दस्तक का एक साल पूरा
Posted by सागर नाहर on 12, March 2007
यूं ही गिरते पड़ते और संभलते हुए आज दस्तक को हिन्दी चिट्ठा जगत में एक साल पूरा हो ही गया। साईबर कॉफे संचालन करने के सात आठ महीने तक तो सिर्फ हिन्दी की एक साईट वेबदुनिया पता थी और बाकी की win98 की वजह से खुलती नहीं थी। ऐसे में एक दिन गूगल महाराज से hindi sites ढ़ूंढ़ने को कहा तो महाराज फुरसतिया जी की उस पोस्ट पर लेकर गया जिसमें कविता थी हम तो बाँस हे- जितना काटो उतना हरियायेंगे। उसके बाद जीतू भाई का मेरा पन्ना मिला और एक के बाद एक कड़ियाँ जुड़ती गई।
शुरुआत में तो बड़ा अजीब लगता था पर धीरे धीरे मन में इच्छा होने लगी कि अपनी खुद की साईट बनायेंगे। उससे पहले हिन्दी मिलाप के लिए कुछ लेख लिखे थे, कुछ छपे कुछ नहीं, सो छपास की पीड़ा भी मन में उछालें मार रही थी। ऐसे में नारद और सर्वज्ञ का पता चला और दो दिनों में यानि पिछली होली के दिन रंगों से निवृत होने के बाद पहला लेख इस तस्वीर को पहचानो नाम से लिखा और बाद में दनादन लिखना चालू हुआ। जो अभी तक जारी है
बीच बीच में कई बाधायें आई, कुछ गलतफहमियाँ हुई, टंकी पर भी चढ़े, पर यारों के प्रेम ने टंकी से उतार दिया। एक साल में यह पाया है कि आप अगर एकाद पोस्ट लिखने के बाद अगर छोड़ देते हो तो ठीक है वरना एक दो महीने के बाद आप चाहें तो भी हिन्दी चिट्ठाकारी से पीछा नहीं छुड़ा सकते जैसे हमारे शुएब और भुवनेश साईबर कॉफे में जाकर अपने चिट्ठे पोस्ट करते हैं।
शायद नारद का जन्म ही ऐसे चौघड़िये में हुआ है कि इससे एक बार जुड़ने वाला अपना पीछा नहीं छुड़ा सकता है। आप चिट्ठा लिखना छोड़ भी दो पर नारद को तो एक बार देखोगे ही!
पिछले दिनों नीलीमा जी को आश्चर्य हो रहा था कि हिन्दी चिट्ठाजगत असामान्य क्यूं है पर यह वास्तव में आश्चर्यजनक है कि चिट्ठाकार कितने ही लड़ लें , इस हद तक की सामने होने पर ढिशूम ढिशूम की तक नौबत आ जाये पर उनके चिट्ठों को पढ़ना कोई नहीं छोड़ता और यहाँ तक कि उसी आभासी दुश्मन के चिट्ठे पर टिप्पणी तक दिये बिना नहीं रह सकता!!
हिन्दी चिट्ठाकारी करने के बाद पाया ज्यादा और खोया बहुत कम है। जीतू भाई, अनूप जी, समीरलाल जी, राजीव टंडन जी, उन्मुक्त जी, सृजन शिल्पी, अफलातून जी से कई बड़े भाई सा स्नेह मिला तो संजय भाई, नितिन बागला जी, नीरज भाई, आशीष श्रीवास्तव जी, ईस्वामी जी राम चन्द्र जी, भुवनेश और श्रीश जैसे कई मित्र मिले। पंकज बैंगाणी, प्रमेन्द्र प्रताप सिंह, गिरिराज जोशी का भाईसा बन गया। नेट के माध्यम से मित्र बनते सुने थे इससे पहले पर चिट्ठाकारी में आने के बाद कई ओनलाईन बहनें बनी जिनके साथ आज सगी बहनों सा संबध बन गया है। जिनमें प्रमुख है निधि श्रीवास्तव और स्वर्णज्योती जी । आप सभी मित्रों के स्नेह और सहयोग से तरकश का कांस्य कलम पुरस्कार भी जिता दिया।
खोया जो है वो मन का चैन, पहले ही अपनी सहनशीलता जरा कम थी और ऐसे में विवादित मुद्दे, यानि एक तो बंदर और उस पर बिच्छू चढ़ गया। मित्र कहते भी हैं कि जरा सहनशीलता रखिये पर भाई अब पके घड़े आग पर कहाँ चढ़ पाते हैं?
आप सभी पाठकों को और बड़े-छोटे भाईयों मित्रों और बहनों का एक बार फिर से धन्यवाद देता हूँ। और अनुरोध करता हूँ कि आगे से किसी भी गलती पर (गाली गलौज किये बिना) मुझे मेरी भूल बतायें ताकि में उसे सुधार सकूं। चाहें तो मेल भी कर सकते हैं।


नितिन बागला said
बधाई एवं शुभकामनाएं…
उन्मुक्त said
साल गिरह पर बधाई।
Jagdish Bhatia said
बधाई हो नाहर भाई।
अब पता चला कि आपके और मेरे चिट्ठे की उम्र में २२ दिन का ही फर्क है
शुभकामनायें।
जीतू said
सागर भाई,
आपको अपने चिट्ठे का एक वर्ष पूरा करने पर बधाई। ईश्वर करें हम आपके साथ आपके चिट्ठे की सिल्वर/गोल्डन जुबली मनाएं।
लगातार हिन्दी मे लिखते रहना ही हिन्दी के प्रति आपकी सेवा और दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। ध्यान रखिए, इन्टरनैट पर हिन्दी मे विभिन्न विषयों पर जितना ज्यादा से ज्यादा कन्टेन्ट उपलब्ध होगा, उतने ज्यादा से ज्यादा लोग, हिन्दी पढने और लिखने की तरफ़ आकर्षित होंगे। जो इन्टरनैट पर हिन्दी के नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा मे कदम होगा।
Pankaj Bengani said
जीयो भाईसा और जीयाए रहो इस संसार को.
