॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

नरेन्द्र मोदी एक नये रूप में…!

Posted by सागर नाहर on 22, November 2007

नरेन्द्र मोदी जिनका नाम आँख के सामने आते ही कईयों की मुट्ठियाँ भिंच जाती है तो कईयों की बाँछे खिल जाती है। नमो जिस दिन से मुख्यमंत्री बने उस दिन से विवादों ने कभी भी उनका पीछा नहीं छोड़ा; और खुद भी कई बार जान बूझ कर विवादों को हवा देते रहे। एक क्रूर मुख्यमंत्री, जिन्होने आतताईयों (हिन्दूओं) को मुस्लिमों की हत्या करने की तीन दिन की खुली छूट देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

पर आज हम नरेन्द्र मोदी के दूसरे रूप की चर्चा करेंगे और वह रूप है…….. यहाँ देखिये

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फोटो संदेश से साभार

42 Responses to “नरेन्द्र मोदी एक नये रूप में…!”

  1. balkishan Says:

    ज्ञान ले रहे है क्या?

  2. अविनाश Says:

    तुम मादरचोदों को मोदी का बखान करने का… तेरी मां के भोंसड़ा…

  3. अनूप शुक्ल Says:

    ऊपर की टिप्पणी अगर अविनाश ने ही की है तो यह बहुत बेहूदी टिप्पणी है। मैं इसकी घोर निन्दा करता हूं।बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी ओछी भाषा टिप्पणियों में इस्तेमाल की जाये।

  4. मिहिरभोज Says:

    अविनाश जी की यह टिप्पणी बहुत दुर्भाग्य पूर्ण है.इनको क्या नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का ठेका मिला है शायद

  5. Pratik Pandey Says:

    यक़ीन नहीं होता कि यह टिप्पणी अविनाशजी ने की है। यदि टिप्पणी उनकी ही है तो लगता है कि उनका सम्वेदनशील हृदय महज़ दिखावा भर था। कोई सम्वेदनशील और विवेकवान व्यक्ति ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता है, विश्वास नहीं होता। यह वाक़ई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

  6. नीरज दीवान Says:

    भई ये अविनाश ही हैं या कोई और? तकनीकी विशेषज्ञों से पूछताछ कर लो भाई. comment यहां से डिलीट करो यार.. या रखे रहोगे..प्रग्रतिशील साहित्य टाइप.

  7. neelima Says:

    भाई लोगों ये क्या हो रहा रहा है ? कोई बताएगा !?

  8. Shiv Kumar Mishra Says:

    किस तरह की भाषा का इस्तेमाल है जी ये? राजनैतिक और वैचारिक मतभेद क्या इस तरह की भाषा को जन्म देता है? जमीन से जुड़े होने का प्रमाण माना जाय ऐसी भाषा को? या ये मान लिया जाय कि ये तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है….

    अगर ऐसी ही टिपण्णी देनी है तो जरूरत नहीं है जी, टिप्पणियां देने की….

  9. परमजीत बाली Says:

    अविनाश जैसा बुद्दिजीवी ऐसी टिप्पणी नही कर सकता।इस की जाँच होनी ही चाहिए।यदि यह टिप्पणी अविनाश जी ने ही की है तो बहुत दुख की बात है।वैसे जिसनें भी यह टिप्पणी की वह निंदा करने योग्य है।

  10. maeriawaaj Says:

    esi tippaniyon ko aprove nahin karna chaheyae . dheerae dheere swyam khatam ho jaega . abhivyaktii ki swantrtaa ke naam per uljalu kament . hamari is post per kament de kar masjeevi nae us kament ko swyam mita diya haen . esae kament kewal is blog per nahin baahut se blogs per haen

  11. Sanjeet Tripathi Says:

    यदि ये वाकई अविनाश साहब ही है तो भी मुझे कोई आश्चर्य नही हुआ!!
    मेरे बारे में मसिजीवी के ब्लॉग मे इनकी एक शालीन टिप्पणी से मै सोच ही सकता हूं!!

