मित्र झूठ मूठ ही कह दिया होता कि टिप्पणी मैने नहीं की
Posted by सागर नाहर on 23, November 2007
प्रिय मित्र
माँ तो दुश्मन की भी आदरणीय होती है, और मेरी माँ ने तो मोदी की तारीफ नहीं की थी ना? उन्हें तो ब्लॉग शब्द का अर्थ भी नहीं पता, ना ही उन्होने कभी आपको कोई गाली दी, या आपके चिट्ठे पर टिप्पणी की फिर उन्हें बीच में क्यों घसीट लाये? आप मोदी से या मुझसे नाराज हैं मुझे जो कहना है कह दो दोस्त पर माँऽऽ? माँ शब्द की पवित्रता के बारे में आपको नहीं पता है क्या? जिस शब्द मात्र को बोलने से मन में श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है आपने उन्हें गालियाँ दी!
आपने टिप्पणी करनी थी कर दी कोई बात नहीं कम से कम झूठ मूठ ही कह देते कि यह टिप्पणी मैने नहीं की, मैं मान लेता पर आपने फिर से बढ़ चढ़ कर टिप्पणी की। आपने कहा कि मुझे फलां फलां से इतने हिट्स मिले यानि आपके लिये माँ मात्र २१ हिट्स है? अगर आपको दौ सौ हिट्स मिले तो क्या आप अपनी …. और तो और आपने अकेले ही तय कर लिया कि लोगों का मनोरंजन हो रहा है!! यानि माँ की गाली या माँ के अंगोपांग आपके लिये मनोरंजन के साधन हैं?
दोस्त खून मेरा भी खौलता है, जब माँ के बारे में इतनी गन्दी गाली सुनता हूँ, पर क्या करूं, मेरी माँ ने मुझे ऐसे संस्कार नहीं दिये कि मैं किसी और की माँ को गाली दूं या उनके अंगो उपांगो की चर्चा करता फिरूं।
चलो अच्छा हुआ आपका असली चेहरा और महिलाओं के प्रति विचार तो कम से कम लोगों को पता चले। अब किस मुंह से आप महिलाओं के उत्थान और उनके सुख दुख की चर्चा अपने चिट्ठे पर करोगे; जब अपनी माँ के पाँव छूने के लायक भी आप रहे? नहीं मित्र आप जब दूसरों की माँ का सम्मान नहीं कर सकते अपनी माँ के पाँव छूने के अधिकारी भी नहीं रहे।
आप साम्यवाद और धर्म निरपेक्षता की डींगे हाँकते हो तो क्या महिलाओं के प्रति इस तरह के विचार रखना साम्यवाद है और हाँ? तो थू है ऐसे साम्यवाद पर।
मुझे मित्रों ने सलाह दी है कि मैं आपकी इस टिप्पणी को मिटा दूं, पर मैने निश्चय किया है कि नहीं मैं इस टिप्पणी को कभी नहीं मिटाऊंगा। मिट गई तो महिलाओं के प्रति आपके उंचे विचार लोगों को कैसे पता चलेंगे?
आपने मुझे अपनी एक मेल में लिखा था
नाहर जी, मुझे नहीं मालूम आपकी उम्र क्या है, लेकिन दोस्त तो उम्र की सीमाओं का मसला नहीं है। आप बुरा न मानें, तो मैं कहूंगा कि हम दोस्त हैं।
क्या दोस्ती की परिभाषा यही होती है कि दोस्त की कोई बात पसन्द ना आये तो उसकी माँ को बखानो?
