॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

आह क्रिकेट- वाह क्रिकेट

Posted by सागर नाहर on 20, मार्च 2007

वही हुआ जिसका अंदेशा था, भारत के बरमूडा से 257 रनों से जीतते ही एक बार मीडिया ने अपना असली रंग बता दिया। कल तक जो चैनल राहुल द्रविड़ , वीरेन्द्र सहवाग और ग्रेग चैपल को बंग्लादेश  से हार का दोषी ठहरा रहे थे, आज वही भारत के मैच जीतते ही उन सभी के गुणगान करते अघा नहीं रहे।एक चैनल ने तो गुड़गाँव में एक रोड़ शो तक कर डाला " हार का दोषी कौन?" दर्शकों से हजारों एस एम एस  मंगवाये गये और  लाखों की  कमाई कर ली गई। दर्शकों के SMS  को आधार बना कर  चैनल  ने हार का ठीकरा राहुल द्रविड़ के और वीरेन्द्र सहवाग के माथे फोड़ दिया गया और  बरमूडा से जीतते ही सारे चैनल  भूल गये कि  वे आज सुबह तक भारतीय खिलाड़ियों को कोस रहे थे।टीवी पर क्रेकेट की चर्चा करते  क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी अपने रंग बदल दिये कल तक खिलाड़ियों को  खेलने का तरीका सीखा रहे थे, और ग्रेग चैपल को क्रेक चैपल तक कह रहे थे (अतुल वासन) आज वही उनकी प्रशंषा कर रहे हैं कि गुरु ग्रेग और द्रविड़ की टीम ने करिश्मा कर ही दिखाया।

भारत के जीतते ही सबका सुर बदल गया कल तक पुतले जलाते और धोनी के निर्माणाधीन घर की दीवारॊं को तोड़ते लोगों को दिखा दिखा कर चैनलों बोर किया तो मैच के जीतते ही सहवाग फ़ैन्स क्लब तक ढूंढ निकाले! रात में कोई पेन्टर नहीं मिला बैनर बनाने के लिये  और बैनर नहीं बन पाये तो कपड़े पर पैन से ही लिख दिया गया " सहवाग फैन्स क्लब"! क्यों हममें सहनशक्ति नहीं है एक मैच के जीत जाने पर खिलाड़ियों को फूल माला पहना कर देवता की तरफ पूजा करने लगते हैं  और हारने पर उनके पुतले बनाकर जलाते हैं, खिलाडियों को घरों पर पत्थर बरसाते हैं। बेहतर हो कि यदि  हम पहले ही उन्हें इतना सर ना चढ़ायें ताकि हार जाने पर  हार का दुख जरा कम हो।

आह इण्डिया-वाह इण्डिया।


टैक्नोराती टैग्स:
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10 Responses to “आह क्रिकेट- वाह क्रिकेट”

  1. भाई ईपण्डत जी
    ये आपके बनाये टेक्नोराती के टैग लगाते ही फोण्ट छोटे क्यों हो गये? अब उपाय बताओ।

  2. नाहर भाई बिलकुल सही कहा आपने ! भारतीय मीडिया और आम जनमानस रातों रात अपनी राय बदलने में जरा भी देर नहीं लगाते !

  3. उन्मुक्त्त भाई साहब के इस चिट्ठे पर दिये HTML Code से फोंट साईज तो बड़ी हो गई पर पहले छॊटे क्यों हुए थे समझ में नहीं आया।

  4. ये तो होना ही था। कल हारते नहीं तो आज इत्ते बड़े अंतर से कैसे जीतते!

  5. आप बिल्कुल सही कह रहे हैं । भारत का मीडिया और लोग ज़रा भी धैर्य नही दिखाते । अभी देखिये आगे श्रीलंका वाले मैच मे क्या होता है ।

  6. Shrish said

    नाहर भाई मैंने भी अपने चिट्ठे पर लगाए पर मुझे तो ऐसी कोई दिक्कत नहीं हुई। इसका फॉन्ट से कोई लेना देना नहीं।

    अपन सही हैं जीते तो अच्छा है, हारे तो हम कहेंगे की ये तो होना ही था। वैसे टीम इंडिया की पिछली हरकतों को देखते हुए मुझे कोई उम्मीद न थी, न है। जब तैयारी करने का समय था ये लोग कुश्ती लड़ने में लगे थे।

  7. Amit said

    आपके फ़ांट का आकार छोटा होने का कारण टैग हो सकते हैं जो कि पोस्ट के आरम्भ और अंत में लगे हुए हैं। उनको और फ़ोन्ट टैग को हटा के देखें, सब पहले सा सही दिखेगा

  8. मीडिया की अपनी राय कहाँ होती है, बिन पेन्दे के लोटे हैं.

  9. sanjay bhai ye sab economics ka chhakar hai. Jis baat se $$$$ milta hai bas uski ka gyan banchne lagte hain.

  10. Vinay said

    kya yaar kya likha hai JORDAR!!

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