॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

सबको सन्मति…

Posted by सागर नाहर on 13, जनवरी 2007

आदरणीय अनूप शुक्ला जी की पोस्ट पर टिप्पणी नहीं कर पाने की वजह से मेरे अपने चिठ्ठे पर लिख रहा हूँ। क्यों कि जैसा मैने आपको पहले बताया कि जिस दिन से टाटा का कनेक्शन लिया है उस दिन से परेशानियों से मुक्ति नहीं मिल रही। पहले तो मेरा पन्ना नहीं खुलता था पर IP सेटिंग मेन्यूअल की तब से मेरा पन्ना तो खुलने लगा पर अब तक www.hindini.com\furasatiya और www.hindini.com\eswami साईट नहीं खुल रही है। जब स्वामीजी से संपर्क किया तब उन्होने बताया कि आपके राऊटर का MAC सेटिंग सही नहीं होने की वजह से साईट नहीं खुल रही होगी, TATA कंपनी में शिकायत दर्ज कराने के बाद तीन दिन में चार बार DNS नंबर बदलवा दिये पर अभी तक परेशानी जस की तस है। अभी http://www.the-cloak.com/Cloaked/+cfg=32/http://hindini.com/fursatiya/?p=225 इस तरीके से साईट खोल कर लेख पढ़ने पड़ रहे हैं। और जिस टिप्प्णी का जिक्र भाई साहब ने किया वह भी एक मित्र के माध्यम से करवानी पड़ी थी।

अब मूल बात पर आते हैं आदरणीय भाई साहब ने कहा कि “आप कैसे प्रशंसक हो प्रदीपजी के कि बाबा रामदेव की पीठ ठोकने के चक्कर में इस बारे में कुछ भी एतराज दर्ज नहीं कराया!” जी यह गल्ती तो मुझ से हुई है इसके लिये में क्षमाप्रार्थी हूँ जब लेख लिखा था तब इसका जिक्र करना था जो आवेश में मैं भूल गया था, पर इसका अर्थ यह नहीं कि मैं बाबा रामदेव जी की इस बात से भी सहमत हूँ कि पं प्रदीप चापलूस थे। मैं ना तो स्वामी रामदेव जी का भक्त हूँ ना ही गांधीजी का। जिस तरह गांधीजी के बारे में लिखा एक ना एक दिन स्वामी रामदेव के बारे में भी लिखूंगा।

दूसरी बात भाई साहब ने यह लिखी कि:

गांधी में और कितनी भी कमियां रहीं हों वे कम से कम इतने कमजोर कतई नहीं रहे होंगे कि भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु को इसलिये फांसी पर चढ़वाने के लिये कामना करें।

अब इस बात का कोई फायदा नहीं क्यों कि गांधीजी के मन में जो कुछ भी हो चाहे वह लोकप्रियता कम होने का डर हो या अपने सिद्धान्तों का पालन, वे उन महान देश भक्तों को बचा नहीं पाये जब कि चाहते तो ऐसा कर सकते थे। जो नुकसान देश को होना था हो चुका, शायद वे तीन देश भक्त जिन्दा होते तो आजादी काफी पहले मिल गयी होती।

तीसरी बात यह थी कि:

लेकिन इन संभावित कार्यों के मुकाबले नेहरू जी ने देश के लिये जो अनेक कार्य किये उनकी अनदेखी करना कहां तक जायज है!

नेहरू जी की वजह से देश के लिये क्या क्या परेशनियाँ खड़ी हुई वह किसी से छिपी हुई नहीं है मसलन कश्मीर मसला! परन्तु कुछ और भी बड़ी भूले उन्होने की जिनके बारे में अगली पोस्ट में लिखूंगा।

आदरणीय अनूप शुक्ला जी के प्रति मेरे मन में एक बड़े भाई का आदर है और उन्होने अगर कुछ कहा है तो उसे बड़े भाई की डाँट या उलाहना ही कहा जा सकता है। मैं आभारी हूँ कि मुझे उन्होने अपना समझा और अधिकार से डाँटा 🙂 , क्यों कि डाँट या उलाहना अपने को ही दिया जा सकता है, परायों को नहीं।

मैं अपनी तरफ से गांधीजी के प्रति वाद विवाद को इस लेख के साथ समाप्त करता हूँ, क्यों कि वैसे भी ना तो अब गांधीजी जीवित है ना ही भगत सिंह और आजकल मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही है। 😉   🙂

Advertisements

6 Responses to “सबको सन्मति…”

  1. तबियत सम्भालिये भाई. वद-विवाद तो चलता रहेगा.

