॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

मनोबल मजबूत हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं

Posted by सागर नाहर on 14, जनवरी 2008

मैने अपने बचपन में बहुत चोरियां की .. पता है किसकी?

नमक की डलियों की!!!

गाँव में किराने की दुकानों के बाहर नमक की बोरियाँ पड़ी रहती थी। स्कूल आते जाते नियम से एकाद मुट्ठी नमक चुरा कर छुप छुप कर बरसों खाया। इस तरह नमक खाने की आदत इतनी खराब पड़ी कि बाद में खाने में उपर से नमक बुरका कर खाने लगा। सब्जी तो ठीक फुलके (रोटी) पर में उपर से नमक डाल कर खाने की लत लग गई।

आदत ऐसी बुरी कि सब्जी को बिना चखे उपर से नमक बुरका कर खाने की आदत से पापा-मम्मीजी, बहनें और पत्नी जी टोक टोक कर थक गये। जब चैतन्य एक साल के होंगे और बराबर बोलना भी नहीं जानते थे; मैं खाना खाने घर जाता तो साहबजादे मेरे लिये उनकी मम्मी के थाली लाने से पहले नमक का डिब्बा लेकर आ जाते। इस आदत की वजह से कई जगह मजाक उड़ाया जाता, पर लगी आदत.. मजबूरी थी, सहन करना पड़ता।

पिछले साल आज ही के दिन मैं खाना खाने बैठा और रोटी का एक कौर खाया कि अचानक मेरे मुंह से निकल गया आज आटे में नमक शायद ज्यादा पड़ गया है। श्रीमती जी हंसती हुई बोली उपर से नमक घोल घोल कर खाने वालों को नमक कब से ज्यादा लगने लगा?

मुझे यों लगा जैसे मेरा उपहास उड़ाया जा रहा है और उसी समय मैने एक निर्णय कर लिया कि आज से खाने में उपर से नमक डालना बंद”! मैं नियम पर इतना दृढ़ रहा कि वह दिन और आज का दिन, खाने में कभी उपर से नमक नहीं डाला, जैसा खाना आ गया वैसा खा लिया। ज्यादा नमक या कम नमक! सब चलने लगा।

एकदिन सचमुच सब्जी में नमक कम था और श्रीमती जी को मेरे आधा खाना खा लेने के बाद पता चला तो वे मेरी सब्जी में नमक डालने लगी अचानक मेरा हाथ नमक के डिब्बे पर चला और बेचारा नमक का डिब्बा …. 😦

इसी तरह कुछ सालों पहले मुझे चाय पीने की बहुत बुरी लत थी, जिस दिन आखिरी चाय पी उस दिन चाय के कप पीने का हिसाब था उन्तीसऽऽऽ कप!! दो दिन तक हाथ पाँव और सर में थोड़ा दर्द रहा, चौथे दिन से कुछ नहीं! ना सर दर्द ना बदन दर्द। उस बात को भी फरवरी में ग्यारह साल हो जायेंगे।

उन तीन दिनों में अपने मनोबल को बहुत मजबूत बनाना पड़ा, पहले लगता था कि बुरी आदतें छूटना आसान नहीं पर जब हिम्मत की तो कुछ भी मुश्किल नहीं रहा। अगर आप भी अपनी कोई बुरी आदत छोड़ना चाहते हों तो उस आदत को छोड़ने का निश्चय कर बस तीन दिन अपने आपको संभाल लीजिये , मेरा विश्वास है बाद में ज्यादा तकलीफ नहीं होगी।

मुझे अब भी दो बुरी आदतें है जिनमें से एक को मैं छोड़ना नहीं चाहता पर घर वाले छुड़वाने पर उतारू है..और वो है पढ़ना! मुझे खाते और सोते समय भी कुछ ना कुछ पढ़ने की आदत है। दूसरी आदत है अंगुलियाँ चटकाना, देखते हैं उसका नंबर कब आता है?

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30 Responses to “मनोबल मजबूत हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं”

  1. ह्म्म, उम्मीद है आपसे इस मामले में कुछ सीख ले सकूंगा!!
    बधाई!

