॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

हमहूँ छप गईले अखबार मां

Posted by सागर नाहर on 25, अक्टूबर 2007

अर्रे उ लोग बड़ा बुड़बक होला जे कि अखबार नाही पढ़ेला, पढ़ले रहित त हमरो नऊवा देखले रहित नू… काहे कि हमहु छपल बानी, बधाई देले रहित नु 😀

अभी हमहूँ ई हवा मे थोड़ी ना बकबकिया रहल बानी, बिसवास नईखे होत त देखी लई पोस्टवा, जवन की हैदरबाद के अखबरवा “हिन्दी मिलाप” के 24 अक्तुबर के अंक्वा मे छऽऊआ पनवा पर अधवा पन्ना मे छपल रहे…. ई ला भाई सबुत के तौर पर।

पोस्ट स्कैन पढ़े मे बा कौनु परेशानी? त हैईजा चटकाई देबेके बा, लौके लागी बड़े बड़े अछरिया

Blog-likhe

Blog-likhe-2

( अब भी नहीं दिख रहा चलिये blog-artical.doc यहां चटका लगाईये।)

अर्रे भाई… कही से जले के बू आवतबा… काहे, आपन नऊवा ना मिलल हा.. ए खाती क्षमा चाहीं, ऊ का बाती बा की, लेखवा मे शब्दन के सीमा रहल हा, अईसन हालत मे कुल्हीलो के नमवा डालल बहूत ही मुश्किल के कामवा रहला हा… बाकि हमरा केहू से कौनु दुश्मनी थोड़ी ना बाटे… सबे लोग दोस्त, यार, भाई लोग ह… ए बार ना सही अगिला बार नमवा डालिये देबी।

ई लेखवा डॉ गरिमा तिवारी से लिखवा लेले बानी, एसे कौनु अगर बा परेशानी, तो उनुके सर फोड़े के चलल जाई, काहे कि हमरे त भोजपुरिया, से कौनु नाता नाही बाटे।अरू त अरू, ई बतिया भी उहे अपने से लिखिये देली हा, त देख लोग, एमे हमरे कौनु गलती नईखे, जवन बतिया पुछे के होखे, डॉ से पूछी लिहल जाऊ, अरू हमरा के, अखबार मे छप जाईला के ईनाम, माने कि बधाई दिहल जाऊ।

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35 Responses to “हमहूँ छप गईले अखबार मां”

  1. badhai ho!

  2. badhai ho aapko

  3. kakesh said

    बधैय्या हो..ई सब तो ठीक बा पर हमार नमुवा खा गयली.. ठीक बा हमहूँ ना लिखबौ करी….

  4. आखिर में जाकर राज खुला की आपकी तबियत ठीक है और यह गरिमा जी ने भोजपुरी में लिखा है वरना तो हम समझे…..

    बहुत बधाई जी-आप तो छापे के लेखक हो गये. वाह!!

    ऐसे ही छपते नाम कमाते रहिये. अनेकों शुभकामनायें.

  5. बहुत बहुत बधाई हो भईया… ऐसे ही और लिखते रहिये और जल्दी से अपनी किताब भी छपवा लिजिये 🙂

  6. वाह जी वाह छपे ही नहीं खुब छपे. बधाई टीका लो.

    और भैये ई साथ में का लिखा है समझ में नहीं आवत है. अगली दफा हम जैसन लोगो का खयाल करना भाई.

  7. वाह जी, बधाई हो।

    यह तो पता ही नहीं था कि गरिमा जी भोजपुरी वाली हैं। 🙂

  8. masijeevi said

    वाह वाह हमारा तो मिल गया…हे दुनियावालो सुनो जाने माने ब्‍लॉगर ने हमें जाने मानों में शामिल किया…शुक्रिया :))

  9. बधाई हो!!
    मस्त लेख है!!

  10. pankaj said

    हमारी बधाई भी टिका लिजीए. 🙂 और भोजपुरी तो हमको आती नही तो समझ नही पाए कि का लिखा है.

    🙂

    बाकि बढिया. खूब छपिए. छपते रहिए यही दुआ है.

  11. नाहर जी, बहुत बहुत बधाई !ऐसे ही छपते रहे…और ब्लोगरों का नाम रोशन करते रहे।एक बार फिर से बधाई!

  12. पहिले त हम चौंकि गइनी कि सागर भाई एतना खबसूरत भोजपुरी कइसै लिखत हवै, फिर आखिर में राज खुलल कि ई त गरिमा जी कै कमाल हवै। पहिले त कहय वाला रहनी कि रउवा त जबरदस्त भोजपुरी जानी ला…(वैसे लेख की भाषा में अवधी का भी मेल है और मैं अवधी इलाके का हूं, भोजपुरी मेरी सीखी हुई भाषा है)
    सागर भाई बधाई हो, ब्लॉगिंग जगत के गुर पर लिखे और छपे इस लेख के लिए।

  13. 🙂 🙂 🙂

  14. हमरो बधाई स्‍वीकार करी सागर बाबू। बडा निमन लागल।

  15. सागर जी आप छ्प गये, ही ही ही, नहीं जी आप का नाम छ्प गया, बहुत अच्छा लगा देख कर, बहुत बहुत बधाई। लेकिन सागर जी हम लेख नहीं पढ़ पाये, जरा हम जैसे मोटे चश्मे वालो का भी ध्यान रखिए और स्केन्ड छापे को थोड़ा डार्क करने का तरीका बताइए, हमें भी आप का लेख पढ़ना है। गरिमा जी का आभार कि हमें इत्ती अच्छी भोजपुरिया पढ़ने को मिली

  16. bhuvnesh said

    badhai guroooo 🙂

  17. बधाई हो बधाई,

  18. Aditya said

    I really liked ur post, thanx for sharing. Keep writing. I discovered a good site for bloggers check out this http://www.blogadda.com, you can submit your blog there, you can get more auidence.

