॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

आज गाँव बहुत याद आया

Posted by सागर नाहर on 23, March 2008

आम भारतीय की तरह मुझे भी होली खेलना बहुत पसन्द है। हर साल मुझे होली के दिन अगर कोई  देखे तो विश्‍वास भी नहीं करेगा कि  भीड़ से  दूर  रहने वाला और अक्सर चुपचाप रहने वाला सागर यही है। बरसों से मुझे होली के दिन खत्म होते ही अगले साल  की होली का इंतजार रहता है तब अपने आप को खुल कर हंसने, कूदने, नाचने और हुड़दंग करने का मौका मिलता  है।

आज सुबह आठ बजते ही हमेशा की भाँति नहा धोकर और अच्छा सा तेल हाथ पाँव, मुँह पर मल कर  तथा पुराने कपड़े पहनकर तैयार बैठ गया कि कोई भी बुलाने आये तुरंत घर से निकल जायें। नौ  बजी, दस भी बज गई पर कोई बुलाने नहीं आया। ग्यारह बजते बजते एक  रिश्तेदार बुलाने आये मैं जब उनके घर गया तो उनके घर भी कोई होली खेलने के मूड में नहीं दिखा। वहां से भी मिठाई खाकर वापस सचमुच का बैरंग लौटा।

दो बजे तक इसी तरह इंतजार करते करते निकल गये, एकाद जगह गया भी तो उन्होने मना कर दिया, कि हम होली नहीं खेलेंगे। पिछले साल इन्हीं लोगों ने  इतनी जबरदस्त होली खेली थी?  मुझे और श्रीमतीजी को रंगने के बाद बीच में खड़ा रखकर चारों तरफ से  मग  में पानी भर भर कर मारा कि दो दिनों तक पीठ दर्द करती रही और पानी की मार के निशान पड़ गये।

आखिरकार तीन बजे  शरीर पर चुपड़े तेल को निकालने के लिये एक बार और नहाना पड़ा। बरसों  तक होली के बाद नहाते समय एक दूसरे को चेहरा दिखाते देख मेरे चेहरे पर कितना रंग बचा!  पीठ पर कितना बचा!  कोई कहता आपका चेहरा तो साफ दिख रहा है पर पीठ पर अभी रंग बाकी है। इस बार कुछ भी नहीं, ना रंग ना गुलाल।

आज गाँव बहुत याद आया, वहां होते तो होली और शीतला सप्‍तमी दो दिन होली खेलने का और हुड़दंग मनाने का मौका मिलता।  आज सचमुच मन बड़ा मायूस सा हो गया, चार बजे अनमने ढंग से जब कॉफे खोला तो  तो ग्राहक भी हैरान थे पिछले तीन सालों से मेरा चेहरा इतना रंगा हुआ होता है कि साफ होते होते एक हफ्ता निकल जाता है।

लेकिन बच्चों ने जम कर होली खेली घर को भी जी भर कर गंदा किया.. देखिये  हर्षवर्धन और चैतन्य पिचकारी से गुब्बारे में रंग भरने की कोशिश करते हुए।

 

Harsh & Chaitanya

HarshVardhan & Chaitanya

17 Responses to “आज गाँव बहुत याद आया”

  1. anuradha srivastav Says:

    सागर जी होली मुबारक हो। मायूस मत होईये कमोबेश सब जगह यही हाल होता जा रहा है। होली की गर्मजोशी खोती जा रही है।

  2. अनूप शुक्ल Says:

    मौके फ़िर भी आयेंगे। होली मुबारक!

  3. ritu bansal Says:

    sagar bhayi
    ekdum sach likha hai. kabhi kabhi tyoharon ke avsar per mun udas ho jaata hai aur apne log anpi jagah bahut yaad aati hai. bus isi tarah likh kar dil ko halka kar lena chahiye. holi mubarak ho

  4. MEET Says:

    रंग हमारी ज़िंदगी से ही घटता जा रहा है भाई. खुशियाँ अब हम कहीं और ढूँढने लगे हैं शायद. बहरहाल, अपने हिस्से का रंग बदस्तूर खेलना है …..

  5. Gyan Dutt Pandey Says:

    होली मुबारक हो जी। हम भी कोरे बैठे हैं। बस इण्टरनेट पर मुबारक देते जा रहे हैं।

  6. Sanjeet Tripathi Says:

    होली मुबारक सागर जी!!
    रंग आते हैं जाते हैं एक रंग यह भी सही, है न?

  7. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    होली का रंग सभी जगह फीका होता जा रहा है। अगर आप के पास अपने नहीं हैं तो वहाँ अपने बनाए जा सकते हैं। काश आपने आगे बढ़ कर किसी को तलाश किया होता।

  8. राज भाटिया Says:

    सागर जी,हम ने भी काफ़ी सालो से होली नही मनाई,चलो अगले साल आप के काफ़ी दोस्त बन जाये गे फ़िर बताना केसे मनी होली, आप को फ़िर से होली की बधाई

  9. अनिल रघुराज Says:

    सागर भाई, यही तो बात है कि त्योहारों में दिखावा बढ़ता जा रहा है, उल्लास और सहकार घट रहा है। लेकिन क्या करें? जमाने का यही दस्तूर है।

  10. yunus Says:

    हां तो सागर भाई आपको किसी ने रंग नहीं लगाया । हमें पता होता तो हैदराबाद में किसी को तैनात कर देते, ऐसी जबर्दस्‍त भागमभागी होली होती कि आपको सदा याद रहता ।

  11. Nitin Bagla Says:

    हम तैनात थे हैदराबाद में..पर चूंकि खुद ही रंगों से बचते हैं तो सागर भाई को रंगने क्या जाते :)
    होली की शुभकामनाएं।

  12. नीरज रोहिल्ला Says:

    सागर जी,
    तन न रंगा तो क्या हुआ, मित्रों की बधाईयों से आपका मन तो अब तक पक्का रंग गया होगा । हमें पता होता तो आपके नाम पर सभी को एक बार और रंग देते । दोनो बालकों के चेहरे पर भाव देखते ही बनते हैं, उन्होनें तो पक्का मन भर के होली खेली होगी ।

  13. Rohit Tripathi Says:

    Sagar ji bas aapne to jaise man ki baat kah di, jab kabhi bhi yaha ki holi ku tulna apne gaon ki holi se kara hu to yaha ki holi neeras si lagne lagti hai, holi ke din ki hi baat hai kuch log shaam ko 4 baje ke aas - pass ja rahe the kuch bacho ne upar se unpar rang dala to woh galiya dene lage ki holi kahtam ho gayi hai inhone humpar rang kyon dala….. ab hum holi diwali ka wait kam aur valentine day aur friendship day ka wait adhik krane lage hai. dekhte jayiye abhi to pana nahi kitne naye tyoharo ka pata chalega.

    Rohit Tripathi
    http://rohittripathi.blogspot.com

  14. संजय बेंगाणी Says:

    हम भी इस बार नहीं खेले… वरना जम कर खेलते है.

    अगली बार सही….

  15. mamta Says:

    सागर जी देर से ही सही पर होली की बधाई और अगले साल आप खूब होली खेले इसके लिए अभी से ढेर सारी शुभकामनाये।

  16. Menka Says:

    Holi ki hardik subhkamnaayein.
    Bite huye holi ki yaad me ye man tarsta hai ye bhi HOLI ka hi ek rang hai.Hai na…

  17. Rewa Smriti Says:

    Gaon ki holi ki baat hi kuch aur hai…bhale hi hum bade ho gaye hein but bachpan mein kheli holi ko yaad kar aaj bhi khush hote hein…. :)

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