  2. आपका यह लेख काफी कुछ सीख दे गया है, हो सकेगा ता अमल किया जायेगा।

  3. बधाई! पढने, लिखने और अनुभव बांटने की “बुरी” आदतें ना छोडें:)

  4. garima said

    सच कहा है भईया, मुझे भी एक बार चाय पीने की लत लग गयी थी, चाय ना पिया तो अजीब सा मन होने लगता, पर अब जो छोड़ा की अब तक नही पी… बस अडिग निश्चय करने की बात है, बाकी सब अपने आप हो जाता है 🙂

  5. yunus said

    भई आपकी और मेरी कुछ बुरी आदतें समान हैं । खाते और सोते समय पढ़ने की । नमक के मामले में अपन ज़रा ठीक हैं । पर ये सच है कि मनोबल हो तो आप कुछ भी कर सकते हैं । स्‍कूली जीवन में मनोबल के सहारे ही हमने चाय-कॉफी छोड़ी थी जो नौकरी में आने के बाद फिर से शुरू हो गयी । अभी छोड़ने का मन नहीं बनाया है पर जिस दिन बना लिया उस दिन ऑफिस कैन्‍टीन वाला बहुत पछतायेगा ।

  6. parulk said

    मनोबल मजबूत हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं…baat sacchi hai aur acchi bhii lagii

  7. उंगलियां चटकाने की आदत भी अच्छी नहीं है। लेकिन इसे भी छोड़ना आसान है, ऐसा मैं अनुभव से जानता हूं।

  8. मीनाक्षी जी की यह टिप्पणी गलती से मेरे टेस्ट ब्लॉग पर चली गई जिसे मैं यहाँ पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ।

    🙂 मैं आपसे सहमत हूँ ..अगर हम ठान लें तो हम आसानी से अपने आप पर काबू पा सकते हैं… पढ़ने की आदत तो आप अपने बेटे में भी डाल दें…उंगलियाँ चटकाना जब छोड़े तो ज़रूर ज़िक्र करिएगा.
    http://www.meenakshi-meenu.blogspot.com/

  9. mehhekk said

    hmmmm see reading is very very good habit.finger breaking that will be easy to get read off.this post is very very nice,insaan aadat se majboor hota hai.

  10. आदत छोड़्ना मुश्किल होता है लेकिन आप ने छोड़ी,इस के लिए बधाई।आप का लेख पढ कर अब हम भी अपनी कुछ बुरी आदतों पर काबू पानें की कोशिश करेगें।

  11. हमरा मनोबल तो वाकई डांवाडोल सा है. भोजन के समय एक हाथ में अखबार तो जरूर ही होता है. नहीं तो शायद भोजन कर ही न पाएं. अब आपसे कुछ प्रेरणा लेंगे.

  12. आप ने सही कहा सब मनोबल की बात है, नेट पर आने की लत मत छोड़िएगा, वो अच्छी लत है।

  13. जहाँ चाह वहाँ राह। खाने मे गुड को शामिल करिये और अभी तक जो नमक का दुषप्रभाव पड चुका उससे मुक्ति पाइये। नमक की अधिकता से या छोडने के बाद कुछ नयी समस्या हो तो बताये, उसके लिये भी कुछ उपाय खोजेंगे।

  14. tuitionindiacom said

    अरे पागल भारतीयों से क्रिकेट का अफीमी नशा तुम्हारी नस्ल को खराब कर रहा है खिलाडी बोर्ड खुब पैसा बना रहे है। कभी कपिल देव तो कभी शरद पवार हीरों हो जाते है तुम्हें ये मिडिया अफीम खिला रहा है। फैक दो ये क्रिकेट विरकेट अगर चाहते हो तुम्हारी जिंदगी में तुम्हारे बच्चों की जिंदगी में बदलाव आये तो तुरंत इस अफीम को फैंक दो

  15. Sagar ji hamesha ki tarah phir se yahi kahuga. ki aap jo bhi likhte hai dil se likhte hai aur bahut acha likhte hai. aapke lekh ko padhkar buri lato ko chodne ki koshish karuga….. Rohit

    New Post – Titanic : The hottest love has the coldest end

  16. सागरजी… जब किसी चीज की लत लगती हैं.. तब तो पता नहीं चलता… मगर जब उसे चोडने की बारी आती हैं.. तॊ.. नानी याद आती हैं.. सच में, आपका लेख प्रेरणात्मक हैं ।.. विषय को हमसे बाँटने के लिये शुक्रिया ॥

  17. Annapurna said

    सागर जी, क्या आपके लेख से वो कुछ सीख सकेंगें जिन्हें शराब और सिगरेट की लत है ?