अब टंकी पर चढने का जमाना लद गया है, अब हम चाँद पर जाएंगे.. हा हा हा.
नहीं सही में, अभी नही तो कभी नही. यही वक्त है नई बुलन्दियों को छुने का. मुझे तो अहसास हो गया है, आपको भी हो गया होगा…
हिन्दी को अभी बहुत सी मंजिलें पानी है. अभी शुरूआत भर हुई है, दुनिया नोटिस करने लगी है. अब बारी है फाइनल पंच की. आप भी हाथ लगाओ.
प्रियंकर said
बहुत-बहुत बधाई ! चिट्ठा चिरजीवी हो !
PRAMENDRA PRATAP SINGH said
आपका स्नेह है कि आपके बहुत से चाहने वाले है, बात भी ऐसी करते है लोग आपको अपना भाईसा बना ही लेते है।
चिठ्ठा जन्मदिन की बधाई।
PRAMENDRA PRATAP SINGH said
आगे से तेरही मनाने का ऐलान मत कीजियेगा
आशीष said
सागर भाई एक साल पूरे होने पर बधाई ! बस ऐसे ही लिखते रहें! हम तो है ही पढने के लिये !
गिरीश सिंह said
बहुत-बहुत बधाई सागर भाई ! भगवान करे आप चिट्ठे की सिल्वर/गोल्डन जुबली मनाएं।
गिरीश
अफ़लातून said
दनादन लिखते रहिए। भावुकता नहीं विवेक को तरजीह दीजिए। हार्दिक शुभकामना ।
Pratik Pandey said
‘दस्तक’ का एक वर्ष पूरा होने पर मेरी ओर से भी हार्दिक बधाई। उम्मीद है कि आपका चिट्ठा हमारे दिल के दरवाज़ों पर यूँ ही सालों-साल दस्तक देता रहेगा।
Amit said
वाह वाह, हमार बधाई भी टिका लयो जी। मुबारकां।
संजीत त्रिपाठी said
बधाई। लिखते रहें पढ़ने के लिए पुराने लोगों के साथ साथ हम जैसे नए लोग भी आ ही रहे हैं
अनूप शुक्ला said
बधाई हो। तो ये कविता कारण है बार-बार टंकी पर चढ़ाने के लिये। हम तो बांस हैं जितना काटोगे उतना हरियायेंगे।कोई नहीं काटता इसलिये खुद ही कट लेते हो फिर से हरियाने के लिये।
बहुत सुखद है साल पूरा करना।जितना ब्लाग पर लिखा सामने उससे कम पीछे नहींलिखा मेलबाजी में। सब मिलाकर अनुभव अच्छे रहे। आगे लगातार लिखने और ब्लागिंग से जुड़े रहने ,मौज-मजे के लिये मंगलकामनायें!
समीर लाल said
बहुत बहुत बधाई!!
हिन्दी चिट्ठाकारी और लेखन के नये नये आयाम स्थापित करो, यही शुभकामना है.
पुनः बधाई!!
नीरज रोहिल्ला said
जे हुयी न बात,
मजा आ गया आपकी पोस्ट पढकर । आपके चिट्ठे का एक वर्ष पूरा होने पर हार्दिक बधाई ।
मै आपको अलग से ईमेल लिखूँगा, आपसे संगीत के विषय में बात करेंगें । आपकी और मेरी च्वाइस काफ़ी मिलती है संगीत के बारे में ।
खुश रहो आबाद रहो,
इस जहाँ को खुश रखो ।
नीरज
neelima said
शुभकामनाएं
Shrish said
बधाइयां भाईसा बधाईयां। चिट्ठाकारी में एक साल पूरा होने की मुबारकबाद ! आपने सच कहा, छुटती नहीं है काफिर कीबोर्ड से लगी हुई। एक बार इसमें फंसने के बाद बंदा यहाँ से जा नहीं सकता। अब ये अतुल अरोरा जी को लो, कई महीनों से गायब थे लेकिन अभी फिर टिपियाते हुए देखे गए, व्यस्त होने के बावजूद बंदा लौट लौट कर आता है। लिखेगा नहीं तो पढ़ेगा और टिपियेगा।
लाख झगड़ें हों लेकिन एक चीज हम सब को बांधे रखती है और वो है हिन्दी से प्यार।
साईबर कॉफे –> साइबर कैफे
साईट –> साइट
अनुराग श्रीवास्तव said
बहुत बहुत बधाई!
गणेश यादव said
वह सागर भाई हम तो यहाँ बिन बुलाये ही आ गये हम निकले थे अपनी समस्या हल करने और यहाँ तो पार्टियाँ चल रही है. यहाँ तो सभी महारथी पहुचे हुए है. आपको आपके चिठ्ठा के एक वर्ष होने की बधाईयाँ , भाई मेरे लिए तो चिट्ठा अभी बिलकुल भी नया है. और इसमें मेरे से कई छोटी मोटी गलतीयाँ होती रहेगी जैसा आपने अभी स्लग के बारे में जानकारी दी वैसी ही आगे भी ब्लौग के बारे मे बताते रहे.
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