  2. Divyabh said

    सबसे पहले मैं यही कहना चाहूँगा कि
    लगता है गाँधी जी को तो आप इतना जान गये
    कि विश्व परिदृष्य में हो रही चर्चाओं का कोई
    मोल बचा ही नहीं…विडम्बना क्या है…! हमारा देश
    अबतक क्षेत्रवाद‍ – भाषावाद से उपर उठा ही नहीं…
    १८५७ के विद्रोह को गाँधी ने ज्यादा समाझा था क्योंकि
    इसका असर भगत सिंह,सुखदेब आदि से ज्यादा व्यापक
    था…और इसे भी दबा दिया गया…लोग भुल भी गये
    उन लोगों का सिर्फ नाम ही बचा….
    लगभग ५० सालो बाद ही ये पुनः उभरा था।इसका दमन
    भी असानी से हो गया और भुलना तो यहाँ की नियती…
    गांधी जैसे महान (आप नहीं मानते हैं फिर भी चर्चा कर रहे है
    यही तो महानतम व्यक्ति की पहचान है)…भगत सिंह से क्या डरते
    वो तो लम्बी ळड़ाई लड़ना जानते थे…सर इसके लिये टिकना पड़ता है…
    छोटी ळड़ाई तो बहुतों ने लड़ी…पर बीच मझधाड़ में ही छोड़ गये और
    विगुल फूटने से पहले हम हार गये…धन्यवाद

  3. narayan said

    क्या गुरु । अब इधर भी गांधीगिरि का लोचा शुरु हो गया लगता है।
    भाईलोग को बोले तो मुन्ना – सर्किट को बुलाऊं क्या…..

  4. भैये, हम लेख लिखे थे कोई डांट-फटकार नहीं!इसी बहाने तमाम टाइपिंग हो गयी। असल में जब हम कोई काम करते हैं तो उसके कुछ परिणाम सोचते हैं। काम हो जाने के बाद उसके तमाम दूसरे पहलू भी सामने आते हैं और तब बकौल स्वामीजी अनेक रायचंद पैदा हो जाते हैं कि ये काम ऐसे होते तो ऐसा होता। नेहरूजी के बारे में भी तमाम लोग ऐसे ही कहते हैं और गांधीजी के बारे में भी। नेहरूजी के पंचशील के चक्कर में चीन ने भारत में कब्जा कर लिया। जितनी मुझे जानकारी है कि जब तक चीन ने भारत पर हमला/कब्जा नहीं किया था तब तक देश में आयुध निर्माण की बात बेफजूल समझी जाती थी। जब वहां फंस गये तो तमाम आयुध निर्माणियां खुलीं जहां हथियार बनना शुरू हुये। ऐसे ही तमाम लोग कहते हैं कि अगर सन ४८ में भारतीय फौजों को रोका नहीं जाता तो फौजें लाहौर पर कब्जा कर लेतीं वहीं कुछ लोग कहते हैं कि नेहरूजी की यह समझदारी थी वर्ना आगे हार जाते।अभी एक फौजी अधिकारी ने बताया कि वहां कश्मीर में नेहरू परिवार के सेव के बाग थे जहां वे सुरक्षित हो गये नेहरूजी ने लड़ाई रोक दी। इन सब बातों का कोई अंत नहीं है। भगतसिंह क्रांतिकारी विचारक थे। उनके बारे में राजकमल प्रकाशन से छपी किताब ‘भगतसिंह और उनके साथियों के द्स्तावेज’ में उनके विचारों की जानकारी मिलती है। गांधीजी के बारे में और कुछ कहना ठीक नहीं है। प्रदीप के बारे में उलाहने की ऐसी कोई बात नहीं। मुझे मजा भी आया कि ‘बच्चू’ से ये बात छूट गयी जिसकी मौज ली जा सकती है। अक्सर ऐसा होता है कि जब हम एक बात को खास मानकर उसके बारे में सोचते-लिखते हैं तो इस चक्कर में तमाम बातें छूट जाती हैं जो शायद उतनी ही जरूरी होती हैं। चाहे क्रांतिकारी शहीद रहे हों या गांधीवादी या दूसरे लोग, सबका हमारे देश को बनाने में योगदान रहा है। किसी के योगदान को कम ज्यादा करके आंकना ठीक नहीं है। जैसा हमें देश मिला है अब उसके आगे क्या योगदान दे सकते हैं यह सोचना,करना चाहिये! है कि नहीं!

  5. वैसे भी ना तो अब गांधीजी जीवित है ना ही भगत सिंह और आजकल मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही है। 😉

    –क्या पंच लाईन दी है. हँसते हँसते हालत खराब हो गई. तबियत का ध्यान रखिये, यहाँ हम संभाले हैं. 🙂 बाकी तो और सब हइये हैं…

  6. Amit said

    आजकल मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही है

    अब किसी दवा कंपनी के विज्ञापन में ऐसा कहते तो आपका सहकर्मी/शुभचिंतक आपसे कहता, “तो कुछ लेते क्यों नहीं”। 😉 हम भी आपके शुभचिंतक हैं इसलिए ऐसा कह रहे हैं, स्वास्थ्य लाभ कीजिए(हिमालय/पहाड़ पर जाकर भी कर सकते हैं)। बाकी इस विषय में आपकी और मेरी सोच काफ़ी मिलती सी प्रतीत होती है। 🙂

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: