Protected: समय बड़ा बलवान-२
Posted by सागर नाहर on 10, March 2007
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Posted by सागर नाहर on 10, March 2007
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Posted by सागर नाहर on 10, March 2007
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Posted by सागर नाहर on 26, September 2006
“मीरा बाई के भजन” के नाम से लिखने वाली चिट्ठाकार और मेरी पत्नी श्रीमती निर्मला सागर की बुवा की १६ वर्षीय पुत्री निशा का आज सुबह सूरत में प्रात: १०.०० बजे निधन हो गया।
दिनांक १६-०९-२००६ को जब अपनी सहेली के साथ निशा कॉलेज जा रही थी तब ताप्ती नदी के पुल पर एक ऑटो ने अचानक ब्रेक मार दिया और पीछे स्कूटी चला रही निशा संभल नहीं पाई और ऑटो से टकरा कर गिर पड़ी जब तक उठती पीछे आ रहा ट्रेकटर उन दोनो के उपर चढ़ चुका था, निशा की सहेली ने तो घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, निशा का १० दिन अस्पताल में रहने के बाद सुबह निधन हो गया।
जब मेरी सगाई की बात चल रही थी, और मैं निर्मला जी को देखने गया थ, तब निशा १ वर्ष की थी और निर्मला जी निशा को गोद में लेकर हमारे पास आई थी, हम निर्मला जी से क्या बातें करते निशा को खिलाने लग गये, बस तब से उस बच्ची के साथ स्नेह का ऐसा रिश्ता बना जो वर्णन कर पाना मुश्किल है।
मई महीने में रात को १० बजे एक बार मैने फ़ोन किया तो निशा के पापा दिनेश जी का कहना था कि वे अभी थियेटर में है क्यों कि निशा ने कहा है कि पापा आज फ़िल्म दिखाओ और आप जानते हो मैं निशा की कोई बात नहीं टाल सकता और वैसे भी निशा का मेरा साथ है ही कितना शायद ४ या ५ साल, बाद में तो उसे दूसरे घर जाना ही है!!
क्या पता कुदरत को क्या मंजूर था कि निशा का हम सबके साथ ४-६ साल नहीं बल्कि ४-६ महीनों का ही है।
उस मासूम की शक्ल आँखों के सामने से नहीं हटती। भगवान निशा की आत्मा को शान्ति दे
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Posted by सागर नाहर on 4, September 2006
आज की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण खबर यह है कि डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफ़िक और एनिमल प्लेनेट चैनल पर मगरमच्छों और अजगरों के साथ खेलते और उन्हें पकड़ते दिखते ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरणविद स्टीव इरविन का एक जहरीली मछली के काटने से निधन हो गया है। स्टीव की बहादुरी के चलते उन्हें “क्रोकोडाईल हंटर” भी कहा जाता था।
डिस्कवरी के लिये अनेक फ़िल्में बनाने वाले इस बहादुर को साँपो और मगरमच्छों से कभी डर नहीं लगा परन्तु ग्रेट बेरियर रीफ़ के पास समुद्र में हो रही एक शूटिंग के दौरान उन्हें एक छोटी सी स्टिंगरे नामक जहरीली मछली के काट लेने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया परन्तु स्टीव को बचाया नहीं जा सका। नीचे दिये चित्र में स्टिव अपने बच्चे और मगरमच्छ के साथ खेल रहे हैं, एक बार उन्होनें अपने छोटे से बच्चे को अजगर के बाड़े में छॊड़ दिया था इस वजह से उनकी बहुत आलोचना भी हुई थी।
हिन्दी चिट्ठा जगत की ओर से इस बहादुर को हार्दिक श्रद्धान्जली। 


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Posted by सागर नाहर on 27, August 2006
मेरी सबसे ज्यादा पसंदीदा फ़िल्म अनुराधा, बावर्ची, गुड्डी, नमक हराम,आनंद और सत्यकाम जैसी फ़िल्मों के महान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी का आज निधन हो गया। उनके जाने के साथ ही हमने सामाजिक समस्याओं पर हल्की फ़ुल्की फ़िल्म बनाने वाले निर्देशक को हमने खो दिया है, भगवान ऋषि दा की आत्मा को शान्ति प्रदान करें!
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