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	<title>Comments on: चिट्ठाचर्चा  और मैं</title>
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	<description>गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं</description>
	<pubDate>Sat, 17 May 2008 07:01:00 +0000</pubDate>
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		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-884</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Mar 2007 09:31:55 +0000</pubDate>
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		<description>सही है जी बोत मेहनत का काम है, कविराज ने एकबार मुझे प्रस्ताव रखा था, मैं तो तीन दिन डर के मारे गूगल चैट पर नहीं आया। :)

भाईलोग समझते क्यों नहीं चर्चाकार का काम स्वंयसेवा का है उसको कोई तनख्वाह थोड़े ही मिलती है, कहाँ तो हमें उसकी तारीफ करनी चाहिए और कहाँ हम उसमें कमियाँ निकालने लगते हैं। जिन लोगों को शिकायत हो वो भाई खुद चर्चा शुरु कर सकते हैं, इसमें कोई गलत बात नहीं। उदाहरण के लिए हिन्द युग्म पर इतने कवि हैं वे अलग से कविताओं की चर्चा कर सकते हैं उन्हें इनकी बेहतर जानकारी भी है और उनकी लेखन शैली भी अच्छी है उनमें से किसी को इस हेतु आगे आना चाहिए।

समीरलाल जी के बारे में कही कई टिप्पणी हमें बहुत बुरी लगी क्योंकि उनके जैसा निष्पक्ष चर्चाकार तो क्या चिट्ठाकार कोई और नहीं। जब भी कोई बात चलती है हम सब तो एक न एक साइट हो जाते हैं अथवा किसी एक से इतिफाक जरुर जताते हैं लेकिन समीरलाल जी को मैंने आजतक किसी के पक्ष विपक्ष में बोलते नहीं देखा, उनके बारे में ऐसा कुछ कहना तो सरासर उनका अपमान करना है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही है जी बोत मेहनत का काम है, कविराज ने एकबार मुझे प्रस्ताव रखा था, मैं तो तीन दिन डर के मारे गूगल चैट पर नहीं आया। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>भाईलोग समझते क्यों नहीं चर्चाकार का काम स्वंयसेवा का है उसको कोई तनख्वाह थोड़े ही मिलती है, कहाँ तो हमें उसकी तारीफ करनी चाहिए और कहाँ हम उसमें कमियाँ निकालने लगते हैं। जिन लोगों को शिकायत हो वो भाई खुद चर्चा शुरु कर सकते हैं, इसमें कोई गलत बात नहीं। उदाहरण के लिए हिन्द युग्म पर इतने कवि हैं वे अलग से कविताओं की चर्चा कर सकते हैं उन्हें इनकी बेहतर जानकारी भी है और उनकी लेखन शैली भी अच्छी है उनमें से किसी को इस हेतु आगे आना चाहिए।</p>
<p>समीरलाल जी के बारे में कही कई टिप्पणी हमें बहुत बुरी लगी क्योंकि उनके जैसा निष्पक्ष चर्चाकार तो क्या चिट्ठाकार कोई और नहीं। जब भी कोई बात चलती है हम सब तो एक न एक साइट हो जाते हैं अथवा किसी एक से इतिफाक जरुर जताते हैं लेकिन समीरलाल जी को मैंने आजतक किसी के पक्ष विपक्ष में बोलते नहीं देखा, उनके बारे में ऐसा कुछ कहना तो सरासर उनका अपमान करना है।</p>
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	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-883</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Mar 2007 17:51:12 +0000</pubDate>
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		<description>अरे सागर भाई, एक ही दिन की चिट्ठाचर्चा में पसीना आ गया? ;) अब सोचो मेरा क्या होता होगा क्योंकि मैं ग्लोबल वायसिस पर २ सप्ताह के चिट्ठों का अवलोकन लिखता हूँ!! ;) और &lt;a href="http://www.globalvoicesonline.org/2007/03/12/hindi-blogoshere-yahoo-plagiarises-from-blogs-and-cops-shake-hands-with-goons/" rel="nofollow"&gt;इस बार&lt;/a&gt; तो ३ सप्ताह के चिट्ठों को बाँचा है!! ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे सागर भाई, एक ही दिन की चिट्ठाचर्चा में पसीना आ गया? <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> अब सोचो मेरा क्या होता होगा क्योंकि मैं ग्लोबल वायसिस पर २ सप्ताह के चिट्ठों का अवलोकन लिखता हूँ!! <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> और <a href="http://www.globalvoicesonline.org/2007/03/12/hindi-blogoshere-yahoo-plagiarises-from-blogs-and-cops-shake-hands-with-goons/" rel="nofollow">इस बार</a> तो ३ सप्ताह के चिट्ठों को बाँचा है!! <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-882</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Mar 2007 17:46:04 +0000</pubDate>
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		<description>सागर भाई, 
आपके रुप मे चिट्ठा-चर्चा को एक सार्थक चर्चाकार मिला है। उम्मीद है आप लगातार करते रहेंगे।

