॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

एक चिट्ठे की मौत और पुनर्जन्म

Posted by सागर नाहर on 14, अक्टूबर 2007

गुजराती में एक मजेदा कहावत है ” वखाणी खिचड़ी दाढ़े वळगी” मतलब आपने जिस खिचड़ी की ज्यादा तारीफ करी  वही दाँतों में चिपकने लगी।  मेरे साथ कल ऐसा ही हुआ परसों एक चिट्ठे पर  ( नाम याद नहीं आ  रहा) जिसमें लिखा था कि टिप्पणियों का भी एग्रीग्रेटर होना चाहिये, और उसी में वर्डप्रेस.कॉम की कुछ तारीफ की थी। चूंकि मैं भी वर्डप्रेस.कॉम का प्रशंषक हूँ; बहती गंगा में हाथ धोते हुए  इसकी  थोड़ी टिप्पणी के रुप में तारीफ कर दी।

कल सुबह  आकर जैसे ही मैने अपना चिट्ठा  देखना चाहा तो संदेश मिला                   

 “archived or suspended for a violation of our Terms of Service.” 

मुझे  याद नहीं आता कि मैने  किसी नियम का उल्लंघन किया हो। हो सकता है तकनीकी लेख  में लिंक देने के मामले में  अन्जाने में कोई भूल हुई हो, परन्तु बिना किसी सूचना के इस तरह अचानक  चिट्ठे को हटा देना कुछ समझ में नहीं आया !!

चिट्ठे को खोला नहीं जा सकता था, साथ ही जब मेरा खाता लोगिन करने की कोशिश की तो संदेश मिला कि  आपका खाता निरस्त कर दिया गया है, जब सहायता वाले पेज पर जा कर देखा तो संदेश मिला कि शनिवार और रविवार  को सहायता बंद रहेगी। 

सब तरफ से   रास्ते बंद हो जाने पर में लगभग निराश सा हो गया था क्यों कि  मेरे चिट्ठे पर 152  लेख और  लगभग 1300 टिप्प्णियाँ थी। भले ही  मेरे चिट्ठे पर ऐसी कोई  साहित्यिक   रचना  नहीं थी, या ऐसी कोई  रचना नहीं थी जिसके मिट जाने से कोई बड़ा नुकसान हो  जाता परन्तु जो कुछ भी थी; जो मेरी पिछले डेढ़ साल की मेहनत थी, सब बर्बाद  हो गई थी।

ऐसे में  संजय बैंगानी जी का मेल  मिला  कि क्या बात है आपका चिट्ठा …. मैने उनसे सहायता की गुहार की तो  संजय और पंकज बैंगानीजी ने एक बार फिर मेरी मदद की। पहले तो मेरी समस्या को वर्डप्रेस के फोरम  में  रखा, और बाद में  सपोर्ट टीम को मेल भी किया। और परिणाम स्वरूप यह चिट्ठा एक बार फिर आपके सामने है।

मैं  संजय  और पंकज बैंगानी जी  को इस चिट्ठे के माध्यम से  धन्यवाद   देना चाहूंगा कि उन्होने  मेरी इतनी सहायता की।

अभी एक दो दिन पहले ही मैने  अपने चिट्ठे का बेकअप कैसे लें? विषय पर अलग अलग तीन चार सोफ्टवेर इन्स्टाल कर उन्हें आजमाया, चिट्ठे का बेकअप लिया भी परन्तु बहुत झंझट वाला काम होने की वजह से  उसे बाद में  मिटा दिया, मुझे क्या पता था कि  यह फाइल कल को मुझे ही जरूरत पड़ सकती है!! 😦

खैर अब लगता है  हमें अपने चिट्ठे का  सरंक्षित रखने का कोई ना कोई उपाय ढूंढना ही होगा।

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15 Responses to “एक चिट्ठे की मौत और पुनर्जन्म”

