पाँच सवाल: मेरा नंबर कब आयेगा?
Posted by सागर नाहर on 24, February 2007
अमित जी ने एक मजेदार खेल शुरु किया तब चिट्ठाकारों के विचार पढ़ कर बड़ा मजा आने लगा था, लगभग सभी पुराने चिठ्ठाकारों को नामित होते देख कर अपने मन ने भी सवाल करना शुरू कर दिया कि ” मेरा नंबर कब आयेगा”?
जब कई दिनों तक नामित नहीं हुआ तो मन ने अपने आप को समझा लिया कि भाई अभी नये हो पहले पुरानों को अपने विचार लेख लेने दो एक दिन तुम्हारा नंबर भी आ जायेगा, और जब वह दिन आज आ गया है यानि श्री राजीव टंडन जी ने आज मुझे अपने पाँच सवालों के लिये नामित कर दिया है तो जवाब देने के लिये सोचना पड़ रहा है। इतना आसान नहीं है सवालों के जवाब देना।
पहला सवाल: आपकी दो प्रिय पुस्तकें और दो प्रिय चलचित्र (फिल्म) कौन सी है?
इस प्रश्न में दो की सीमाओं में बंधना मुझे मंजूर नहीं और वैसे भी दो का चयन करना बहुत मुश्किल है। मैने अब तक जो पुस्तकें पढ़ी है उसमें से मुझे एक तो श्री अमृत लाल नागर जी की “नाच्यौ बहुत गोपाल“ और दूसरी है गोर्की की “माँ “बहुत पसन्द आई और इन्हें में बार बार पढ़ना चाहूंगा। । इनके अलावा मुझे लगभग सारे साहित्यकारों के साहित्य और जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा के सारे उपन्यास पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। पर शर्मा जी की “सांझ हुई घर आये”, नया संसार और पिशाच सुन्दरी कई बार पढ़ा है। ओशो की “जिन खोजा तिन पाईयां” भी बहु पसन्द है।
गुजराती में पन्ना लाल पटेल की मळेळा जीव और जिन्दगी जिन्दगी बहुत अच्छी लगती है।
फिल्मों में भी दो का चयन कर पाना मुश्किल है फिर भी मुझे विमल रॉय की दो बीघा जमीन और व्ही शांताराम की दो आँखे बारह हाथ सबसे ज्यादा पसन्द है।
इनके अलावा में अपनी बहुत सारी पसंदीदा फिल्मों के नाम बता रहा हूँ। व्ही शांताराम की तीन बत्ती चार रास्ता और स्त्री, सोहराब मोदी की पृथ्वी वल्ल्भ, सुदेश भोंसले की हक, महेश भट्ट की डैडी, जख्म और अर्थ। सीमा (नूतन) आस्था (रेखा) , डोली सजा के रखना(ज्योतिका) , चुपके चुपके (धर्मेन्द्र), बावर्ची, आनंद जैसी और भी बहुत सारी फिल्में पसन्द है।
दूसरा इन में से आप क्या अधिक पसन्द करते हैं पहले और दूसरे नम्बर पर चुनें – चिट्ठा लिखना, चिट्ठा पढ़ना, या टिप्पणी करना, या टिप्पणी पढ़ना (कोई विवरण, तर्क, कारण हो तो बेहतर)
इस प्रश्न का उत्तर देना बहुत आसान है मुझे चिट्ठे पढ़ना बहुत पसन्द है क्यों……? क्यों कि मुझे पढ़ने का खानदानी नशा है और मैं पढ़ने का इतना बड़ा नशेड़ी हूँ कि खाली लिफाफे भी नहीं छोड़ता (बकौल निधि)। और चिट्ठे पढ़ कर ही तो में चिट्ठे लिखना सीखा बाकी यह मुँह और मसूर की दाल….हुँह!
तीसरा आपकी अपने चिट्ठे की और अन्य चिट्ठाकार की लिखी हुई पसंदीदा पोस्ट कौन-कौन सी हैं?
