॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

संरक्षित: तेरी दुनिय़ाँ से दिल भर गया नारद

Posted by सागर नाहर on 10, मार्च 2007

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