एक बार फिर से कहूंगा दोस्त कि अगर सचमुच आपको अपने किये पर शर्मिंदगी है तो एक बार झूठ मूठ ही कह दो कि टिप्पणी मैने नहीं की! आपको कोई शर्मिन्दगी नहीं है तो मुझे पता है कि अब आप मुझे और गालियाँ दोगे। पर गालियाँ देने से पहले वह बोध कथा याद कर लेना कि आपकी दी चीज को मैं स्वीकार नहीं करता तो वो आपके पास ही रहती है यानि आपकी को जाती है।
धन्यवाद
आपका मित्र
पुनश्च:
पोस्ट करते आपके इस खुलासे रूपी टिप्पणी मिली की वह अशोभनीय टिप्पणी आपने नहीं की पर आपके आई पी कुछऔर ही कहते हैं-यह देखिये हिसाब किताब, सबके सब आई पी की सीरीज एक ही है यानि 2103.212.234.XXX यानी आपके ऑफिस से कोई टिप्पणियां कर रहा है और आपको पता भी नहीं खैर… आपको जो सही लगा आपने किया। मुझे दुख है तो एक ही बात का कि मैने आपको एक बार दोस्त माना था।
Comment5: ( यह मित्र की खुलासा रूपी टिप्पणी है)
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Comment 4, 3, 2
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Comment No. 1
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कितना झूठ बोलोगे अब और दोस्त? लो एक पिच्चर भी देख लो


अविनाश said
दोस्त नाहर जी, टिप्पणी सचमुच मैंने नहीं की है। अब और क्या कहूं।
pankaj bengani said
आइ.पी. एड्रेस बहुत कुछ बयान कर जा रहे हैं. अब जिसे जो समझना है समझे….
खैर भाइसा आप से अनुरोध है कि दिल पर ना लेते हुए आगे बढते चलें. कुछ लोग कुंठा से ग्रस्त होते हैं और फिर दिल की भडास गालियों के माध्यम से निकाल देते हैं. एक तरह से अच्छा है नही तो हार्ट अटैक से मरेंगे …
बकने दिजीए इन लोगों को क्योंकि इन्हे यही आता है. अनुपजी की एक बात हमेशा याद रखता हुँ.. जिसकी जितनी बुद्धि उतनी बात करेगा. तो इनकी बुद्धि यही तक चलती है.. आप अपना खून मत जलाइए.
rachna said
sagar bhai tipaani jisnae behi kee ho yae post kaffi hae is baat kae liya kii internet per ab bhasha ko dyaan rakha jayega . aap ko jo shobh hua hae usmae hum sab sehbhaagi hae . ek baat aap hamesha dhyaan rakhe maa sanskaar sab ko dae tii hae per danav ko maa ke sanskar nahin chutae . aur eso logo kii maa nahin hotee woh kewal ek kokh se janam late haen . inki nazar mae mardangee ka arth ma behno ko gali dena hae . aap ne virodh jataya achcha kiya . galat baato kaa virodh naa karna unhe swikartee dena hota hae.
deepakchaudhari said
अविनाश ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया होता तो कितना अच्छा होता.
उन्होंने मूल लेख पर चार टिप्पणीयां कीं लेकिन एक बार भी स्पश्टता से नहीं कहा कि टिप्पणि उनकी नहीं है. नहीं तो इतना बवाल न मचता. न ही आपकी नीयत पर शक होता.
नाहर जी सही कहते हैं: मां बहनों को मां बहने ही रहने दे.
paryanaad said
सागर भाई उसने दी आपने नहीं ली, उसी की हो गई ना. बस तो आप क्यों इतना दुखी हो रहे हो. जो सच को स्वीकारने की हिम्मत भी नहीं रखता हो ऐसे कायर के बारे में तो बात करना भी ठीक नहीं है. मां तो मां है चाहे किसी की हो. उसने इन शब्दों का इस्तेमाल कर अपनी मां को भी अपमानित किया.
मेरा अनुरोध है कि इस टिप्पणी मामले को अब तूल ना दें. सब जानते हैं सच क्या है? नाहक ऐसे लोगों को चर्चा का विषय बनाने से क्या फायदा जिनका जमीर ही नहीं. जो कुछ भी हुआ अवांछित है और नहीं होना चाहिए लेकिन भाई यही दुनिया है.
‘तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग
कुछ हैं सीधे साधे और कुछ हैं …..’
दिल पे मत ले यार!
