॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

ग्राहकों को परेशान करने का बैंको का नया तरीका

Posted by सागर नाहर on 12, अक्टूबर 2007

मेरे साईबर कॉफे में  जेरॉक्स  करने की भी सुविधा है। पिछले   दो साल  से  मैं देख रहा हूँ कि बैंक वाले  किसी ग्राहक से नया खाता खुलवाते समय PAN कार्ड की  फोटो  कॉपी मंगवाते हैं, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। PAN  कार्ड की प्रति  बैंक के अलावा  RTO आदि कई सरकारी दफ्तर वाले भी मंगवाते हैं।

पिछले दिनों एक वृद्ध सज्जन को  बैंक वालों ने सिर्फ इस वजह से  वापस भेज दिया क्यों कि उन्होने कार्ड के पिछले हिस्से  की फोटो कॉपी नहीं करवाई।  मुझे आश्चर्य होता है  कि सरकारी महकमे वाले तो अपने ग्राहकों को परेशान करने के लिये बदनाम  है परन्तु जाने माने देशी और विदेशी बैंक वाले भी इस छोटी सी बात के लिये ग्राहक को वापस  भेजते हैं  जाईये और PAN  कार्ड के पिछले हिस्से की फोटो कॉपी भी लेकर आईये। 

पैन कार्ड के  पिछले हिस्से के कॉपी की बैंक को कोई जरूरत नहीं होती  क्यों कि हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि PAN  कार्ड के पिछले हिस्से पर ग्राहक के बारे में कोई जानकारी नहीं होती, तो फिर क्यों  ग्राहकों को परेशान किया जाता है?  आप भी देखिये पैन कार्ड के पीछे क्या सूचना लिखी है।

Pan-Back

कई बार ग्राहक के साथ खाता खोलने या नया क्रेडिट कार्ड देने के लिये  घर आने वाले प्रतिनिधी भी जेरॉक्स करवाने साथ आते  तब  अगर धारक के पास पहले से कोई क्रेडिट कार्ड हो तो  उसकी भी जेरॉक्स मांगते हैं। उस समय उन प्रतिनिधियों की यही कोशिश रहती है कि  क्रेडिट कार्ड के पिछले हिस्से  की जेरॉक्स भी  करवायें। जो ग्राहक इस बात को जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड के पिछले हिस्से की कॉपी देना उन्हें किस मुसीबत में डाल सकती है वे तो  कॉपी नहीं देते या अगर दे भी देते हैं तो उन पर  लिखे नंबरों को पेन से काट देने के बाद।  दुर्भाग्य से अधिकांश ग्राहकों को इस बात का पता नहीं होता, और वह  नंबर काटे बिना जेरॉक्स दे देते  हैं।

मैं कई बार ग्राहकों को इस बात के लिये समझाता हूँ तब साथ में  प्रतिनिधियों का चेहरा देखने लायक होता है। ऐसा लगता है मानों उनका बस चले तो मुझे पीट भी दें। 🙂

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9 Responses to “ग्राहकों को परेशान करने का बैंको का नया तरीका”

  1. पीटे की बचे हुए है?

    यह बे-सिर पैर की खानापूर्ति है बस.

  2. Shastri JC Philip said

    प्रिय सागर, इस लेख के लिये आभार. इस तरह समाज में होने वाले शोषणपरक व्यवहार के बारे में नियमित रूप से लिखते रहें, बहुत लोगों का भला होगा — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है

  3. Shastri JC Philip said

    मैं यह लिखना भूल गया था कि यदि फिरंगी, हिन्दुस्तान के लुटेरे, ऐसा करते तो कोई ताज्जुब न होता. वे चले गये लेकिन अपनी मनोवृत्ति यहां छूड गये

  4. परेशान करने के बस मौके ढ़ूँढ़ते है.

    आप तो बच कर ही चलो.कही. पी….?? 🙂

  5. हे हे, आपने हँसा भी दिया और साथ में सावधान भी कर दिया। धन्यवाद

  6. सागर भाई, चाहे वे विदेशी बैंक हों अथवा राष्ट्रीयकृत भारतीय बैंक। मानसिकता तो बहुतों की वही लालफीताशाही की ही है न!

  7. सागर जी , आपने किस पते पर पत्र लिखा जो मुझे नहीं मिला ।शायद याहू पर लिखा होगा, उसे मैं कम ही खोलती हूँ । मैं तो स्वयं थोड़ा सा खिन्न या कहिये आहत थी कि आपके शहर में आने पर आपने याद तक न किया, जबकि सृजन जी से बात हो चुकी थी । गलती मेरी भी है कि मैंने स्वयं सम्पर्क नहीं किया , किन्तु मैं स्वयं को किसी पर थोपना नहीं चाहती थी । खैर , बिटिया वहाँ है तो आती ही रहूँगी ।
    अगली बार पहले ही बता दूँगी । कृपया मुझे जी मेल पर ही लिखें । हाँ , जरा कम गुस्से वाली फोटो लगा लीजिये !
    घुघूती बासूती
    ghughutibasuti@gmail.com

  8. धन्‍यवाद, आगाह करने के लिए। कई बार हम अनजाने में उनकी फिजूल की माँगों को आवश्‍यक मान कर परेशान होते हैं, जिनसे हमें बाद में नुकसान भी हो सकता है। – आनंद

  9. जिन्दा लोगों की तलाश! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!

    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    ============

    उक्त शीर्षक पढकर अटपटा जरूर लग रहा होगा, लेकिन सच में इस देश को कुछ जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है।

    आग्रह है कि बूंद से सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो निश्चय ही विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हम ऐसे कुछ जिन्दा लोगों की तलाश में हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    अतः हमें समझना होगा कि आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-ष्भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थानष् (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति स्वेच्छा से इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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