा।
  5. जितने वादे कर रहा हूँ उनको पूरा कभी नहीं करूंगा, कि यही एक आदर्श नेता का गुण है।

अब ऐसे महान और योग्य उम्मीदवार के होते हुए आप योग्य उम्मीदवार की तलाश में उनके पुराने चिठ्ठे ना खंगालें , अपना समय ना बर्बाद करें। मुझे मेरे चुनाव चिन्ह “॥ दस्तक॥” को नोमिनेट कर अपने पवित्र और कीमती मत को सार्थक करें। मेरे इस घोषणा पत्र के बावजूद भी मुझे इस वर्ष का श्रेष्ठ चिठ्ठाकार घोषित नहीं किया गया तो मैं अपने पूर्ण होशो हवास में घोषणा करता हूँ कि मैं सन्यास ले लूंगा ( भाई चिठ्ठा कारी से ही, आप कुछ और समझे थे क्या?)
अब नारा वाराभी लगाओगे या यह काम भी उस ठाकुर की तरह मुझे ही करना होगा? :)

( इस घोषणा पत्र से कोई आहत ना हों, लेख के सबसे नीचे लगे स्माईली :) पर ध्यान देकर अन्यथा ना लें :)

यह लेख सिर्फ़ हँसी- मजाक या विनोद के लिये लिखा गया है, मुझसे कई धुरंधर इस मैदान में है।

17 Responses to “मेरा घोषणा पत्र”

  1. Jitu Says:

    चुनाव आयुक्तों की नजर सभी उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार पर है। सब कुछ नोट किया जा रहा है, उसे समय रहने पर सार्वजनिक किया जाएगा।

    राजनैतिक चुनाव प्रचार की तरह चुनाव किया तो क्या किया? जिनको हम गाली देते है, उन्ही को आदर्श बनाकर चुनाव लड़ेंगे? हमे अपना रास्ता खुद चुनना होगा। ये चुनाव प्रचार के (हिन्दी चिट्ठाकारों के) परिवार के अन्दर हो रहे है, इसलिए हमे अपनी अच्छाईयां अपने लेखों के माध्यम से बतानी होंगी, दूसरे चिट्ठाकारों की कमिया गिनाकर नही।

  2. Pramendra Pratap Singh Says:

    कानून को अपने हाथ मे न ले अन्‍यथा कानून आपके लेख को अन्‍यथा ले लेगा क्‍योकि कानून अंधा होता है वह स्माइली नही देख सकता / :)

  3. bhuvnesh Says:

    गुरू किस जमाने में पड़े हो अभी तक
    हमने तो बूथ कैप्चरिंग की पूरी तैयारियाँ कर लीं हैं और कुछ लठैत इकट्ठा कर लिये हैं, चुनाव जीतना तय है

  4. संजय बेंगाणी Says:

    बुथ केपचरिंग को रोकने का इंतजाम किया जा रहा है, इसलिए ऐसे ओपसन को दिमाग से निकाल देना. :)

  5. अनूप शुक्ला Says:

    भैया, आपके आदर्श धर्मेंदरजी हैं। तो कोई हेमामालिनी जी का भी इंतजाम है क्या?

  6. सागर चन्द नाहर Says:

    @ जीतू भाई सा.
    यह चुनाव तो अच्छा लिखने वालों का है ना कि हिन्दी चिठ्ठा जगत के अध्यक्ष पद के लिये. यह में जानता हूँ, और मानिये अगर में यह चुनाव जीतता हूँ तो मुझे वे सारे अधिकार नहीं मिल जाते जिनका जिक्र मैने यहाँ किया है।
    मेरी यह पोस्ट तो सिफ़ एक मजाकिया लेख मात्र है, इस लेख के माध्यम से मैं किसी की गलतियाँ या कमियाँ नहीं गिना रहा हूँ। मैं मात्र मजाक कर रहा हूँ। मुझसे कई गुना ज्यादा अनेक गुणीजन यहाँ है मैं मसलन, समीरलाल जी, बिहारी बाबू, भुवनेश जी, कविराज, उनमुक्त जी आदि,(जिनके नाम नहीं लिखे वे नाराज ना हों, क्यों कि अभी जितने नाम याद आये लिख दिये ) :) इनमें से कोई भी सर्वश्रेष्ठ चुना जाता है तो मुझे खुशी होगी।

  7. गिरिराज जोशी "कविराज" Says:

    सबसे पहले कुछ आपके लेख के बारे में -

    आपने कहा कि - “एक भारतीय नेता में जो गुण होने चाहिये वे सारे के सारे गुण मुझमें है”, मगर हक़िकत तो यह है कि आपमें तो उनका मुख्य गुण ही नहीं है. भारतीय नेता का मुख्य गुण है - “कथनी और करनी में सर्वाधिक अंतर”. मगर आपके इस आलेख में यह देखने को नहीं मिला. :) कृपया अन्यथा न लें.

