॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

एक बार फिर

Posted by सागर नाहर on 18, जनवरी 2007

हमने ना सुधरने की जो कसम खाई है, कभी नहीं सुधरेंगे! कभी हम गणेश जी को पिलाने के नाम पर करोड़ों लीटर दूध नाली में बहा देते हैं तो कभी हमें दीवारों पर सांई बाबा और चांद में आचार्य तुलसी दिखने लगते हैं।
आजकल हमारे यहाँ फिर से तिरुपति बालाजी के पर्चे बाँटने का चलन बढ़ा है आजकल रोज के १००-१५० पर्चे मेरे यहाँ फोटो कॉपी होते हैं। मगर कल तो हद तो तब हो गयी जब शाम ढ़लते ढ़लते एक अफ़वाह उड़ी कि जिन घरों में लड़के हैं उन पर भार है ( भार कैसे होता है पता नहीं, ज्यादा जानकारी के लिये आदरणीय फ़ुरसतिया जी से संपर्क किया जाये, बकौल जीतू भाई पूछताछ विभाग उनके पास है ) उस भार को दूर करने के लिये अपने घर की देहरी पर एक नारियल फ़ोड़िये और लड़कों का भार दूर करिये। और फ़िर उस नारियल को खाना नहीं है फैंक देना है, देखते ही देखते अफ़वाह पूरे शहर में फ़ैल गयी और वे लोग जिनके घर में लड़के नहीं है वे भी नारियल ले जा कर फोड़ने लगे,आलम यह था कि जो नारियल की दुकाने ७ बजे बंद हो जाती है वह रात ११ बजे तक खुली थी और जम कर नारियल बेच रही थी।
मेरा रोज का रूटीन है कि दस से सवा दस कॉफ़े बन्द कर हमारे जियाजी की दुकान पर १५-२० मिनीट उनसे बातें कर घर जाता हूँ, कल रात को किसी कारण से थोड़ा जल्दी घर गया तो दुकान पर नारियल छीलने में मदद करनी पड़ी वो भी ग्यारह बजे तक, हाथों में छाले हो गये इतने नारियल छीलने पड़े। (आज सुबह सब तरफ नारियल के छिलके बिखरे पड़े थे।
अभी पिछले साल इन्हीं दिनों एक अफ़वाह उड़ी थी कि एक चुड़ैल आपके घर रोटी मांगने आयेगी, अगर आप उसे रोटी दे देते हैं तो वो रोटी के टुकड़े करेगी और जितने टुकड़े करेगी उतने ही आपके घर के सदस्यों की मौत हो जायेगी, अगर आप रोटी नहीं देंगे तो क्या होगा यह अभी याद नहीं आ रहा, उस  चुड़ैल को  पता नहीं कितनो ने तो देखी भी थी 🙂 🙂

मेरे मन में डर था कि कहीं निर्मला जी भी मुझसे यह सब करने को ना कहे पर संयोग से वे भी इस इन बातों में विश्वास नहीं करती और जब मैने यह बात घर में बताई तो बहुत देर तक वे हँसती रही।

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9 Responses to “एक बार फिर”

  1. जब तक सूरज चाँद रहेगा,
    तब तक यह सब काम रहेगा……

    सागर भाई, यह सब ढकोसले कभी नहीं बंद होंगे. कभी किसी रुप मे तो कभी किसी रुप में यहाँ वहाँ इनके दर्शन प्राप्त होते रहेंगे. इन पर ध्यान न ही दिया जाये तो बेहतर… 🙂 अब देखिये फुरसतिया जी इस भार को कैसे हल्का बनाते हैं, क्या मालूम इसका क्या अर्थ है. 🙂 🙂

  2. Tarun said

    ऊपर से तुक्का ये कि मीडिया भी मजे ले ले के बढा चढा के दिखाता है…….

  3. भैये यह भी वेपार का हिस्सा है. सोचीये कितने नारीयल बिके होंगे एक ही दिन में. पर्चे की अफवा आपको तो फलदायी साबित हो रही है 🙂 मजे लो. हाँ नैतिक आधार पर यह आपको गलत लग सकती है.
    इस प्रकार मूर्ख बनना भी लोगो को आनन्द लेता है.

  4. समझदार पत्नि पाने के लिए बधाई.

  5. क्या आइडिया लगाई है नारियल बेचने की!! पसन्द आई मुझे! 🙂

  6. सागर भाई,
    तुम उड़ा दो एक अफ़वाह!

    अगर लोग तुम्हारे इन्टरनैट कैफ़े पर आकर, नारद के जितने ब्लॉग पढेंगे, उनका उतना ज्यादा फायदा होगा। अगर नही पढेंगे तो …….. वगैरहा वगैरहा।

  7. समीरलालजी, भार हल्का करने की
    तरकीब जो आप इस्तेमाल कर रहे हो वह उड़नतश्तरी बुरी नहीं है!

  8. Shrish said

    गनीमत है आपने ये नहीं कहा कि इस पोस्ट का लिंक आगे दस लोगों को दो, नहीं तो तुम्हारा ब्लॉग ठप हो जाएगा। 🙂

  9. tara said

    meerabai.wordpress.com

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