॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

राजस्थानी भाषा का नारद

Posted by सागर नाहर on 10, जुलाई 2006

कुछ लोगों की उत्साह वाकई गज़ब होता है। अपने टी आर पी विशेषज्ञ बाबा बेंगानी उर्फ़ संजय बेंगानी इस का उत्तम उदाहरण है। कुछ दिनों पहले गूगल पर बेंगानी बाबा से बात करते समय मैने कुछ वाक्य राजस्थानी में लिख दिये, तभी महोदय के मन में विचार आया कि क्यों ना राजस्थानी में भी चिठ्ठा लिखा जाये, हमने तो सोचा कि बाबा मजाक कर रहे हैं पर यह क्या, अगले दिन सुबह कि मेल से संदेश मिला कि मैने अपना राजस्थानी चिठ्ठा “घणी खम्मा “बना लिया है, और हमें आदेश दिया कि तुम भी अपना राजस्थानी चिठ्ठा बनाओ! भाई बाबा के आदेश का पालन करना जरूरी है नही तो एक मंतर मारेंगे कि सारी टी आर पी गायब हो जायेगी सो हमने भी अपना राजस्थानी चिठ्ठा ” राजस्थली”बना लिया है।
इस के साथ ही बाबा बेंगानी उर्फ़ संजय बेंगानी राजस्थानी भाषा के पहले और सागर दूसरे चिठ्ठा कार हो गये।
अब चिठ्ठा तो लिख लिया पर राजस्थानी भाषा के लिये नारद कहाँ से लायें!!
तो साहब अपने परम पूज्य बाबा बेंगानी ने इस का रास्ता भी निकाल लिया पहले गुजराती नारद” ઓટલો” के बाद आपने राजस्थानी भाषा के नारद “राजस्थान तरकश ” भी बना लिया है। इतना ही नहीं बाबा बेंगानी अब राजस्थानी भाषा का शब्दकोष भी बना रहे हैं।
ध्यान रहे कि बाबा बेंगानी का नामकरण हमने किया है यह हमारा कॉपीराईट है सो इस शब्द को उपयोग में लेने से पहले शुल्क के रूप में हमें धन्यवाद देना जरूरी है वरना हम बाबा से कह कर ऐसा टोटका करेंगे/ करवायेंगे कि आपके चिठ्ठे पर कोई टिप्प्णी भी नहीं करेगा।
राजस्थानी भाषा के शब्दकोष में सभी राजस्थानी भाषा के जानकार भाई बहनों का सहयोग अपेक्षित है, आप सब संजय भाई को या मुझे मेल लिख कर सहयोग कर सकते हैं, धन्यवाद।

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4 Responses to “राजस्थानी भाषा का नारद”

  1. सागर जी और संजय जी…
    आप दोनो को राजस्थानी में शुरुआत करने के लिये बधाई..
    एक सवाल जो मेरे मन में उठ रह है वो ये है कि क्या वाकई ‘राजस्थानी’ नाम की कोई भाषा है..
    मेरा ऐसा सोंचना था के समूचे राजस्थान में कोई एक भाषा ना बोली जाकर अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग बोलियां बोली जाती हैं…उदाहरण के लिये मारवाडी, मेवाडी, हाडौती, शेखावटी आदि…

    फ़िर भी, आपका प्रयास अभिनव है…पुनः साधुवाद आप दोनो को…

  2. भाइसा,

    लोगबाग माँय जागृति फैलानी पडसी. कुण जाण है राजस्थान मं की ब्लोग जिँयाकली भी कोई चीज हुवै है. आपन्न ही काम करनो पडसी. ज्यादा हुँ ज्यादा लोग लिक्ख ओ देखनो पडसी.

  3. बढ़िया।बधाई।

  4. Anonymous said

    यारो ,सागेड़ो काम हुयो . ओर पेली होणो हो पण फ़ेर भी दोनू जणा – मायड़ भाषा रा लाडला सपूत -म्हारी बधाई ल्यो .
    – प्रियंकर

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