    “हर चेहरे मे होते है आठ-दस चेहरे, जिसको भी देखो कई बार देखो”

  12. Dr.Amar Kumar Says:

    अविनाश महोदय की अभिव्यक्ति का शब्दकोष उनको इस बहूदे शब्द के
    प्रयोग करने की छूट देता होगा । इसकी बेहूदगी केवल एक स्पष्टीकरण
    से ही आंकी जा सकती है, ताकि इसकी प्रासंगिकता सनद रहे ।
    मैं केवल इतना जानना चाहूंगा कि उनके शब्दकोष में ’ भोंसडे़ ’ की व्याख्या कैसे की गयी है, और वाक्य में प्रयोग का क्या क्या उदाहरण दिया गया है ?
    हम अज्ञानों का शब्दज्ञान बढा़ने का पुनीत कार्य करें तो कोई बात है ! या बस खालीपीली ? कहा सुना माफ़ करना अविणाष जी ।

  13. Raj Bhatia Says:

    अरे भाई नजर अन्दाज करो, पढॊ ही मत, सुनो भी मत, जिस के पास जो हे, वही सब को देगा ना.

  14. ghughutibasuti Says:

    इस टिप्पणी का क्या इतना महत्व है कि हम मूल विषय ही भूल जाएँ ? मोदी जी की कहानी अच्छी लगी। वे राजनेता जैसे भी हों कहानीकार अच्छे प्रतीत होते हैं ।
    घुघूती बासूती

  15. sanjay Says:

    अगर ये मोहल्‍ला वाले अविनाश बाबू का काम है तो मुझे बुरा लगा. लेकिन बात यह है कि किसी ने दो अभद्र शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया और निकल गया. अब हम उसका ढिंढोरा क्‍यों पीटे जा रहे हैं? मैं घुघूती की बात से सहमत हूं कि क्‍या इस टिप्‍पणी का इतना महत्‍व है? भाइसा निकाल दो ना. क्‍या डॉ अमर ने टिप्‍पणी के शब्‍दों को दोहरा कर वही गुनाह किया जो अविनाश ने किया?

  16. हर्षवर्धन Says:

    भाई लोगों कृपा करके ऐसी टिप्पणी तुरंत हटा दें तो, बेहतर है। इस टिप्पणी पर चर्चा करके क्या मिलेगा।

  17. Gyan Dutt Pandey Says:

    अब यह टिप्पणी हटाना उचित रहेगा क्या? यह टिप्पणी विचारधारा के गुरुत्व या हल्केपन का प्रतीक बन गयी है।
    चक्कर है कि हम नरेन्द्र मोदी से स्नेह करें या घृणा; उनसे निस्पृह नहीं रह सकते।

  18. अविनाश Says:

    मेरे पास मुक़म्‍मल शब्‍द हैं। मुझे पतली गली का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं। पर इतना ज़रूर जानता हूं कि अंतर्जालीय माया में इस टिप्‍पणी से आप सबका मनोरंजन हो रहा है।

  19. अविनाश Says:

    साहित्‍य में नरेंद्र मोदी का योगदान सचमुच वंदनीय है। मैं साल 2007 के लिए गुजराती का साहित्‍य अकादमी अवार्ड उन्‍हें देने का प्रस्‍ताव रखता हूं।

  20. अविनाश Says:

    टिप्‍पणी के इस खेल में आज, अभी तक नाहर से 4, टिप्‍पणीकार से 3 और कल नाहर से 14 हिट मिले। अब आईपी पते पर डाकिया दस्‍तक देगा और मुझे षडयंत्रकारी घोषित कर भी देगा, तो कोई गल नहीं। हिंट्स ज़‍िंदाबाद। नहीं नहीं उनका ज़‍िंदाबाद, जिन्‍होंने हमें सेलेब्रेटी बनाया हुआ है - मसलन उन जैसे बुद्धिजीवी। दरहकीक़त ये कि यहां बुद्धि का तो कोई काम ही नहीं।

  21. masijeevi Says:

    प्रिय सागर,
    ऊपर अविनाश के स्‍पष्‍टीकरण के बाद यह मान लेना उचित जान पड़ता है कि मान लिया जाए कि टिप्‍पणी अविनाश ने नहीं की है। अत: आपको यथोचित निर्णय लेना चाहिए।

  22. पंकज बेंगाणी Says:

    मुझे यकीन है कि अविनाशबाबु ने वह टिप्पणी नही की होगी. उनके जैसे समझदार इंसान को सुर्खियों मे रहने के और भी कई रास्ते पता हैं.