संजीव कुमार सिन्हा said
नाहरजी, मन व्यथित है। आपने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। तकनोलॉजी ने कायर और बेशर्म टिप्पणीकर्ता की कलई खोल दी है। तथाकथित बुदिधजीवियों पर तरस आ रहा है।
RC Mishra said
Hi
प्रशान्त प्रियदर्शी said
भाई साहब.. ये किस मसले पर लिख रहे हैं आप ये तो मुझे ज्यादा कुछ समझ में नहीं आया पर तकनीक के मामले में कुछ ज्यादा ही रूचि लेता हूं.. अगर आप मेरा IP देखेंगे तो वो आपको San Jose USA का मिलेगा, क्योंकि मेरा सर्वर वहीं का है.. वैसे मैं चेन्नई में हूं..
संजय बेंगाणी said
दिल पर ले ली? भाई सलाह दुंगा, भूल जाईये. गाली खाना अच्छा नहीं लगता, पढ़ कर मुझे भी बुरा लगा, मगर..अब क्या कहूँ? खून मत जलाईये बस.
परमजीत बाली said
नाहर जी कुछ कहते नही बन रहा…क्या कहें। बस यही कि परमात्मा ऐसे लोगों को सदबुद्दि दे।आप ने तकनीकी ज्ञान से जो प्रमाण दिया है इस को जान कर अब कोई गाली देने का हौंसला नही करेगा।…आप इस बात को दिल से ना लगाए।
अविनाश said
अब सचमुच ठीक लग रहा है। अब आइए, गाली-गाली खेलें। जैसे मोदी-मोदी खेला।
अविनाश said
हुज़ूर, मैं मोदी को सचमुच गाली देना चाहता हूं। मोदी का गुनगान करने वालों को भी। लेकिन सारंगी महाजन के एसएमएस में छेड़छाड़ के बाद तकनीकवेत्ताओं पर संशय किया जाना चाहिए।
अविनाश said
और इतना दुखी क्यों होते हैं, अब दुश्मन मान लीजिए।
Sanjeet Tripathi said
भाई साहब, आप जब यह पोस्ट लिख रहे होंगे तब की आपकी मन:स्थिति की कल्पना कर सकता हूं!!!
सवाल सहिष्णुता का है, आपने जाहिर किया कि आप कितने सहिष्णु है और उन्होनें भी जाहिर किया कि उनमे सहिष्णुता नाम की चीज रह ही नही गई है!!
शायद आपकी ही पोस्ट को एक माध्यम बनना था कि किसी के चेहरे मे छिपे कई चेहरे में से एक और चेहरा उजागर हो!!
आप मुझे अपने साथ ही खड़ा पाएंगे!!
आलोक said
सागर जी, यह आई पी नक्शे में दिखाने वाला जालस्थल कौन सा है? यूआरएल बताएँगे तो आभारी होऊँगा।
संजय बेंगाणी said
मैं टिप्पणीकर्ता की कड़े शब्दो में नींदा करता हूँ. सागर भाई हमें अपने साथ खड़ा समझे. बेहद अफसोस हो रहा है.
संस्कारों का सम्बन्ध विचारधारा, शिक्षा या पद से नहीं होता यही साबित होता है.
आलोक said
सागर जी नज़रंदाज़ कीजिए। इस पर अधिक ध्यान देना ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देने ही है।
हाँ आपने टिप्पणियाँ न मिटा के भी ठीक किया है। कम से कम आने वाली पीढ़ियाँ तो देखेंगी कि अन्तर्जाल का इस्तेमाल करने वाली पहली पीढ़ी स्वतन्त्रता का स्वाद पा कर कभी कभी कितनी उच्छृङ्खल हो गई थी। सीखेगी, कि आज़ादी के साथ ज़िम्मेदारी भी आती है।
लोग अन्तर्जाल को बच्चों की पाठशाला न बनाएँ – जहाँ हर एक चीज़ के लिए मध्यस्थता करनी पड़े – तो वास्तव में लोगों के पास मायना रखने वाली चीज़ों के लिए समय अधिक होगा। मध्यस्थता कर भी ली तो क्या – जो मध्यस्थ है उस तक तो वह बात पहुँच ही गई न। सार्वजनिक नहीं हुई तो क्या हुआ। चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए विषय पर टिप्पणी करना आवश्यक है, विरोधी पर नहीं।
आशा है आपकी अगली प्रविष्टि जल्द देखने को मिलेगी, और वह इस विषय से इतर होगी।
Shiv Kumar Mishra said
लीजिये, आपने झूठ-मूठ में खंडन करने के लिए कहा और उन्होंने कर दिया…अब बाकी कुछ नहीं बचा.