चिट्ठाचर्चा करना आसान नही है। सचमुच काफी मेहनत लगती है। लेकिन सभी ऐसा समझे ये कोई जरुरी तो नही। सभी चिट्ठाकारों के अपने लेख/कविता ’कालजयी रचनाएं’ दिखती है। लेकिन चर्चाकार का निर्णय अंतिम होना चाहिए, कि वो चाहे तो उसकी चर्चा करे अथवा ना करे। किसी भी तरह का प्रलोभन, धमकी अथवा विचार, इसे चर्चाकार की नज़रों मे गिराना ही माना जाएगा।

मै प्रायोजित चर्चा नही करता, और ना ही कभी करूंगा, भले ही मेरे चिट्ठा चर्चा बन्द करनी पड़े। निष्पक्षता ही चर्चाकार की पहचान है। जो चिट्ठे मुझे पसन्द आएंगे मै उन्ही की चर्चा करुंगा, अलबत्ता कविताओं के प्रति मैने अपने रुख को काफी कुछ बदला है। अब मै कविताओं को भी पढता हूँ, जो पसन्द आती है उनकी चर्चा भी करता हूँ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सागर भाई,<br />
आपके रुप मे चिट्ठा-चर्चा को एक सार्थक चर्चाकार मिला है। उम्मीद है आप लगातार करते रहेंगे।</p>
<p>चिट्ठाचर्चा करना आसान नही है। सचमुच काफी मेहनत लगती है। लेकिन सभी ऐसा समझे ये कोई जरुरी तो नही। सभी चिट्ठाकारों के अपने लेख/कविता ’कालजयी रचनाएं’ दिखती है। लेकिन चर्चाकार का निर्णय अंतिम होना चाहिए, कि वो चाहे तो उसकी चर्चा करे अथवा ना करे। किसी भी तरह का प्रलोभन, धमकी अथवा विचार, इसे चर्चाकार की नज़रों मे गिराना ही माना जाएगा।</p>
<p>मै प्रायोजित चर्चा नही करता, और ना ही कभी करूंगा, भले ही मेरे चिट्ठा चर्चा बन्द करनी पड़े। निष्पक्षता ही चर्चाकार की पहचान है। जो चिट्ठे मुझे पसन्द आएंगे मै उन्ही की चर्चा करुंगा, अलबत्ता कविताओं के प्रति मैने अपने रुख को काफी कुछ बदला है। अब मै कविताओं को भी पढता हूँ, जो पसन्द आती है उनकी चर्चा भी करता हूँ।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: आशीष</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-881</link>
		<dc:creator>आशीष</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Mar 2007 17:30:39 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-881</guid>
		<description>सागरभाई
आपकी मेहनत सफल थी, आपने बेहतरीन चिठ्ठा चर्चा की थी !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सागरभाई<br />
आपकी मेहनत सफल थी, आपने बेहतरीन चिठ्ठा चर्चा की थी !</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ला</title>
		<link>http://nahar.wordpress.com/2007/03/17/chitthacarcha/#comment-880</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ला</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Mar 2007 15:46:49 +0000</pubDate>
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		<description>सागरभाई, हम तुम्हारा दर्द समझ सकते हैं। हमारे साथ तो कई बार ऐसा हुआ कि दो-तीन घंटे का लिखा हुआ मसाला उड़ गया। लेकिन अब तुमको नियमित लिखने के लिये तैयार रहना पड़ेगा। कब यह हम बताइयेंगे।:) रही समीरलाल की बात तो मेरी नजर वे सबसे पापुलर चर्चाकार हैं। उनके बिना हम चर्चा की कल्पना ही नहीं कर पाते।और कोई साथी जुड़ना चाहते हैं चर्चा करने में तो उनका सहर्ष स्वागत है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सागरभाई, हम तुम्हारा दर्द समझ सकते हैं। हमारे साथ तो कई बार ऐसा हुआ कि दो-तीन घंटे का लिखा हुआ मसाला उड़ गया। लेकिन अब तुमको नियमित लिखने के लिये तैयार रहना पड़ेगा। कब यह हम बताइयेंगे। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> रही समीरलाल की बात तो मेरी नजर वे सबसे पापुलर चर्चाकार हैं। उनके बिना हम चर्चा की कल्पना ही नहीं कर पाते।और कोई साथी जुड़ना चाहते हैं चर्चा करने में तो उनका सहर्ष स्वागत है।</p>
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