क्या यह वही सानिया मिर्जा है?
Posted by सागर नाहर on 3, January 2008
पिछले साल 29 अगस्त 2006 को मैने एक पोस्ट लिखी थी शाबास सानिया! जो कुछ यूं थी
भारत की टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा खेल में भले ही अपना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही हो परन्तु उनका अपने देश के प्रति कितना प्रेम है उन्होने कल साबित कर दिया।
हुआ यूँ कि अमेरिका में फ़ॉरेस्ट हिल्स स्पर्धा के एक मैच जो उन्हें स्पेन की लॉर्डिस डोमिंग्वेज के साथ खेला जाना था, के दौरान सानिया ने देखा कि मैदान में भारत का राष्ट्रीय ध्वज उल्टा लगा हुआ था, इस पर सानिया भड़क गई और उन्होनें आयोजकों को इस के लिये बहुत लताड़ा और खेलने से इंकार कर दिया।
आखिरकार आयोजकों ने ध्वज को बदल कर सही लगाया तब जाकर सानिया मैच खेलने को तैयार हुई।
अब जरा नीचे दी गई इस तस्वीर को ध्यान से देखिये क्या यह वही सानिया है?
तस्वीर डेली हिन्दी मिलाप, हैदराबाद ( 02-01-2008) के सौजन्य से।


pankaj bengani said
इस तस्वीर से यह नही बताया जा सकता कि ध्वज कितनी दूर था. सानिया के चेहरे से ही लगता है कि वह गहरी सोच मे डूबी हुई है और उसे पता नही है कि उसके पाँव किस ओर है.
मेरे विचार से समाचार वाले बात का बतंगड कर रहे हैं. मुझे तो अमरीकी लोग ज्यादा पसंद है जो अपने ध्वज को कहीं भी पहन भी सकते हैं.
Pramendra Pratap Singh said
मुझे यह व्यर्थ का प्रलाप लगता है, मै सानिया का सर्मथक तो नही किन्तु इतना जरूर कहना चाहूँगा कि राष्ट्र ध्वज इनता छुई मुई नही है कि वह नागरिकों के अपमान से नष्ट हो जाये।
Gyan Dutt Pandey said
मैं सानिया का फैन नहीं पर यह चित्र कुछ खास नहीं कहता।
prabhakar said
कल जो तस्वीर मैंने अखबार में देखी थी वह सही दूरी नहीं दर्शा रही थी ।और यह तस्वीर बिना संपादित किये लगायी गयी है यह मैं कल की दैनिक जागरण में छपी तस्वीर देखने के बाद नहीं मानता।
Sanjeet Tripathi said
तस्वीर के साथ लगे कैप्शन से ही जाहिए है कि इसे मानवीय भूल माना जा रहा है तो मुद्दा ही नही रह जाता!
Annapurna said
क्या यह अपने आपको सुर्खियों में बनाए रखने का हथकंडा नहीं है ?
वैसे लगभग इसी दौरान खेल के समय उनके पहरावे की तस्वीर भी जारी हुई और पहरावे की निंदा भी हुई। मेरी समझ में यह निंदा सही थी क्योंकि इस तरह का पहरावा खेल की दृष्टि से आवश्यक नहीं है।
कुल मिला कर मुझे लगता है यह वही मानसिकता है जिसमें खिलाड़ी खेल से ज्यादा ध्यान अपने आपको सुर्खियों में रखने में देते है।
mamtasrivastava1 said
फोटो से तो ऐसा लगता है की कोई टेबल पर सानिया ने पैर रक्खा है। और अगर झंडा उसी टेबल पर है तब तो निश्चय ही गलत है पर अगर फोटो को कट ऎंड पेस्ट किया है तब तो फोटो छापने वाले की गलती है ।
A S MURTY said
Each time Sania steps out of her house, the media is looking for juicy controversy. And even if it is not there, it is created by them, so much so that the hapless girl is harrassed to no extent and this affects her sports career too. If she is slipping down in the ranks and not able to display the same qualities with which she had announced her arrival a few years back, most of it is due to the negetive media and utterly useless clergy coverage. Even her dress code is a matter of concern for so many of upholders of culture. These same people forget to put together their act when the herioins from bollywood bare their everything in the name of entertainment. Atleast Sania has not stooped to that level. Leave her alone to concentrate on her Tennis and wish her to be the World No. 1, which she can provided the entire country backs her up.