दीपक भारतदीप said
सागर चंद नाहर जी
आपको तकलीफ हुई और भी मुझे अफसोस है, मैं यही कहूंगा की आपने फिर भी बहुत सद्भावना का परिचय दिया है.
दीपक भारतदीप
अफ़लातून said
कैसे साबित होगा कि अविनाश के नाम पर किसी हाफ़ पैन्टी ने गालियाँ नहीं लिखीं ?
Suresh Chiplunkar said
सागर भाई सभी बन्धु सही कह रहे हैं, उनके संस्कार उनके साथ, आपके संस्कार आपके साथ, फ़िर भी जैसे मखमल में लपेटकर आपने जूते लगाये हैं और तकनीक के जरिये “नंगा” करके रख दिया, वह काबिले तारीफ़ है… बस इसे यहीं बन्द कीजिये..
Suresh Chiplunkar said
रही बात अफ़लातूनों की, उन्हें तो हर जगह “चड्डी” (खाकी) ही दिखाई देती है, शायद सपने में भी
, उनका बस चले तो वे यह भी कह सकते हैं कि नंदीग्राम और सिंगूर में भी “हाफ़ पैन्टी” लोगों ने किया धरा है.. लेकिन ऐसे लोगों का कोई इलाज नहीं है.. जिन्हें “पैन्टी” “चड्डी” से ही मतलब होता है…
Punit Omar said
नाहर जी, आपको दुःख पंहुचा होगा ये तो मैं समझ सकता हूँ लेकिन मैंने अक्सर देखा है की ऐसे लोग प्रतिवाद के बाद ही और अधिक हौसला पाते हैं. सबसे सही और उचित तरीका यही रहता है की बिना ध्यान दिए आगे बढ़ जाना. किसी भी समाज में, किसी भी ग्रुप में ऐसे लोग हमेशा सभी को मिलते हैं. पर अगर आदमी ऐसे ही लोगों में उलझा रहे तो वो आपने बारे में कब सोचेगा भला?
संजीव कुमार सिन्हा said
अफलातूनजी, जरा सोच समझकर टिप्पणी करे तो अच्छा रहेगा। हाफ़ पैन्ट वाले कभी ऐसे कुकर्म नहीं करते। मां की वंदना हर स्वयंसेवक के लिए प्रार्थना है। हां, छदम धर्मनिरपेक्ष, कम्युनिस्ट और समाजवादी ही ऐसे कुकर्म करते हैं जिन्हें जरूरी तौर पर मां की वंदना (वंदे मातरम) का विरोध करने की घुट्टी पिलाई जाती है। यह मानसिकता माधरचोद कहने वाले और परोक्ष रूप से उनका बचाव करने वाले में वहीं से उपजी है।
अविनाश said
क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो/ उसको क्या जो दंतहीन विषहीन विनीत सरल हो… मैं आप सबको क्षमा करता हूं। यहां तक कि उस गाली देने वाले को भी, जिसने मोदी का गुनगान करने वालों पर अपनी उल्टी उगलने के लिए मेरे नाम का इस्तेमाल किया। तथास्तु।
राजीव तनेजा said
क्या रखा है बहस बढाने में….