    यहां तो वही सीख ले रहे है जो पहले से समझदार है।

  18. Nahar ji maine apne blog par blogroll banaya hai. aur kyoki mai aapke blog ka niymit mapthak hu isiliye maine aapke blog ko bhi add kiya hai. aap ek baar dekhe jarur.. dhanyawaad

  19. नेट पर
    आने की लत
    छा जाने की लत
    टिप्प्णियां पढ्ने
    की आदत
    तू छोड मत.

  20. मैने भी छोड़ दी, चॉकलेट खाने की लत, कुछ दिनो ऐसा लगा कि हर जगह सिर्फ चॉकलेट ही दिख रहे हैं, फिर मैने क्या किया कि चॉकलेट खरीद कर अपने पास रखा, और फिर हिम्मत की कि नही खाऊँगी, पहले दिन परेशानी हूई पर शाम तक रखा रह गया तो हिम्मत बढ़ गयी, अब बस इच्छा भी नही होती खाने की 🙂

  21. ऊपर से नमक की आदत तो मैंने भी छोड़ दी है, 🙂 पर भैया इन्दौरी हूँ इसलिए एक आदत अभी भी लगी हुई है, खाने की थाली में सेंव-नमकीन न हो तो खाना अधूरा लगता है 😦

  22. sharemind said

    A very nice and inspiring post ! i always wanted to work in hindi on internet but never found any good portal where we can proudly write read in hindi . Here i wanted to write in hindi but dont know how to type ? what i want to share here is habit of my smoking and drinking . I have quit these habit with the help of my willpower i was heavy and chain smoker and i used to drink regularly i was thinking to quit but it was hard task one day i waked up and thought i wont smoke today and i didn’t . I always knew if i would be able to not smoke just a single day i can quit and same i did with my drinking habit its been more than 8 month i didn’t smoke and drink . I want to tell others to quit this bad habit with your will power you only get bad health with this.

    All the best

  23. सागर भाई,
    वो कहते हैं ना कि
    “पीछे मत देख, ना शामिल हो गुनाहगारों में,
    सामने देख कि मंजिल है तेरी तारों में..
    बात बनाती है अगर दिल में इरादे हों अटल..
    चल मेरे साथ ही चल……..”
    अगर इंसान दृढ़ता से कोई निश्चय कर ले तो संसार की कोई ताकत उसे फ़िर डिगा नहीं सकती.
    “कौन कहता है आसमान में सुराख नही हो सकता,
    एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो.”
    धन्यवाद.

  24. ePandit said

    हमने भी दो लत छोड़ी हैं, पहली चाय की दूसरी ब्लॉगिंग की। दूसरी वाली छोड़ना ज्यादा मुश्किल था।

    मुझे खाते और सोते समय भी कुछ ना कुछ पढ़ने की आदत है।

    कभी मुझे भी सोते समय पढ़ने की आदत थी, चाहे बस अखबार का एक टुकड़ा ही पढ़ूँ। बाद में इसका स्थान कम्प्यूटर व इण्टरनेट ने ले लिया। अब सोते समय मोबाइल (इण्टरनेट) पर कुछ पढ़ लेता हूँ।

  25. बहुत ही मजेदार और शिक्षा प्रद लेख! आपके विचार स्वागत योग्य है………….

  26. जी आर मीणा said

    सिगरेट हो या कुछ भी अगर छोडना चाहे तो छोड सकता है ऐसी कोई बात नहीं है ”क्‍योंकि मान ले तो हार है और ठान ले तो जीत है”

  27. sunil babhale said

    apne chotisi bat khi par bhot badi sikh dene wali bat kahi

  28. Sandeep said

    Tricks

  29. aapki post se aaj prerna mili hai. mere andar bhi gutkha khaane ki behad buri lat lagi huyi hai.

    abhi is post ko padhte huye yahi soch raha tha ki jab aap itne beehad chaukeen hote huye bhi chaay ya extra namak ki aadat tyaag sakte hain to mujhe bhi koshish avashya karni chaahiye.

    bahut upyogi aur pathneey post.

  30. Aapki Post se aaj Prerna mili hai. mere andar bhi Gutkha khaane ki behad buri lat lagi huyi hai.

    abhi is post ko padhte huye yahi soch raha tha ki jab aap itne beehad Shaukeen hote huye bhi chaay ya extra namak ki aadat tyaag sakte hain to mujhe bhi koshish avashya karni chaahiye.

    bahut upyogi aur pathneey post.

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