    आपने कहा कि - “जिस तरह अटल जी जैसे कवि ह्रदय के लिये राजनीती उचित नहीं थी”. तो शायद आपके पास जो जानकारी है वो त्रुटीयुक्त है क्योंकि जिन कवि ह्रदय अटल जी की आप बात कर रहें है वो भारत के प्रधानमंत्री रह चुके है जो कि वर्तमान राजनीति में सर्वोच्च पद है.

    अब कुछ आपकी टिप्पणी के बारे में -

    आप भी पंकजजी की तरह अपना नाम वापस ले लीजिये क्योंकि जब आपको खुद पर ही भरोसा नहीं तो नामांकन ही क्यों करवाया? (कृपया ध्यान दें, यहाँ मेरे कहने का यह तात्पर्य नहीं है कि पंकज भाई को खुद पर भरोसा नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ कि तरकश डोट कॉम के सक्रिय सदस्य होने की वजह से उन्होने अपना नाम वापस लिया है.)

    आप बस नियमित लिखते रहें और दिल छोटा ना करें, क्योंकि जो नहीं जानता वो ही ज्ञानार्जन कर सकता है. :)

  8. समीर लाल Says:

    आप बहुत मजाकिया हैं वो हम हास्य-व्यंग्य का टैग देख कर जान गये कि आप मजाक कर रहे हैं. कृप्या अन्यथा न लें :) :)

    आप विजयी हों, आपका ही परचम लहराये, आप ही आप हों हर तरफ-यही हमारी हार्दिक शुभकामनायें हैं.

  9. Shrish Says:

    एक भारतीय नेता में जो गुण होने चाहिये वे सारे के सारे गुण मुझमें हैं

    नहीं जी अगर ऐसा होता तो चुनाव से पहले ये न बताते - “जितने वादे कर रहा हूँ उनको पूरा कभी नहीं करूंगा, कि यही एक आदर्श नेता का गुण है।

    @ Jitu,
    जीतू भैया, चुनाव प्रचार के चिट्टियों पर नेताओं की भाषा उन्हें आदर्श मानकर नहीं बल्कि उनपर व्यंग्य के तौर पर लिखी जा रही है।

    @ Pramendra Pratap Singh,
    वाह ! एकदम सही फरमाया :) :)
    ऐसी मजेदार टिप्पणी तो ‘चिट्ठा-चर्चा’ पर ‘आज की टिप्पणी’ में शामिल होनी चाहिए थी।

    @ bhuvnesh,
    इलेक्शन-बूथ तो ‘तरकश.कॉम’ पर है भुवनेश जी। उसे कैप्चर कैसे करोगे हे-हे :)

    और सागर भाईसा को चुनाव जीतने के लिए बहुत सी शुभकामनाएं। उम्मीद है इस चुनाव के बहाने और भी मजेदार पोस्टें पढ़नें को मिलेंगी।

  10. फुरसतिया » उभरते हुये चिट्ठाकार Says:

    [...] फुरसतिया:- और ये जो सागरजी कह रहे हैं कि उनके आदर्श धर्मेंन्दर हैं। ये क्या लफड़ा है? क्या कोई हेमामालिनीजी हैं उनकी निगाह में ? शुकुलजी:- अरे नहीं भाई! निर्मलाजी(श्रीमती सागर) कोई प्रकाश कौर( धर्मेंन्द्र की पत्नी) हैं कि सागरजी को धर्मेंन्द्र की सारी कारगुजारी करनें दें! वैसे चिट्ठाकार बिरादरी इस पर एहतियातन निगाह रखे हुये है। सुना तो यह भी है कि पंकज ने इसीलिये नाम वापस लिया है ताकि वे सागरजी पर निगाह रख सकें। कहीं ऐसा न हो कि यहां वोटिंग के भभ्भड़ में सागर किसी चबूतरे( टंकी ऊंची होती है न!) पर चढ़ जायें और कहें -ब्लागबालों, हमें अगर बसंती (की टिप्पणी) न मिलीं तो मैं ब्लाग बंद कर दूंगा। फिर मनाते रह जाओगे हमें! [...]