Dr Prabhat Tandon said
भई यह तो बडे गहन ख्यालों मे डूबी लगती है , इस बेचारी को बख्श ही दो
दीपक said
तस्वीर से लगता है सानिया को यह खबर है, और एक बात झंडा बहुत ही दूर है उस्के पैर से.
अगर है भी तो मानो तो देव नही तो पत्थर.
Rohit Tripathi said
Yeh Media Ki Kartoot hai,…………….
Zakir Ali Rajneesh said
सृजन-सम्मान द्वारा आयोजित सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक ब्लॉग पुरस्कारों की घोषणा की रेटिंग लिस्ट में आपका ब्लाग देख कर खुशी हुई। बधाई स्वीकारें।
पुनीत ओमर said
ऊपर की टिप्पणियाँ पढ़ कर हर्ष हुआ कि भड़काने से भड़क जाये अब वह जमाना नहीं रहा। लोग अब अपना विवेक भी इस्तेमाल करते हैं और वो भी बेहद जिम्मेदारी के साथ यह निश्चित करने में कि क्या सही है और क्या नहीं।
ऊपर लिखे तर्कों से पूर्ण रूप से सहमत्। अव्वल तो यह ध्वज उस मेज पर है ही नहीं, और अगर है भी, तो सानिया को इसका भान शायद ही रहा होगा। होने को तो यह भी हो सकता है कि ठीक उसी क्षण कोइ इस ध्वज को हाथ मे पकड़ कर निकल रहा हो सामने से, जिस क्षण ये तस्वीर क्लिक की गयी हो।
कहने को तो हमारे नेता सदैव भारतीय ध्वज के आगे नतमस्तक रहते हैं, उसके सम्मान के लिये मर मिटने को तैयार होते हैं, पर क्या उन्हें देश भक्त कहा जा सकता है? देशभक्ति किसी को दिखाने के लिये नहीं होती।
विश्व दीपक 'तन्हा' said
मैं पुनीत जी की बातों से पूर्णत: सहमत हूँ।यह मीडिया की कारस्तानी के सिवा कुछ नहीं है।
और हाँ, कब तक हम ऎसी बातों को मुद्दा बनाते रहेंगे।अगर देश और झंडा का हमें इतना हीं ख्याल है तो कुछ सकारात्मक क्यों नहीं करते, नकारात्मक वस्तुओं को ढूँढना हो तो यह कोई भी कर सकता है।इसलिए आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सपथ लें कि देश के लिए कुछ सकारात्मक करेंगे।
-विश्व दीपक ‘तन्हा’
Rewa Smriti said
India mein kisi bhi baat ko ‘बात का बतंगड’ banane ka aadat hai. Usper media walon ki to baat hi kafi nirali hai. Unse to koi sahi baat bolkar dekhe…fir dekhiye hungama kaise khada hota hai. By the way I have realized that Saniya have been targeted many a times.
Sagarji aapka mere blog mein swagat hai aur aapke comment ke liye main shukraguzar hun. Aapka comment apne blog padhkar achha laga aur khushi bhi hui. Shukriya!
rgds.
A S MURTY said
Sagar bhai, mein bhi Hyderabad shahar se hi hun aur yeh jaankar atyant prassannata huyi ki aap begumpet ke karib hi rahte hain. aapka yeh blog padhkar bhi khushi hoti hai ki Hyderabad se Hindi mein likhane walon ki kami nahi hai. krupaya 9391267272 par sampark karein
satish kumar jha said
chitra dekhkar yah nahi kaha ja sakta ki yah janbujh kar ki gayi hai.