॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

रेडियो सखी ममता सिंह का लेख अभिव्यक्ति पर

Posted by सागर नाहर on 27, August 2007

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कुछ दिनों पहले अभिवक्ति की संपादिका पूर्णिमा वर्मनजी से चैट पर बात हुई उन्होने कहा कि अभिव्यक्ति पर रक्षाबंधन पर एक लेख चाहिये, विषय था- हिन्दी फिल्मों में रक्षा बंधन। मुझे इस लेख को लिखने में बहुत समय लगता और खोजबीन भी बहुत करनी पड़ती। अचानक मुझे नाम याद आया हमारे होनहार चिठ्ठाकार यूनूसजी का, मैने पूर्णिमाजी का दिया काम यूनूस  भाई के सर डाल दिया ( गुजराती में इस तरह एक दूसरे के सर काम डालने को कहते हैं - ढकेल पंचा डोढ़ सौ) :) और यह भी कह दिया कि आप लिखें पर अगर ममता जी लिखें जो ज्यादा अच्छा होगा।

ममता सिंह का हमारे प्रिय यूनूस भाई से गहरा नाता है क्यों कि वे यूनूस जी की अर्धांगिनी हैं।यूनूस भाई ने सहर्ष मेरा काम अपने सर ले लिया। और ममताजी ने समयसर लेख लिख कर पूर्णिमाजी को भेज दिया, अब यह लेख अभिव्यक्ति पर प्रकाशित हो चुका है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

जो लोग विविध भारती के नियमित श्रोता हैं उनके लिये रेडियो सखी ममता सिंह का नाम अपरिचित नहीं है,  और ममता जी ने  सबसे पहले हिन्दी चिठ्ठा जगत से अपना नाता जोड़ा संजय पर अपनी आवाज में प्रस्तुत की कहानी स्वप्न सफेद गुलाब का … से। ममता जी का परिचय इस प्रकार है

असम में जन्म । इलाहाबाद वि.वि. से संस्कृत में एम.ए. और शास्त्रीय संगीत में प्रभाकर । रूसी भाषा में डिप्लोमा । विद्यार्थी जीवन से ही रेडियो में सक्रिय । कुछ वर्ष मुंबई में पत्रकारिता भी की । संप्रति विविध भारती में उदघोषिका । रेडियो-सखी के नाम से लोकप्रिय । विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और लेख प्रकाशित । आजकल पॉडकास्ट भी करती हैं । और अब शीघ्र ही हिन्दी में नियमित पॉडकास्ट करेंगी।

चलते चलते अपने यूनूस भाई का परिचय भी दे देता हूँ।

दमोह म.प्र. में जन्म, विज्ञान में स्नातक, कॉलेज के दिनों से ही रेडियो में सक्रिय । पत्रकारिता और कविता की दुनिया में भी सक्रिय । संगीत में ज़बर्दस्त रूचि । विविध भारती सेवा में पिछले दस वर्षों से उदघोषक ।

आप सब को रक्षाबंधन की शुभकामनायें।

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8 Responses to “रेडियो सखी ममता सिंह का लेख अभिव्यक्ति पर”

  1. बसंत आर्य Says:

    Bahut badhia baat hai. miya bivi ko isi tarah karna chahie

  2. Shastri JC Philip Says:

    आईंदा कोई भी काम मिलेगा तो हम भी देखेंगे कि उस व्यक्ति का पूर्वार्ध या उत्तरार्ध हमारे काम को ले सकेगा कया — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

  3. paramjitbali Says:

    ममता सिहं का लेख रक्षाबंधन पर लिखा लेख बहुत अच्छा है।

  4. समीर लाल Says:

    तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

  5. anug Says:

    ममता जी से और यूनुस जी से मैं अलग अलग संपर्क में हूं, लेकिन तो आज ही पता चला कि दोनों एक है।

  6. anug Says:

    ममता जी के लेख के बारे में दो बातें लिखना चाहूंगी -

    1. रेशम की डोरी फिल्म में गीत कुमुद छुगानी ने गाया या फरीदा जलाल ने, एक बार चेक कीजिए

    2. चंदा रे मेरे भैय्या से कहना गीत शायद चंबल की कसम फिल्म से है, फिल्म का नाम नही बताया गया

    अन्नपूर्णा

  7. श्रीश शर्मा Says:

    ममता जी के बारे में अच्छी जानकारी दी आपने। आभार!

  8. अनूप शुक्ल Says:

    अच्छी जानकारी। धन्यवाद!

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