(पसंदीदा चिट्ठाकार और सर्वाधिक पसंदीदा पोस्ट का लेखक भिन्न हो सकते हैं
अब सबसे मुश्किल प्रश्न यही लग रहा है क्यों कि किसी एक का नाम लेना बाकी के साथ अन्याय होगा। फिर भी फ़ुरसतिया जी की फिराक गोरखपुरी पर लिखी रचना सबसे ज्यादा पसन्द आई। मेरी कोई भी रचना मुझे खास पसन्द नहीं है क्यों कि अभी मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है पर क्या हर मुसलमान बुरा होता है और इसका भाग २ , मुस्लिम विद्वान कल्बे सादिक, सावित्री बाई खानोलकर लिखते समय संतोष हुआ और रूठी रुठी सजनी मनाऊं कैसे?लिखते समय थोड़ा मजा आया।
चौथा आप किस तरह के चिट्ठे पढ़ना पसन्द करते हैं?
लगभग हर तरह के तकनीकी, हास्य, साहित्यिक हाँ गूढ़ कविताओं वाले चिट्ठे थोड़े कम पसन्द है। तकनीकी चिठ्ठों के चक्कर में अपने कम्प्यूटर पर प्रयोग करने में एकाद बार पूरा कम्प्यूटर तक फोरमेट करना पड़ा था फिर भी तकनीकी विशेष पसन्द है।
पाँचवा चिट्ठाकारी के चलते आपके व्यापार, व्यवसाय में कोई बदलाव, व्यवधान, व्यतिक्रम अथवा उन्नति हुई है?
व्यवसाय में तो उन्नति तो खास नहीं हुई पर बदलाव बहुत हुआ है कई बार चिठ्ठे पढ़ते समय कोई ग्राहक आता है तो अखरने लगता है। मेरे व्यक्तिगत जीवन में इतना प्रभाव पड़ा है कि आजकल सपने भी चिट्ठे के ही दिखते हैं। :)
छठवां आपके मनपसन्द चिट्ठाकार कौन है और क्यों?
फ़ुरसतिया जी, जीतू भाई, संजय बैंगाणी और समीरलाल जी और…. (किस संकट में फंसा दिया आपने) क्यों पसन्द है बस अपने उम्दा लेखन की वजह से।
सातवां अपने जीवन की सबसे धमाकेदार, सनसनीखेज, रोमांचकारी घटना बतायें
अपने जीवन कि सबसे खास घटना जो थी उस बताने पर आपने प्रतिबंध लगा दिया है
ले दे कर वह एक ही तो खास घटना है हमारे जीवन में।
मेरे जीवन की कई खास घटनाओं में से एक थी अटल जी से पेन मांगना।
आठवां और अंतिम सवाल…. हाश . आप किसी साथी चिट्ठाकार से प्रत्यक्ष में मिलना चाहते हैं तो वो कौन है? और क्यों?
मैं मिलना चाहूंगा श्री राजीव टंडन जी, अनूप शुक्ला जी, जीतू भाई, समीर लाल जी, बैंगाणी बंधू, गिरिराज जोशी, भुवनेश, श्रीश, निधि और आशीष श्रीवास्तव, अतुल अरोड़ा, ईस्वामी, प्रमेन्द्र प्रताप सिंह और….. भाई सबसे मिलना चाहूंगा क्यों ना एक विश्वव्यापी ब्लॉगर मीट रख लेवें
हाँ अब मेरा सवाल पूछने का नंबर है मैं यही सवाल इन पाँच से पूछना चाहूंगा
शुऐब, गिरिराज जोशी, मान्या, रत्ना दी (रत्ना की रसोई), नीरज दीवान और ईस्वामी संजय बैंगाणी, नितिन बागला और धुरविरोधी ( ज्यादा नाम इसलिये दिये हैं कि एक तो मैं गणित में थोड़ा कमजोर हूँ
और दूसरा यह कि जिसका नाम लिखना चाहते हैं वह पहले से ही नामित निकल रहा है सो इनमें से जो नामित नहीं हुआ है पहले से; वह जवाब जरूर देवे और अगर सारे नामित होने बाकी हों तो सब जवाब देवें)


pankaj बेंगाणी said
दादा,
इनमे से ज्यादातर चीजे तो हमे पता थी.. हा हा, कोई नई तीर मारते!
वैसे दुसरो के लिए तो नया ही है… क्यों?