  19. aakke email id wale link par error a raha hai isliye apko jawab dene ke liye phir aapki post par hajir hoo. Cartoons ki prashansha ke liye dhanyavad. Aur jaisa ki aapne puchha hai me ye cartoon pahle hath se draw karta hoo phir scaaning karne ke baad photoshope me colour karta hoo.

  20. नाहर भाई, बधाई छपने पर !
    शुभ कामना सहित,
    स स्नेह,
    – लावण्या

  21. RC Mishra said

    ಬದಹಅಎಎ ಎವಂ ಸಹುಬಹಕಅಮನಅಯೆಂ|

  22. रवि said

    परिपूर्ण विस्तृत लेख लिखा है आपने.

    स्नैप प्लगइन हटा लें तो अच्छा. यह पढ़ने में बहुत अड़चनें पैदा करता है.

  23. सागर भाई आपको इस प्रयास के लिये बहुत बहुत बधाई।

  24. उन्मुक्त said

    बधाई

  25. कितनी ज्ञान की बात कही है रा च मिश्र जी अपनी टिप्पणी में. आनन्द आ गया. 🙂

  26. @ कीर्तेश भाई, आशीष भाई, सृजन शिल्पी जी, संजीत जी, परमजीत बाली जी, संजीव सिन्हा जी, अनिता जी, भुवनेशजी, प्रमेन्द्रजी, लावण्या जी, जगदीशजी और उन्मुक्त जी

    बधाई देने के लिये आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद।

  27. @ काकेशजी
    यह लेख बहुत पहले लिख दिया था और हिन्दी मिलाप द्वारा आयोजित दीपावली विशेषांक प्रतियोगिता में प्रविष्टी भेजने के अन्तिम दिन मुझे पता चला और जल्दबाजी में लिख कर भेज दिया था, अत: कई नाम उसमें जोड़ने रह गये हैं। उसमें एक नाम आपका भी है।
    वैसे आप हमारे आल टाइम फेवरेट लेखकों में से एक हैं।
    क्षमा पहले ही मांग ली है एक बार और मांग लेते हैं। टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

    @ समीरलालजी
    धन्यवाद, और हां अंग्रेजी में क्या कहते हैं आप हमें अन्डर स्टीमेट ना करें अब हम अगला चिट्ठा कन्नड़ में लिखेंगे, भले ही हमें ना आती हो। 🙂

    @ संजय भाई और पंकज भाई
    धन्यवाद भाई , वईसे ई भाषा आती तो हमको भी नाहीं है पर लिख दिया, आगे से आपकी सलाह को ध्यान में रखते हुए अगला चिट्ठा तमिल या तेलुगु में लिखेंगे। 🙂

    @ अनिल जी
    सराहना के लिये धन्यवाद। हम इन गरिमाजी को तेलुगु सिखाने चले थे( हमें नहीं आती फिर भी)ये तो तेलुगु नहीं सीख पाई हम जरूर थोड़ी थोड़ी भोजपुरी समझने लगे हैं। 🙂

  28. @ गरिमा
    धन्यवाद, आपने मेरी कई बार मदद की है, पर किताब छपवाने के बारे में आप कुछ ज्यादा दूर की नहीं सोच रही?

  29. @ रवि भाई साहब
    वर्डप्रेस.कॉम में यह एक सुविधा बड़ी तकलीफ देती है, परन्तु इसको हटाने का तरीका मुझे समझ में नहीं आया। वैसे जब हम इमेज पर माऊस रखते हैं तब जो स्नैपशॉट की विन्डो खुलती है उसमें सब्से उपर कोने पर * की तरह का एक चिन्ह होता है, उस पर क्लिक करने पर स्नैपशॉट बंद करने का एक ओप्शन होता है। उस पर क्लिक कर हम इसे बंद कर सकते हैं।

  30. @ रामचन्द्र जी
    आपकी इस टिप्पणी को समझने के लिये हम नगरी -नगरी, द्वारे द्वारे बहुत भटके पर हमें समझ में नहीं आया और लीजिये समीरलालजी को सब समझ में आ गया, काश पहले ही समीरलालजी को पूछ लिये होते 🙂
    इसे कहते हैं काँख में छोरा और………

  31. SHUAIB said

    bahut bahut badhai ho nahar bhai

  32. बहुत-बहुत बधाई हो। शुरूआत जब हो ही चुकी है तो किताब भी छपेगी।

  33. […] पिछली पोस्ट : हमहूँ छप गईले अखबार मां […]

  34. इतनी बधाइयां बंट चुकी हैं यहां..फिर भी हमारा एक और बधाई देना बनता है…आखिर आपने नाम छपवाया है हमारा 🙂
    बधाई..

    और हाँ, इस बार मेवाडी में लिखें।

  35. […] मजेदार वीडियो हमहूँ छप गईले अखबार मांमित्र झूठ मूठ ही कह दिया होता कि […]

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