॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

वे कितने बेईमान हैं?

Posted by सागर नाहर on 2, जनवरी 2008

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6 Responses to “वे कितने बेईमान हैं?”

  1. सटीक!!

  2. Amit said

    सही। 😀

  3. यूँ तो मुझे जयादा बोलने की आदत नहीं… मगर इस पर बोलूँ तो क्या बोलूँ.. काश हमारे साथ साथ “सम्बन्धित” कर्मचारी भी पडें.. तो उनकी प्रतिक्रिया देखने लायक हॊगी ॥

  4. neeraj said

    भाई नाहर जी बहुत करारा व्यंग….बहुत बढ़िया. वाह.
    नीरज

  5. बढ़िया है ।
    घुघूती बासूती

  6. garima said

    😛

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