वैसे मै भी कब का शिकार हो चुका हुँ, लगता है अब लिखना ही पडेगा
संजय बेंगाणी said
अगर आप नामंकित नहीं होते हो तो, लोग ऐसे देखते है मानो आप सड़क व लोगो के नापसन्द चिट्ठाकार हो.
मुझे इस स्थिती से आपने बचा लिया. 
इससे पहले ताऊ ने मेरी इज्जत (है तो) बचा ली थी. फिर भी आभार.
जल्दी ही आपके व ताऊ के जवाब देता हूँ, और आपकी तरह नहीं की जो जानते थे वही लिख दिया. कुछ रहस्योदघाटन भी करते….
संजय बेंगाणी said
सड़कछाप व लोगो के नापसन्द चिट्ठाकार हो.
राजीव said
सागर जी, बहुत ठीक उत्तर दिये आपने… पर एक गड़बड़ भी हो गयी। यदि ध्यान से देखें मेरे द्वारा पूछे गये प्रश्नों को तो देखिये – मैंने दिये तो 8 प्रश्न थे, कुछ चुनौती लाने के लिये, परंतु आप ही की सुविधा के लिये यह भी कहा था किन्हीं भी 5 प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं अपनी सुविधानुसार।
आपने तो पूरा का पूरा प्रश्न पत्र ही हल कर दिया… बहुत खूब!
समीर लाल said
हम तो वही खास घटना देखने आये थे और आप कहते हैं कि प्रतिबंधित है.
बढ़िया लिखा है.
उन्मुक्त said
यह तो वही बात हुई कि कोई पांच जवाब जांच लो।
राजीव said
समीर जी, ऐसी संभावना थी, इसीलिये इस प्रश्न में उस घटना का उल्लेख अमान्य कर दिया था।
उन्मुक्त जी, आपका आँकलन सही है। यह तो उत्तरदाताओं की सुविधा के ही लिये किया था!
नितिन said
सागर भाई, बहुत बढिया लिखा है, आप के बारे जानकर प्रसन्नता हुई!
उन्मुक्त जी, मैने कोई ५ जवाब जांच लो वाली गलती की थी कक्षा १० की गणित की छमाही परीक्षा में की थी, ६ के ६ प्रश्न हल कर दिये अतिउत्साह में और अंक मिले ८०%। बाद में पता चला कि पहला प्रश्न थोडा गलत था और शिक्षक ने कहा मैने पहले ५ ही जांचे।:)
manya said
सागर जी आपके बारे में जानना अच्छा लगा.. जवाब भी रोचक थे.. पर लगता है सबसे दिल्चस्प बात छुपा ली गई
.. जिन चिट्ठों के नाम आप्ने बताये हैं उन्हेम जरूर पढूंगी.. वैसे जीतू भाई पहले ही फ़ंसा चुके हैं इस खेल में और आपने भी अबतक उअनके सवालों के जवाब भी नहीं दिये और आपके सवाल अलग हैं इस्लिये दोनों के जवाब दूंगी.. पर ये कितना कठिन होने वाला है ये आपको बेहतर पता होगा… पर अब तो लिखना पङेगा ही वह भी कोशिश करूंगी जल्द लिखूं..
ई-स्वामी » पांच सवाल, पांच जवाब! said
[...] भाई ने होलसेल में सवालों के जवाब देने के बाद थोक में [...]
Shrish said
वाह जी जवाब अच्छे दिए पर वही बात कुछ रहस्योदघाटन होता तो…
अटल जी से पेन मांगने वाला संस्मरण मजेदार रहा।
खेल जमता जा रहा है, फंसने पर पहले टेंशन होती है पर फिर लिखते हुए मजा आता है।
हरिराम said
गिरिराज ‘हिमालय’ से निकली गंगा जैसी अनेक नदियों की तरह आपके ब्लॉग-लेखन से प्रेरणा-पुँज भरकर समग्र भारत में हिन्दी-ब्लॉगिंग के अनेक नद,उप-नद…. बहकर युगों से अतृप्त पड़े पितरों का उद्धार करने में लग गए हैं…
मेरे जवाब - लाक/फ्रीज़ किये जायें « इन्द्रधनुष said
[...] बागला सागर जी ने जब थोक में अपने शिकार बनाये थे तो मुझे भी लपेटे मे ले लिया था…८ [...]