  1. अब समझ आया कि आपका चिट्ठा खुल क्यों नहीं रहा था । मैंने अपने चिट्ठे के साथ साथ आपके चिट्ठे पर भी मुझे आपकी मेल न मिलने के बारे में बताया था । सोचा था आपका कुछ उत्तर मिलेगा इसलिये आपका चिट्ठा खोलने का कई बार प्रयास किया ।
    घुघूती बासूती

  2. चिठ्ठे का बैक-अप एक महत्वपूर्ण विचार उभर कर आ रहा है सामने। और चिठ्ठा ही क्यों – बहुत कुछ गूगल-याहू के माध्यम से नेट पर शृजित हो रहा है। उस सब का बैक-अप चाहिये।
    आप जैसे तकनीकी जानकार तो उस विषय पर सार्थक रूप से सोच भी सकते हैं। शेष का क्या होगा?

  3. kakesh said

    जी वर्डप्रेस वाले कहते हैं कि यह एक बग था. आपकी किसी टिपप्णी के कारण ऎसा नहीं हुआ. चलिये नये चिट्ठे की बधाई.

  4. अगर अपने ब्लोग पर ” कापी राइट सुरक्षित ” लिखेगे तो आप उन ब्लोग लिखने वालो को आगाह करेगे जो केवल शोकिया या अज्ञानता से कापी कर रहें हैं ।

  5. खोया-पाया मे पाने की बधाई!!

    पोस्ट का बैक-अप तो मै हर पोस्ट के साथ एक मेल आई डी मे लेता ही जा रहा हूं पर टिप्पणियों का कैसे लिया जाए यह समझ मे नही आया!!

  6. बधाई.

    आपका चिट्ठा नहीं खुल रहा था तो हमने सोचा कि कहीं इस बार टंकी पर बिना बताये तो नहीं चढ़कर छलांग लगा दी-थोड़ी निश्चिंतता बस ये थी कि अभी बीते समय में सब शांत चल रहा था तो ऐसा नहीं हुआ होगा. मेरा अनुमान ठीक ही निकला कि ऐसा कुछ नहीं हुआ. 🙂

    शुभकामनायें.

  7. PIYUSH MEHTA said

    श्री सागरजी,
    आप को विदीत है, की मेरे ब्लोग का भी अपनी तसवीर अपलोड करते समय ऐसा ही हाल हुआ है । क्या संजयजी की तरह आप मेरी मदद करेंगे ?

  8. पुनर्जन्म मुबारक हो सागरजी ।

  9. 🙂 बधाई.

  10. कमाल है यह कैसे सोच लिया की इस चिट्ठे के मिट जाने से नुकसान नहीं होता?

    क्या पैचिदा लेखन ही महत्वपूर्ण होता है.

  11. अंत भला तो सब भला 🙂

  12. रवि said

    चलिए, नियमित बैकअप लेते रहने के लिए एक और सीख. टिप्पणियों समेत सम्पूर्ण साइट का बैकअप लेने के लिए एचटीट्रैक नाम का सॉफ्टवेय आजमा देखें.

  13. बहुत बुरा हुआ खैर शुक्र है अब सब सही है।

    ब्लॉगर कई बार कुछ स्पैम ब्लॉगों (splogs) को बैन कर देता है, इस चक्कर में कई बार कुछ निर्दोष ब्लॉग भी आ जाते हैं। शायद वर्डप्रैस.कॉम ने भी कुछ ऐसा ही काम शुरु किया हो।

    वर्डप्रैस में तो बैकअप की सुविधा होती है, क्या वर्डप्रैस.कॉम में नहीं है?

  14. बहुत-२ बधाई ! अंत भला तो सब भला 🙂

  15. अनिता कुमार said

    आज मैं आप के चिठ्ठे पर पहली बार आयी हूँ और आते ही इतनी महत्त्वपूर्ण बात पता चली, ब्लोगिंग में नयी होने के कारण मैने ऐसा हो सकता है कभी सोचा ही नहीं । अगर कोई हल मिले तो प्लीज मुझसे भी शेयर कीजिएगा, धन्यवाद्। कहना न होगा कि अब यहाँ आती रहूँगी अपने दिमाग की घंटी बजवाते रहने के लिए…:)

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