    उन्हे अब ऐसे विज्ञापनों की जरूरत नहीं. :)

    अविनाशबाबु का प्रस्ताव भी बुरा नही है. अनुमोदन किया जा सकता है. लगे हाथ बंगाल का भारत रत्न ? किसे देना चाहिए वो भी बता देते तो आनंद रहता. :)

  23. संजय बेंगाणी Says:

    टिप्पणी ने मूल विषय से भटका दिया.

    अविनाश से मेरे वैचारीक मतभेद है, घोर मतभेद है, फिर भी मानने को जी नहीं करता की उन्होने ऐसे शब्दो का प्रयोग किया होगा. बाकि राम जाने.

    साइबर दुनिया है, दिल पर न लेते हुए आगे चलते जाओ.

  24. Suresh Chiplunkar Says:

    बढिया रिपोर्ट, मोदी की एक और प्रतिभा के बारे में पता चला… वैसे संघ के ऐसे कई लोगों को मैं जानता हूँ जिन्होंने आपातकाल में जेल प्रवास के दौरान कई बेहतरीन कहानियाँ आदि लिखी हैं और प्रकाशित भी हुई हैं। संघ के लोगों बारे में जो लगातार दुष्प्रचार हुआ है उससे कई बुद्धिजीवी भी उसकी चपेट में आये हैं, वरना “रज्जू भैया जैसा प्रतिभाशाली वैज्ञानिक देश ने खो दिया” ऐसी टिप्पणी कांग्रेसी नहीं करते… संघ में लाखों लोग ऐसे हैं जो उच्चतर शिक्षित हैं, लेकिन कांग्रेसी / वाम दुष्प्रचार के आगे मात खा जाते हैं… और इसका परिणाम देश को अन्ततः कभी न कभी भुगतना ही पड़ेगा…

  25. deepakdhaudhari Says:

    अविनाश से ऐसी टिप्पणी की आशा नहीं है. लेकिन मजे की बात है कि अपनी तीन प्रतिटिप्पणियों में उन्होंने मुख्यत्या हिटस की ही बात की है, एवं मूल टिप्पणी से इंकार नहीं किया है.

    यदि टिप्पणी उनकी नहीं है तो उनको स्पष्ट कर देना चाहिये था कि टिप्पणि उनकी तरफ से नहीं है.

    सवाल इस बात का नहीं है कि मोदी कौन है, बल्कि इस बात का है कि ऐसी टिप्पणीयां देकर कौन माहोल खराब कर रहा है. यदि अविनाश का नाम झूठा आया है तो अविनाश को यह कहना चाहिये जिससे कल किसी का नाम झूठा अये तो सब चेत सकें

  26. डॉ गरिमा तिवारी Says:

    भईया,

    मोदी साहब कहानी तो बहूत बढिया रही, बशर्ते कि मुझे गुजराती समझ मे नही आयी, फिर भी भावांश हृदय तक जाने के लिये काफी है।

    वैसे पहले सोचा था कि सिर्फ पोस्ट पढ़ कर निकल जाऊँ, लेकिन बात जब सम्मान की होती है तो, नही निकलना चाहिये, और उस पर भी माँ के सम्मान की बात है।
    माँ जिसे हम भगवान से भी बढ़कर मानते हैं, उसको सरेआम गाली दी गयी है, और हम नारी समाज को बढ़ावा देने की बात करते हैं।
    माँ जिसकी पुजा की जाती है, और उसके लिये ऐसे अपशब्द…

    पर आश्चर्य नही है, क्युँकि आजकल यह सारी बाते किताबो मे ही रह गयी हैं, सबूत साफ आज की स्थिती को बयान कर रहा है…

    बस इतना सोच रही हूँ कि जब सामने माँ होगी तो बात करने के लिये तैयार कौन होगा???

