॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

क्या मैं चोर हूँ!!

Posted by सागर नाहर on 28, फ़रवरी 2008

इरफानजी और दिनेशराय द्विवेदी जी कॉपीराईट संबधी पोस्ट पढ़ने के बाद मन में डर लगने लगा है कि कहीं ढ़ाई लाख का जुर्माना भरना पड़ा या साल दो साल की जेल काटनी पड़ गया तो क्या होगा?

वाकई बड़ी अजीब परेशानी है, अगर वाकई ऐसा हुआ तो मुझे इस दंड से बचने के लिये अपनी महफिल को ताला लगाना पड़ेगा या फिर महफिल को मिटा देना होगा, जो मेरे लिये बहुत ही दुखद: होगा। कितनी मेहनत से मैने ये गाने इकट्ठे किये हैं, इनमें से कई तो शायद म्युजिक कम्पनियों के पास भी नहीं होंगे।
मुझे एक मित्र ने बताया कि १९६० से पहले संगीत के अधिकार संगीत कम्पनियों के पास ना होकर निर्माताओं के पास होते थे। उन निर्माताओं या उनमें से कई प्रोडक्शन हाऊस का तो लगभग अस्तित्व भी मिट चुका है या फिर उन निर्माताओं के वशंजो को भी इस बात की पड़ी नहीं है कि कौन उनके संगीत को अपने ब्लॉग पर डाल रहा है।

अब मूल बात यह है कि मैं ऐसे गाने जो दुर्लभ हैं उन्हें आसानी से आम जनता नहीं सुन सकती उन गानों को भी अपने ब्लॉग पर लग कर जनता को उन मधुर गीतोंको सुनाना प्रकाशनाधिकार का उलंघन होगा? वह भी उस स्थिती में जब कि मुझे उससे कोई आर्थिक लाभ नहीं हो रहा हो।

मैं क्या करूं? जैसा विमल जी ने पूछा कि क्या कोई डिस्क्लेमर लगा देने से परेशानी हल हो सकती है या फिर महफिल को डिलीट कर दूं?

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16 Responses to “क्या मैं चोर हूँ!!”

  1. सही है नाहर भाई। हमें भी पिछले कुछ दिनों से धड़का सा लगा हुआ है। कुछ जानकारियां जुटाई जाती हैं। आज दिनशराय द्विवेदी जी भोपाल तशरीफ लाए हुए हैं सो उनसे भी कुछ आमू-सामू राय लेते हैं, फिर शेयर करते हैं।

  2. दस्तक को हमारे ब्लागरोल में होना था, पर नहीं था। भूल सुधार ली है।

  3. kakesh said

    जी नहीं आप चोर नहीं है इसलिये अभी फिलहाल महफिल चलने दें. बाद में देखा जायेगा.

  4. मैं ख़ुद इस बात से हकबकाया हुआ हूं भाई. अभी तक तो कोई ठोस बात सामने नहीं आई है. मैने तो कबाड़खाने पर संगीत न लगाने का फ़ैसला लिया था मगर कल इरफ़ान ने एक गाना लगा ही दिया. देखी जाएगी जो हो सो हो. दुनिया भर में फ़ोकट में लुच्चा संगीत डाउनलोड किया जा रहा है उस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है. मैंने तो गूगल वालों को एक मेल भी किया था पर वह अब तक अनुत्तरित ही है. असल बात तो यह है कि मेरी समझ में कुछ आ ही नहीं रहा है. ऐसे तो बड़ी उबाऊ हो जाएगी आपकी हमारी और बाक़ी मित्रों की शैली की ब्लॉगिंग.

  5. parulk said

    सागर जी,नाम हमारा भी चोरों मे है हालाकि उद्देश्य हम मे से किसी का भी चोरी नही है यह भी स्पष्ट है । अशोक जी की तरह मुझे भी ये लगता है कि अगर सांगीतिक चिट्ठे बंद हो जायेंगे तो चिट्ठे पढ़ने व लिखने मे कम स कम मेरी रूचि आधी रह जायेगी ।

  6. yunus said

    मैं भी इस चिंता में शामिल हूं भाई लेकिन इरफ़ान भाई की आखिरी पोस्‍ट ने काफ़ी संशय दूर किया है ।

