॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

सागर छुट्टी पर

Posted by सागर नाहर on 7, अगस्त 2006

जैन धर्म में उपवास का बहुत बड़ा महत्व है, वर्षाकाल के दिनों में जब साधु संत विचरण करने की बजाय एक स्थान पर चार महीनों के लिये रुक जाते है, और इस काल को चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दिनों में जैन धर्म में धर्म ध्यान ज्यादा होता है, और उपवास भी बहुतायत होते हैं।

तीन दिन के उपवास को तेला, आठ दिन के उपवास को अट्ठाइ, इसी तरह ३१ दिन के उपवास को मास खमण या क्षमण कहते हैं। इस उपवास की सबसे बडी़ खास बात यह होती है कि तपस्वी उपवास के दिनों में कुछ खा नहीं सकता, केवल उबला पानी पी सकता है , वह भी सिर्फ़ दिन को, यानि सुर्यास्त होने के बाद अगले दिन सुबह नवकारसी या सुर्योदय होने तक पानी नहीं पी सकता।

मैने कई बार कोशीश कोशिश की परन्तु एक उपवास से आगे नहीं बढ़ पाया, और मेरी बड़ी बहन श्रीमती संगीता जी जो अभी सुरत में रहती है, और पिछले कई वर्षों से हर चातुर्मास में तपस्या करती रहती है, बेला, तेला अट्ठाई सोलह से आगे बढ़ कर इस बार उन्होने 31 उपवास करने की ठानी है और आज उनके उपवास के 29 दिन पूरे भी हो चुके( आश्चर्य यह है कि मेरी बहनजी का वजन मात्र 45Kg ही है)। यह कई लोगों को शायद सही नहीं लगे कि भूखा रह कर भी क्या धर्म होता है परन्तु यह अपनी अपनी आस्था की बात है। मेरी मम्मी जी इसी तरह 4 वर्षीय तप कर चुकी है जिसमे एक दिन खाना और एक दिन उपवास होता है।

उपवास के पूरे होने के बाद तपस्वी को खाना खिलाने की रस्म होती है, उसे पारणा कहते है। मेरी बहन का पारणा उत्सव दिनांक 10-08-2006 को है, स्वाभाविक है कि मुझे भी जाणा ही पड़ेगा,सो मैं कल यानि 08-08-2006 को सूरत जा रहा हुँ वापसी दिनांक 15अगस्त तक होगी।

मैं जानता हुं कि आप लोगों को मेरे बिना बड़ा सूना सुना लगेगा :), कौन आप को इन दिनों अपनी टिप्पणीयों से पकाएगा; परिचर्चा में भी शायद मेरा रिकार्ड टूट जाये, पर जाना भी जरूरी है

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4 Responses to “सागर छुट्टी पर”

  1. यात्रा मंगलमय हो।

  2. हमारी तरफ से ‘साता’ पुछे.

  3. SHUAIB said

    हमारी नेक तमन्नाएं आपके साथ

  4. […] अब आप दावतों का कारण सुनेंगे तो मन ही मन हँसे बिना नहीं रहेंगे।  वर्षाकाल के चार महीनों में जैन धर्म   में लोग  उपवास बहुत करते हैं तीन उपवास से लेकर एक एक महीने तक। इस उपवास के दौरान तपस्वी सिर्फ उबला पानी पीता है और  सूर्यास्त के बाद पानी भी नहीं पीता। इन उपवासों को  तपस्या कहा जाता है। इस तरह मेरी बड़ी दीदी ने पिछले साल एक महीने के लगात…। […]

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