  27. SHUAIB Says:

    MODI KOI MAMULI AADMI NAHI, MAMULI HOTA TO AAJ ITNI BADI KURSI PE NAHI BAITHTA. HAAN AGAR KISI KO MODI SE JALAN HAI YA US SE PYAR HAI WHO IZHAAR KAR SAKTA HAI MAGAR ITNI GHATIYA TIPPANI SE NAHI. BAHUT AFSOOS HAI KI AVINASH KE NAAM SE ITNI GHATIYA TIPPANI HUWI.

    SHUAIB

  28. चौपटस्वामी Says:

    अगर मैं एक हिंसक व्यक्ति के खिलाफ़ हूं तो अश्लीलता और जुगुप्सा जगाने वाली भाषा के भी खिलाफ़ हूं . व्यंग्य का पैनापन और चीज़ है, विरोध की तेज़ाबी भाषा और चीज़ है,पर अश्लीलता व फ़ूहड़ता और चीज़ .

    अविनाश की, या अविनाश के नाम से वह टिप्पणी जिसकी भी हो अशोभनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है .

    पर गालियां कोई प्रमाणपत्र तो होती नहीं कि उन्हें मढवा कर रख लिया जाए . प्रिय भाई!,ज्ञान जी का संकेत समझिए और संजय के अनुरोध पर ध्यान दीजिए .

  29. मिहिरभोज Says:

    मुद्दे की बात ये है कि क्षमा नहीं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता तो फिर भी थी इस इम बात मे पर वे बङे ही ढीठता से आने वाली हिट्स का मजा ले रहे हैं.नरेंद्र मोदी की तो छोङिये उनकी लेखनी में तो कभी भगवान राम के बारे में भी सम्मान जनक शब्दों का प्रयोग नहीं होता,और ये क्या कितने लोगों की लाईन लगी है उन्हे ईमानदारी का प्रमाणपत्र देने की ,क्या आप ने तो नहीं लिखी……..

  30. नीरज शर्मा Says:

    लास्‍ट गुजराती में लिखें पैरे को हिन्‍दी कर देते तो बहुत सुन्‍दर होता। क्षमा करें। मैं तो समझ ही नहीं पाया हूँ।

  31. अविनाश Says:

    मैं एतद द्वारा ये एलान करता हूं कि दूसरे नंबर की टिप्‍पणी, जिसमें कुछ अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल हुआ है- मैंने नहीं किया है। जिनने भी किया है और मेरे नाम, ईमेल आईडी और वेब पते का इस्‍तेमाल किया है- उन्‍हें अपने नाम से बात करनी चाहिए थी। मैंने तो भड़ास के वक्‍त में भी उनके भाषाई वस्‍त्र विन्‍यास का स्‍वागत किया था। लेकिन वे सब ज़ाहिर नाम वाले थे। मैं इन टिप्‍पणी करने वाले सज्‍जन की संवेदना के भी साथ हूं। कभी सामने होंगे, तो मिल-बैठ कर रम पीएंगे और पूछेंगे कि गुरु, कैसे किया ये खेल, ज़रा बताओ?

  32. डॊ.कविता वाचक्नवी Says:

    लगता है कि इस छल -छद्म के वातावरण में सब झूठ है। किस पर विश्वास किया जाए किस पर नही? उपर्युक्त टीप से तो अविनाश जी भी छले गए लगते हैं। आगे भगवान् जाने।

    असल बात यह है कि इतनी गन्दगी जिन भी लोगों के मन व वाणी के अन्दर भरी पड़ी है वे अपने व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन में नितान्त घटिया किस्म के तो होंगे ही सामाजिक प्रदूषण भी फैला रहे हैं। हर कोई हर किसी को छल कर अपने ओछेपन की मिसाल कायम करने में लगा है। हिन्दी वालों को आत्मग्लानि में डूब मरना चाहिए, थोड़ी सी भी लज्जा न रही जब। मातृत्व के इस नकार व तिरस्कार पर अचम्भित व स्तब्ध हूँ कि कैसे कोई माँ, बहन, बेटी या स्त्री को ही गाली क्यों देता है। भाई लोगो! आपस में मिल बैठ मार-काट कर निपट लो भई। घर की औरतों को अपने कुकर्मों में मत घसीटो।सम्मान का संस्कार शेष न रहा हो जिन के पास, जो माँ जैसे ईश्वर के प्रतिनिधि क सम्मान न करते हों वे भला क्या व कैसे मातृभाषा का सम्मान करेंगे? हिन्दी का सर्वनाश करने वाले ऐसे ही लोगों की मैं निन्दा व भर्त्सना करती हूँ