  11. सागर चन्द नाहर Says:

    @प्रमेन्द्र प्रताप सिंह जी
    आदर्श नेता का सबसे बड़ा गुण यही है कि वह कानून तोड़े या तोड़ कर उससे बचने का उपाय जानता हो, और हमारे पिताजी कोई विनोद शर्मा थोड़े ही है जों अपने मनु को छुड़ा नहीं सके, वैसे हमारे पिताजी तक बात नहीं पहुँचेगी हमही सबसे निबटना जानते हैं। :)
    @भुवनेश जी
    बिहार में लालू के चुनाव हारने के बाद लठैत निकम्मे हो गये हैं, उनके दम पर अब चुनाव जीतना असंभव है, आप कुछ और बंदोबस्त करें। :)
    @संजय भाई
    आप ही का सहारा है अब :)
    @अनूप शुक्ला जी
    बिल्कुल है जी हेमा जी का भी और ऐशा (चलिये हटिये हमें सरम आ रही है)हमारे चुनाव प्रचार में आ रही है, और आप चाहते हैं तो आपको भी ई-हेमा जी मेल में भेज देते हैं। :)

  12. सागर चन्द नाहर Says:

    @गिरीराज जोशी जी
    आपने कहा कि - “जिस तरह अटल जी जैसे कवि ह्रदय के लिये राजनीती उचित नहीं थी”. तो शायद आपके पास जो जानकारी है वो त्रुटीयुक्त है क्योंकि जिन कवि ह्रदय अटल जी की आप बात कर रहें है वो भारत के प्रधानमंत्री रह चुके है जो कि वर्तमान राजनीति में सर्वोच्च पद है.
    आपने ध्यान नहीं दिया शायद मैने यह लिखा है कि अटल जी के लिये राजनीती उपयुक्त नहीं थी, ऐसा नहीं लिख कि वे प्रधानमंतरी नहीं रहे!!!!और हुआ क्या ” बेचारे घर के रहे ना घाट के” अब दल में ही उनकी बात कोई नहीं सुनता इसी लिये मैं आप गुरू चेला से कह रहा हूँ मैदान से हट जाओ वरना कहीं ऐसा ना हो कि चुनाव भी ना जीत पाऒ और टिप्पणियों को भी तरस जाओ :)
    @समीर लाल जी
    आप का आशीर्वाद मिल गया अब हमें जीतने से कोई रोक नहीं सकता।
    @श्रीश्जी
    धन्यवाद बधाई देने के लिये
    इलेक्शन-बूथ तो ‘तरकश.कॉम’ पर है भुवनेश जी। उसे कैप्चर कैसे करोगे हे-हे :)
    विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि भुवनेश जी बूथ कैप्चरिंग का मतलब तरकश को हैक करने का प्लान बना रहे हैं, और
    लठैत इक्कट्ठे कर लिये का मतलब है
    उन्होने हैकर्स को इकठ्ठा कर लिया है :)

  13. सागर चन्द नाहर Says:

    श्रीश जी
    माफ़ी चाहता हूँ आपका नाम टाइप करने में गलती हो गयी है।

  14. Shrish Says:

    सागर जी, एक छोटा सा सुझाव है, टिप्पणियों के उतर देते हुए ‘@’ तथा टिप्पणीकर्ता के नाम के बीच में स्पेस दिया कीजिए।

  15. SHUAIB Says:

    हो हो बहुत बढिया घोषणा चल रही है भाई, आप ख़ुदा को दस्तक दो ख़ुदा आपको दस्तक देगा :)

  16. Pramendra Pratap Singh Says:

    कोई भी जीतेगा मुझे फर्क नही पडेगा, क्‍योकि जीतेगा कोई अपना चिठ्ठाकार ही । लड़ाको को चुनाव जीतने के अग्रिम बधाई (सभी मे मेरा नाम भी सामिल है।) क्‍योकि हम भी है जोश मे।
    @ सागर भाई- क्‍यों पडे हो चक्‍कर मे, कोई नही है टक्‍कर मे। कहॉं है आप केवल फायदे वाली ही न्‍यूज पढ़ते है, और विपक्ष वाली नही न्‍यायपालिका सक्रिय हो गई है। श्री सोरेन, सिद्धू सभी अभी ससुराल मे है। कहीं आप एक ही ससुराल मे रहिये दूसरी के जिये क्‍यो ललाइत है। कृपया अन्‍यथा लेना हो तो ले लिजियेगा। अखिर मे स्‍माइली है ना ;-|

  17. Nidhi Says:

    मुझे तो बड़ा मज़ा आया पढ़ के. चुनाव के लिये शुभकामनायें. :D

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