अब तो अक्ल से काम करो…
लिखो…लिखो..सिर्फ लिखो…
जगत में अपना नाम करो
Bal Kishan said
जो लोग सागर जी यह कह रहे हैं कि; “जाने दीजिये और सब कुछ भूल जाइये” उन्हें कल्पना करने की जरूरत है कि उनके साथ ऐसा हुआ होता तो उन्हें कैसा लगता…
और ये टिपण्णी करने वाले भाई साहब को देखिये, कितने आराम से निर्लज्जता पर उतर आए हैं. सागर भाई, चुप रहने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. ऐसे आतताईयों के सामने झुकने की जरूरत नहीं.
अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर खोता है
maeriawaaj said
विनाश काले विप्रित बुद्धि
अविनाश का विनाश होने को हे आप सब चौथे और तेहरवी मे अवश्य आये .
मिहिरभोज said
अरे भाई बोला ना रम के नशे की पिनक में ये सब हो गया काहे टैंसनियाते हो क्यों अविनाश भाई
जीतू said
इस प्रकरण के बारे मे मुझे ज्यादा नही पता। लेकिन इतना जरुर कहूंगा कि हिन्दी चिट्ठाजगत मे अभी भी लोग स्वस्थ बहस नही कर सकते, जहाँ कंही भी तर्क वितर्क मे हारने लगते है तो तुरन्त व्यक्तिगत आक्षेप पर उतर आते है। और चर्चा एकदम से बदतमीजी की सीमाऎं लांघनी लगती है। सागर भाई, उस टिप्पणी को भूल जाइए, ऐसे लोगों की बातों का बुरा नही माना करते। आप अपना ध्यान लेखन पर लगाइए। टिप्पणियां हटाइएगा मत, अलबत्ता तकनीकी जानकारी के साथ तैयार रहिए और अफ़लातून जी के पास विशेष तौर पर भेजिएगा, जो अभी भी कुछ मानने को तैयार नही दिखते।
मिहिरभोज said
इस देश की सभ्यता ,संस्कृति के विरोध के अलावा लिखते ही क्या हैं ये लोग,क्या ईसी का नाम साम्यवादी लेखन है कि भारत माता का,वंदेमातरम का विरोध करते जाऔ,हुसैन को समर्थन देते रहो और जब तसलीमा की बारी आये तो चुप खींच जाओ.जिन लोगों को कशमीर के आतंकवादी सर्वहारै नजर आते हों उनको हिंद महासागर में डुबो देना चाहिए.अफलातून जी की कल की पोस्ट देखिये कैसे आतंकवादियों का बचाव कर रहे हैं.
pankaj said
अविनाशजी तो महान बनने का मौका नही छोडते!
अफलातुनजी से पूछना चाहुँगा कि क्या पता गाली किसी हाफ पैंटी वाले ने नही परंतु किसी “झोला छाप” ने लिखी हो.. हो सकता है ना… !! जब महाजन के एस.एम.एस मे हो सकता है तो अविनाश नामक टिप्पणी मे क्यो नहीं??
नटराज भारती said
अफलातुनजी मुझे कोई शक नहीं की ऐसी टिप्पणी किसी समाजवादी जन परिषदी ने की होगी. अविनाश बेचारा तो खाँमखा फस गया.
Jagdish Bhatia said
नाहर भाई,
बहुत ही दुखद है यह सब।
इससे ज्यादा दुखद है यह बेशर्मी जो यहा टिप्पणियों में नजर आ रही है।
आपने सब कुछ सामने रख कर अच्छा किया।
SHUAIB said
MAAF KARNE SE ZYADA MAAFI MANGNE WALA MAHAN HOTA HAI. LEKIN YAHAN AAP MAAF KERKE MAHAN HOGAYE. EK GHTIYA BAAT THI HI MAGAR ISKO LEKR PAHAD BEN GAYA. KHUSHI KI BAAT HAI KI YAHAN SABHI HINDI CHITTHAKARON ME EKTA NAZAR AARAHI HAI UMMEED HAI HAMESHA RAHEGI.
cgeahs batch 85 said
Peddler’s Street Fair next weekend
Peddler’s Street Fair next weekendFolsom Telegraph,CA-Sep 7, 2007Antiques range from fine china to old furniture to books, clothing, and paintings.