  33. अविनाश Says:

    पंकज बाबू, बुद्धदेब बाबू को तो हम बंगाल का भारत रत्‍न मोहल्‍ले पर दे ही रहे हैं। ज़रा एक नज़र मारिए। लेकिन मोदी के कुकृत्‍यों पर आपलोगों ने कितनी बार कलम चलायी, ज़रा लिंक भेजिए।

  34. pankaj Says:

    अपनी अपनी सोच है अविनाशबाबु. जो कुकृत्य आपको लगते हैं जरूरी नही हमे भी लगे. बंगाल पर आप क्या लिखते है मोहल्ले पर मुझे नही पता, जानना भी नही चाहता ना ही जाता भी हुँ.

    उसी तरह हमे क्या, कब, क्यो, क्यों नही लिखना चाहिए वह आपसे जानने की आवश्यक्ता नही है. :)

    मौज मे रहिए. सेहत बनी रहेगी. :) मै भी हुँ.

  35. सुभाष नीरव Says:

    ब्लागिंग में इस प्रकार की भाषा का सख्त विरोध होना चाहिए। ऐसी भाषा जो भी इस्तेमाल करता है, उसकी खुलकर निन्दा की जानी चाहिए। लेकिन, क्या यह टिप्पणी अविनाश जी ने ही की है? मुझे नहीं लगता कि उनके जैसा सुलझा व्यक्ति ऐसा कर सकता है। यह तो एक षड्यंत्र लगता है मुझे।

  36. Debashish Says:

    आप सब लोगों की बुद्धि क्या घास चरने गई है? अविनाश क्या कोई सड़कछाप हैं जो इस तरह की भाषा लिखेंगे? (कम से कम मैं उनसे ये तो उम्मीद रखता कि बहुवचन के हिज्जे वह सही लिखेंगे।)

    सागर क्या तुम जैसे तकनीक के जानकार को ये समझाना होगा कि किसी का भी नाम लेकर वर्डप्रेस पर टिप्पणी करना कठिन नहीं, यहाँ मैं अपने नाम और ईमेल पते की बजाय तुम्हारा भी लिख देता तो भी टिप्पणी चली जाती, खुद मेरे ब्लॉग पर पंगेबाज ने पहले कई बार किया है। स्टैटिक आईपी या संस्था की प्रॉक्सी से ईंटरनेट एक्सेस करने वाले सभी लोगों की आईपी भी एक होगी, इससे क्या जाहिर होगा? दिल्ली से क्या एक ही चिट्ठाकार हैं?

    हद करते हो, कोई बरगला रहा है और सब लगे टिप्पणी से फसाद जोड़ने। लगता है कि पढ़े लिखे मूर्खों की कौम बन गया है हिन्दी चिट्ठाजगत।

  37. अनूप शुक्ल Says:

    मेरी टिप्पणी एक बार फिर से देखे भाई। मैंने लिखा था-ऊपर की टिप्पणी अगर अविनाश ने ही की है तो यह बहुत बेहूदी टिप्पणी है। मैं इसकी घोर निन्दा करता हूं।बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी ओछी भाषा टिप्पणियों में इस्तेमाल की जाये।
    अब इसपर अगर अविनाश लिखते नहीं मैंने टिप्पणी नहीं की तो बात वहीं खतम हो जाती! लेकिन फ़िर ये लफ़ड़ा कैसे होता।

  38. अविनाश Says:

