॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

Posted by सागर नाहर on 22, April 2009

एक बात समझ में नहीं आती, जब  समाचार चैनलों को भाजपा से इतनी नफरत है कि दिन रात पानी पी पी कर उसे कोसने में लगे  रहते हैं।
जब ये इतने ही सिद्धान्तवादी हैं और इतने ही शर्म निरपेक्ष धर्म निरपेक्ष हैं तो फिर भाजपा के चुनाव के विज्ञापन भी अपने चैनलों पर क्यों दिखाते हैं।
हम एक तरफ तो आडवाणी जी को कंधार कांड के लिये  उन्हें दोषी मानते हैं और फिर विज्ञापनों में उन्हें “लौह पुरुष” बताने से भी गुरेज नहीं करते।

जब ये अपने सिधान्तों पर इतने अटल हैं तो क्यों नहीं इन विज्ञापनों को अपने चैनलों पर रोक लगा देते?

क्या इन कथित साम्प्रदायिक पार्टियों को कोसने का काम भी हम  पैसा लेकर ही करते हैं?

****

सबसे बड़े मूर्ख तो वे हैं जो ऐसे चैनलों को अपने विज्ञापन  देते हैं।

और आखिर में हम (आम आदमी)  क्या है?

9 Responses to “”

  1. आम आदमी मूर्ख है….

    सबसे बड़ा रूपया है…..

    एक बात देखो. एन.डी.टी.बी. वाले वामपंथी है. राम के नाम पर मूँह में कूनेन घुलती है, उसी के चैनल पर राम की रामायण चलती है. सिद्धांत से बड़ा रूपया….समझे भैया? पैसे के लिए कुछ भी बोलेगा…दिखाएगा….चैनलों में किसका पैसा लगा है, कब तक छिपाएगा? मोटी पगार पाने वाले साम्यवाद का राग अलापते है. यहाँ से वहाँ फुदकते है. जनता को मुर्ख समझा है क्या? मगर उपर तो मैने ही कहा है आम आदमी मूर्ख है…… :)

  2. LOVELY said

    हम हर तरह के “वाद” और उसके परिणामों को (प्रयोग के बाद )खुद पर दिखाने वाले प्रयोगशाला जीव (बोले तो गिनी पिग ) हैं

  3. संगीता पुरी said

    विज्ञापन देनेवाले ही गलती कर रहे हैं .. कुछ अधिक पैसे दे दें .. तो समाचार भी खरीदा जा सकता था।

  4. shama said

    Sagarji,
    Aap theek kehte hain…jab samachar vahinipe pigyapan hote hain, to sochiye kya hame sahee samachar mil sakte hain? Aaj mujhe lagta hai, jo “aakashwaneepe” samachar sunte the, chahe wo sarkaree redio channel hee tha, phirbhee gutbaazee nahee thee…aaj to samajhme nahee aata, kis wahineepe wishwas kiya jay..wahee halat akhbaronkee…wahee kayee saree patrikaonkee…!

  5. amit said

    अब संजय भाई ने कह ही दिया है कि सबसे बड़ा रूपया!! :D

    विज्ञापन दिखाने के पैसे मिलते हैं, तो क्या फर्क पड़ता है। पैसा आखिर पैसा होता है, उससे बड़ा धर्म निर्पेक्ष कोई नहीं। वह किसी धर्म को नहीं मानता किसी जाति को नहीं मानता किसी विचारधारा के अधीन नहीं, बल्कि जिसको चाहे उसकी विचारधारा बदल सकता है, धर्म बदल सकता है, जाति भी बदल सकता है। ;)

    और विज्ञापन दिखाने वाले कोई गलती नहीं कर रहे। जो विरोध करे उसके यहाँ और विज्ञापन दिखाना चाहिए (इससे विरोधी की बात की औकात कम होती है)। मैं तो कहता हूँ कि यदि कांग्रेस वाले विज्ञापन स्लॉट देने को तैयार हों तो पैसा देकर उनके दफ़्तर के बाहर भी विज्ञापन लगा देना चाहिए! :D

  6. anil kant said

    बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया

  7. kmmishra said

    फर्जी पत्रकारिता का ज़माना है । न्यूज चैनल सत्ता के दलालों की मंडी है । राष्ट्रवाद फासीवाद है । इंतजार है एक अदद जिन्ना का । और चीन की दी हुई हड्डी चूसते साम्यवादी कुत्तों की तो बात ही निराली है । जय हो मीर चंदों की ।

  8. KAMAL said

    if you want to see god go to SANT NIRANKARI MISSION see god and then read all your holy book

    KAMAL JIT

  9. भाई साहेब,
    ब्लैक मनी सफ़ेद करने के लिए कुकुरमुत्ते की तरह समाचार चैनल खोल रखा है. उन्होंने धर्म निरपेक्षता का चोला बेशक ओढ़ रखा है लेकिन नैशर्गिक बेशर्मी वश ‘अर्थ निरपेक्षता’ का ढोंग भी रचना उनके लिए मुश्किल है.

Leave a Reply

XHTML: You can use these tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <pre> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>