बस अब तो कुछ ही दिनों की बात है।
Posted by सागर नाहर on 25, February 2008
कल रात एक बार फिर ढाई बजे तेज आवाज से नींद उचट गई, दरअसल मेरा घर हैदराबाद ( बेगमपेट) हवाई अड्डे से मात्र २ कि मी दूर है और रात दिन हवाई जहाज के उड़ान अभरने और उतरने का शोर इतना तेज होता है कि कई बार तो कानों पर हाथ रखना पड़ता है। खासकर श्रीलंका और दुबई (अमीरात) से आने वाले विमान तो इतने नीचे होते हैं कि आवाज सहन नहीं कर सकते।
कल रात नींद जागने के बाद कुछ देर सभी को तो नींद आ गई पर मैं करवटें बदलते रहा और मन में ऐसे अजीब से ख्याल आने लगे मानों इस बार का तेज शोर शायद विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का है, यूं लगा विमान टूट कर हमारे घर पर ही आ गिरा है। मैं तैसे घर का दरवाजा खोलता हूँ, और अचानक घर पेट्रोल से भर जाता है और कुछ देर बाद पेट्रोल आग पकड़ लेता है और … हम सब धू धू कर जलने लगते हैं…. उफ्फ अवचेतन मन ने कल क्या दिखा दिया कल्पना कर के या उस दृश्य को एक बार याद करते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
जब भी मैं मित्रों से बातें ( चैट) करता हूँ तब कई बार उन्हें रोकना पड़ता है एक मिनिट रुकिये हवाई जहाज निकल ले बाद मे आप बोलें।
बस अब यह शोर कुछ ही दिन सहन करना होगा, अगले महीने की १६ तारीख को हैदराबाद के नये हवाई अड्ड़े का उद्घाटन होने वाला है, उसके बाद रात दिन का यह शोर यहाँ से बीस कि मी दूर चला जायेगा।
कई बार मैं अपने मित्रों से मजाक में पूछता हूँ कि क्या हवाई जहाजों में साईलेंसर नहीं होता?
जब मैं यह पंक्तियां टाइप कर रहा हूँ कम से कम पाँच विमान तो चढ़ उतर चुके।


25, February 2008 at 10:02 am
सागर जी आपको तो अब शान्ति मिल जाएगी क्योंकि हम हमारी बारी है।
25, February 2008 at 10:23 am
शांत व सुखद निंद मुबारक हो
25, February 2008 at 10:55 am
हम तो गोवा मे एअरपोर्ट से करीब २५ की.मी.दूर है पर फ़िर भी कई बार हवाई जहाज इतने नीचे से जाते है की घर हवाई जहाज की आवाज से गूँज भर जाता है।
25, February 2008 at 11:22 am
यह शोर अब आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया होगा, हो सकता है कि कुछ दिनों के बाद आप इसी शोर को मिस करें। जब शोर नहीं रहेगा, तब आप कैसा महसूस करते हैं, इस बारे में एक पोस्ट ज़रूर लिखें। - आनंद
25, February 2008 at 12:42 pm
हमे तो ये सब जब तक घर नही बदल ले तब तक भुगतना पड़ेगा. हमारा घर दमदम हवाई अड्डे के पास ही है.
वैसे आपको मुबारकबाद.
25, February 2008 at 1:02 pm
आप के रातों की नीद और दिन का चैन बना रहे..
25, February 2008 at 6:19 pm
अच्छा है आपको मुक्ति मिलेगी । पर भईया, जहाज़ से बड़ी मुसीबतें भी तो हैं । आप किसी भी शहर में हों…..कभी किसी पड़ोसी को ज़ोर से ‘दर्दे डिस्को’ सुनने की पिनक चढ़ सकती है, कभी पड़ोस के म्यूनिसपालिटी के मैदान में कोई अखंड पाठ शुरू हो सकता है दसेक दिन के लिए…कभी किसी राजनीतिक पार्टी की रैली…अगर ये सब ना हो तो फिर टेनिस बॉल से दिन रात का क्रिकेट मैच…..गरबा..गणेशोत्सव….मीलाद…कव्वाली…..बिल्डिंगों में सांस्कृतिक समारोह….या फिर मार्केटिंग कंपनियों के तमाशे….डियर सागर भाई किस किस पे रोईये….किस किस पे आंसू बहाईये….किस किस से पीछा छुड़ाईये ।
25, February 2008 at 8:22 pm
शोर तो सभ्यता के साथ साथ बढ़ता ही जायेगा। आदत डाल ली जाये शोर में भी शान्त रहने की!
26, February 2008 at 9:41 am
नाहर भाई इस के फ़ायदे गिनना भुल गये , आप बिना नागा रात भर घर की चोकीदारी भी तो करते रहते हो,कल ये शोर नही होगा आप नींद मे होगे और चोर..अपना काम ना कर जाये अब रात मे आपको लगातार जागने की इतनी आदत पड चुकी है,कि आने वाले दिनो मे आप फ़िर से पोस्ट लिख मारोगे,या फ़िर नये अड्डे से आवाज रिकार्ड कर सुन सुन कर सोने की कोशिश करोगे..
26, February 2008 at 1:31 pm
काश कि हवाई जहाजों में साईलेंसर होता तो भईया कि निन्नी खराब नही होती
पर अब चैन से निन्नी लिजियेगा