    हमेशा कंप्‍यूटर अगोर कर तो बैठेंगे नहीं अनूप शुक्‍ला जी। जब बैठे और ये तमाशा देखा, तो हमने तो प्रतिवाद किया ही। आप देखिए, मेरी टिप्‍पणी ये है - मेरे पास मुक़म्‍मल शब्‍द हैं। मुझे पतली गली का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं। पर इतना ज़रूर जानता हूं कि अंतर्जालीय माया में इस टिप्‍पणी से आप सबका मनोरंजन हो रहा है। इसके बावजूद अभी तक आप अपना एकता संदेश लेकर खड़े तो हुए नहीं कि अविनाश ने अपनी बात रख दी - अब नाटक बंद करो। बल्कि यहां आपने अपनी टिप्‍पणी में क्‍या लिखा, खुद ही देखिए। क्‍यों बगुला भगत बनना चाहते हैं?

  39. Dr Desh Bandhu Bajpai Says:

    Agarche main yeh kahoon ki “Avinas ki maa ka falana falana”, to yah to koi jawab nahin hoga. Is blog mein SAMEER ne kewal us baat ko rakkha, jo pahale se sabhi jaante hain. Kisi ne accha kaam kiya, to kya usako bhi samane na laya jaye? Sameer ne yahi karke galati ki kya? Yahan hamari maa bahane kahan se aa gayi?.Baat ho rahi hai Narendra Modi ki, Modi kharab kar rahe hain, aap sab unaki kharabi ham sabhi bloggers ke samane laiye, yeh acchcchi baat hoti, balki bahut acchcchi baat hoti. Agar acchccha kar rahe hain, to yah bhi saamane aana chahiye.

    SAMEER ne yahi kiya hai. Unaki samajh mein aayaa ki Modi ka yah ek roop bhi ho sakata hai, to isame SAMEER agar saamane koi baat le aaye, to isame itna asahisnu hone ki kya baat hai?

    Gali galauj karana maha-moorkhon ka kaam hai. Yah buddhijeevi varga ko shobha naheen deta. Agar gali galauj ko jan samanya ki manyata milati, to ham sabhi, ek doosare ki maa bahano ko, aam bole chaal ki bhasa me vartalaap ke darmiyan, prayog karate rahate .Abhivadan mein, ham apane boss se kahate, ” Kaho madar…. kya haal hai aapake? ya kisi Police wale se kahate,” abe Daroga bhos…ke, yaha baithe baithe sale apani maa c…wa rahe ho, aur waha gunde sabaki maiya ch…e de rahe hain.”

    Main Kanpur ka rahane wala hoon, yahan baat baat mein, ya kahen ki har baat mein gali galauj dene ka, ek anajana vidhan sa ban gaya hai.Itana sab hote huye, galiyon ka upayog karate samay, ham sabhi is baat ka bahut khayal karate hain ki aaspaas koi mahila , ladaki ya mahila varga to nahin upasthit hai. Yadi unaki upasthiti hoti hai, to yahan ke log galiyon ka upayog nahin karate hain ya bahut dhime swar mein upayog karenge , taki koi mahila un galiyon ko sun na sake.

    SAMEER JI, aap in galiyon se kabhi vichalit na hon. Galiyan unhe hi milati hain jo jyada sasahta, taktawar aur majboot hote hai. Galiyan to kamjore aur bujhe huye dilon aur ochche charitra ke logon ki bhasa hai.

    Aap isi tarah likhate rahiye. Is kaan se suniye aur us kaan se nikal deejiye. Mujhe aapke prati sahanubhuti hai.Main aapaki MAA ke prati apana samman prakat karata hun.

  40. Pramendra Pratap Singh Says:

    बेहूदा किस्‍म की टिप्‍पणी है, सर्वथा निन्‍दनीय है।

  41. Pramendra Pratap Singh Says:

    टिप्‍प्‍णी नही हाटाई जानी चाहिऐ, तकि पता चले कि पत्रकारों का यह भी चेहरा होता है।

    जय श्री राम

  42. News Flash: Modi the Writer « अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya Says:

    [...] News Flash: Modi the Writer Filed under: Uncategorized — anileklavya @ 10:35 am Ladies and gentlemen, the predictied doomsday may actually be the day of salvation. The person I had called Another Mussolini has actually written a story about a dying cancer patient. [...]

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