॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

अपने चिट्ठे का लोगो(ब्लॉग मार्क)बनायें

Posted by सागर नाहर on 4, दिसम्बर 2007

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आपको एक चिट्ठे को लिखने में कितना समय लगता है? एक घंटा या दो घंटे.. बस! क्या आप विश्‍वास कर सकते हैं कि इस छोटी सी पोस्ट को लिखने से पहले की  पूर्व तैयारी और प्रयोग करने में मुझे कम से कम सात दिन लगे होंगे। 

सबसे पहले इन तीन चित्रों को ध्यान से देखें, पहले चित्र में मेरी  गीतों की महफिल  के एड्रेस बार का चित्र है, इसमें महफिल के पते के पहले नटराज का छोटा सा  चित्र बना है, दूसरे चित्र में जीमेल का लिफाफा है और तीसरे चित्र में ईस्निप का प्रतीक चिन्ह बना हुआ है। इसे फेविकोन (Favicon) कहते हैं..

Favicon-1

Favicon2

Favicon-3

मैं बहुत दिनों से सोच रहा था कि क्यों ना अपने चिट्ठे के पते के आगे भी इस तरह का प्रतीक चिन्ह लगाया जाये। बहुत दिनों की मेहनत और अमित गुप्ता जी  का कई बार दिमाग खाने के बाद इसका पता चला, लेकिन  यह भी कुछ लम्बा प्रोसेसिंग था।

इसमें सबसे पहले एक 16×16 का चित्र बना कर .ico  फोरमेट में सेव करने के बाद किसी होस्ट पर सेव कर वहाँ से लिंक लेना और कोड बना कर अप्ने चिट्ठे में  जोड़ना बहुत लम्बा और मुझ जैसे  अल्प अंग्रेजी ज्ञानी के लिये बहुत ही टेढ़ी खीर साबित हुआ। मुझे लगा कि जब मैं इतने दिनों से  इन HTML कोड के साथ प्रयोग कर रहा हूँ फिर भी मुझसे नहीं हुआ  तो एक नये चिट्ठाकार के लिये तो यह कितना मुश्किल होगा।

आखिरकार  इतने दिनों की मेहनत रंग लाई और मुझे बहुत ही आसान तरीका मिल गया, जिसमें एकदम नया और अनाड़ी ब्लॉगर भी अपने आप अपने फोटो या किसी चिन्ह को  अपने चिट्ठे के पते के आगे जोड़ सकता है।

रात के दस बज चुके हैं और दिन भर इस कोड के साथ मगजमारी करने के बाद बुरी तरह थक चुका हूँ। फेविकोन लगाने का  तरीका अगली पोस्ट में…..  🙂

 

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8 Responses to “अपने चिट्ठे का लोगो(ब्लॉग मार्क)बनायें”

  1. अच्छी जानकारी। बकिया कहे तो हम बताए देते है। (आप चाहें तो इस टिप्पणी को आप अगली पोस्ट के लिए बचा के रखें)

    फैवीकॉन बनाने के लिए बस आप अपने ब्लॉग के लिए एक तस्वीर का इंतजाम करिए, और टहलते हुए इस साइट पर चले जाइए। अपनी तस्वीर इसको दीजिए, और फैवीकॉन तैयार लीजिए। जो फाइल आपको मिल उसको अपने ब्लॉग पर डालिए, अपने ब्लॉग के HEAD टैग में, ये वाला कोड चिपका दीजिए।

    अगर ऊपर कोड ना दिखे तो यहाँ से कापी करें। फैवीकॉन से सम्बंधित एक अच्छा लेख पढने को मिला, आप भी देखिए।
    @ जीतू भाई साहब
    यह सारे नुस्खे मैने आजमा लिये, सबसे बड़ी परेशानी है .ico फाईल को किसी जगह अपलोड करने की, फोटो बकेट जैसे मुफ्त के कई स्थल इस फोरमेट की फाईल को अपनी साईट पर लोड नहीं करते।
    मेरा नुस्खा शायद इन सबसे भी आसान होगा, तब तक इन्तजार करिये 🙂

  2. सागरजी,
    अभी आप आराम कीजिये, हमें आपकी अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा ।

    नीरज,

    बहुत बहुत धन्यवाद नीरज भाई

  3. paryanaad said

    बेकार मगजमारी की सागर भाई. इस ठिकाने पर जाएं और पल भर में बिना किसी मगजमारी के फेविकॉन बनाएं:
    http://tools.dynamicdrive.com/favicon/
    मैने बना कर देखा था, चट बन जाता है.

    @ पर्यानाद जी
    नहीं अगर बेकार मगजमारी की होती तो आपका सुझाव कैसे पता चलता? ना मैं पोस्ट लिखता ना आप टिप्पणी करते 😉
    और हाँ यह भी तो संभव है कि मेरी ट्रिक आपकी ट्रिक से ज्यादा आसान हो!!

  4. उन्मुक्त said

    मैं भी नीरज जी से सहमत हूं।
    धन्यवाद उन्मुक्त भाई साहब 🙂

  5. yunus said

    सागर भाई मीडिया वाले इसे टीज़र कहते हैं । बचपन में चूरन की पुडि़या चखाई जाती थी फिर लगता था कि चूरन का सारा डिब्‍बा ही हमारे कब्‍जे में आ जाना चाहिए । आपने झलक दिखा कर दीवाना कर दिया । अब हम इंतजार कर रहे हैं आपकी ट्रिक का ।
    @ यूनुस भाई
    आपने वो चुरन की पुड़िया दिला कर ठीक नहीं किया, याद कर ही मुँह में पानी आने लगा है, काश बड़े नहीं हुए होते.. आज चूरने चाट रहे होते। .. और हाँ हम बचपन में अमचूर और बेर की गुठलियों को कूट पीस कर बहुत सारे मसाले मिला कर खुद ही चूरन बनाया करते थे। क्या दिने थे वे भी… ट्रिक बहुत जल्दी आपके सामने प्रस्तुत होने वाली है।

  6. भाई कोई नाहर जी को अगवा कर ४-५ दिन के लिये हमारे घर भेज सकता है? सारी ट्रिकें एक साथ पता करनी हैं। 🙂
    वैसे नाहर जी खुद तशरीफ़ ले आयें तो स्वागत!

    @ ज्ञान जी भाई साहब
    बचपन में मजाक में पापा मम्मी कहते थे इसे कोई अपहरण कर ले जाये तो हम उसे वापस ना भेजने के लिये पैसे देने को तैयार हैं.. 🙂 😉
    कभी ना कभी आपके दर्शन लाभ का सौभाग्य जरूर प्राप्त होगा, उम्मीद है।

  7. आपने हिंट दिया और हमने .png फाइल बना कर आपने ब्लॉग पर ब्लॉग मार्क ठेल दिया है – “ज्ञ” का!
    अब हमें कितने नम्बर देंगे? और हमारे पास प्रोग्रामिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं है!

  8. balkishan said

    बहुत प्रयास किया. पोस्ट और टिप्पणियों मे बताये सभी तरीके आजमाये नही कर पाया. मेरे ज्ञान की भी बलिहारी है. लेकिन अब लगता है ज्ञान भइया के पास जाना पड़ेगा.

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