  7. mamta said

    इस समस्या का हल तो जल्दी ही खोजना चाहिए ।

  8. अगर मैं कुछ राय दूँ तो आशा है कि आपको बुरा नहीं लगेगा, प्रकाशनाधिकार अनुमति का अस्तित्व बहुत भारी परिणाम ला सकता है, इस बात का ध्यान दें और कोशिश करें कि जो गीत आप अपने ब्लौग पर लगाये हैं उनके ओरिजिनल रिकार्डस आपके पास हैं और ऐसी अपलोड सेवाएँ लें जो उन गानों को टेम्प फोल्डर या टेम्परेरी इंटरनेट फोल्डर में स्थानांतरित करके उन्हें नहीं बजाता… अगर आप ऐसी सेवाओं का उदाहरण चाहते हैं तो सबसे बढ़िया उदाहरण myspace.com है। आप मेरे इस अकाउन्ट को देखें और मेरे किसी भी गायक मित्र का myspace account check करें। उन अकाउन्ट पर गाना बजता तो है पर किसी software द्वारा डाउनलोड करना बिना अनुमति के सम्भव नहीं है।

    लिंक है: http://www.myspace.com/vinayprajapati

  9. सागर भाई, द्विवेदी जी की पोस्ट पढ़कर मुझे भी बड़ी चिंता हुई. क्या पता, कल को कोई कवि कोर्ट का नोटिस भेज दे तो बड़ा झमेला हो जायेगा. इसिलए मैंने सोचा कि जब तक इस मामले में कोई पक्की राय नहीं बन जाती, मैं किसी दूसरे की रचना प्रकाशित नहीं करूंगा. जो कुछ अच्छा-ख़राब लिख सकूंगा, ख़ुद ही लिखूंगा.

    रही बात चोरी के आरोप की, तो ऐसी बात तो नहीं है.

  10. बच के रहना रे बाबा!

  11. मसला गंभीर है। चिंता भी जायज है। लेकिन हम तो फोटुएं धड़ल्ले से flickr से उठाकर लगाए जा रहे हैं। आगे जो होगा, देखा जाएगा। हर समस्या कोई न कोई समाधान तो लेकर आती ही है। अभी से क्यों माथा खराब करें…

  12. mehhekk said

    hum to itna kehenge ki gano ke bin chtthe to kahli se ho jayenge,kuch madhur purane gaane sunane ko achha lagta hai,parulji se sehmat.agar geetkar,sanitkar ke naam aur jaha se gana liya wo link ka naam likh de do kisiko aapati nahi honi chahiye,rahi baat flickr photo ki,waha share karenwale photo hi download hote hai,jo log dusron se share nahi karna chate,bas apne hi is par rakhte hai,wo pics download na ho aisi suvidha hai flickr par.

  13. ये क्या कह रहे हैं आप??? आप और चोर??? ह्म्म्म!!!! 🙂

  14. सागर जी,हम लोग चोरी तो नही कर रहे,बल्कि उन कवियो ,कहानीकार,सगीत कार, वगेरा वगेरा का नाम रोशन कर रहे हे,उन्हो ने तो कविता लिख दी अब सुनाये किसे हम मुफ़त मे उन की मशहुरी कर रहे हे,बाकी संगीत ( गीत )का तो हम सिर्फ़ लिन्क दे रहे हे,अगर हने चोर कहना हे तो हम से बडा चोर तो youetube हुया जहा से हम लिन्क ला रहे हे,अब जेसे आप ने कहा आप के पास दुर्लब गीत हे,तो आप उसे बेच थोडे ही रहे हो,आप ने तो उसे अपने ब्लोग पर डाला हे लोग पढे या ना पढे,दिक्कत तब होनी चहिये जब आप उसे बेचे,ओर जो कहानिया हम अपने ब्लोग पर दे रहे हे ,उस कहानी को अपना बना कर या लेखक की जगह अपना नाम दे तो चोरी हुई, लेकिन हम तो असली लेखक का नाम, ओर कहा से ली वो चीज सब, साफ़ शवदो मे लिख रहे हे,फ़िर चोरी केसे हुई,फ़िर किसी ने कोपीराईट भी नही लगा रखा, जहा लगा हे कोपीराईट उस ओर हम जाये तो चोरी हुई, मे कोई वकील नही हू, साधरण सा आप लोगो जेसा ही आदमी हू बस अपनी राय रखी हे,**लेकिन डरो मत, वेसे तो हम नही मिल पाते अगर जेल हुई तो सभी वही मिल कर रोज पार्टी करे गे ओर युनस भाई से , ओर समीर लाल जी से शायरी सुनने गे.**
    आप अकेले नही हम सब चोर हे कया ????

  15. कई दिनो बाद आपको मेरे चिट्ठे पर देख प्रसन्न्ता हुई..चोरी के बारे मे यही कहूँगी कि अगर आप चोर है तो और भी कई लोग हैं..:)

  16. Nahar ji aap se aur sabhi se mujhe thodi sahayta chahiye. TARU ka meaning kya hota hai???? please bata de. mere kyal se to chota ped hota hai, kripya jarur bataye aapke jawal ka intezzar rahega. dhanyawaad

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