॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

मुशर्रफ हों या बुश: ब्लॉग में है सब फुस्स!

Posted by सागर नाहर पर 17, नवम्बर 2007

आज दिनांक 17.11.2007 के  डेली हिन्दी मिलाप   के सम्पादकीय पृष्ठ पर डॉ एम सी छाबड़ा का ब्लॉग पर लिखा हुआ लेख।

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5 Responses to “मुशर्रफ हों या बुश: ब्लॉग में है सब फुस्स!”

  1. एक बढिया जानकारी उपल्ब्ध कराने के लिए धन्यवाद।

  2. यह लोकतंत्र है. एक मुक्त साधन का मुक्तरूप से उपयोग.

  3. Abhi to shuruat hai aage ye Blogs ki duniya na jane kaun -kaunse rang dikhayegi ….. Dekhte jaiye.

  4. बहुत सुन्दर चित्र व सोचने को बहुत कुछ दे दिया । आपको पता चले तो हमें भी बताइयेगा ।
    घुघूती बासूती

  5. उन्मुक्त said

    मेरे विवार में, आने वाले समय में चिट्ठे अभिव्यक्ति के सबसे शसक्त माध्यम होंगे।

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