॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

भैया है आपके पास कोई जवाब?

Posted by सागर नाहर on 6, मई 2008

पिछले दिनों मेरी एक  ब्लॉगर मित्र से कविताओं और अन्य विषयों पर बात चल रही थी, मैने कुश की इस   कविता का जिक्र किया और हाँ इस का भी, कि यह कविता मुझे बहुत पसन्द आई.. उसने भी कुछ कहा आगे की पूरी बात यहाँ पेस्ट कर रहा हूँ।

me: एक डर रोज़,उसको सताता है
जब वो बढ़ता है, घर की ओर
जब तक बच्चे सो,ना जाए वो घर
में नही घुसता…
आज सबके सोने के बाद, घर गया लेकिन
छुटकी उठ गयी थी, और पुछ बैठी
बापू खाना लाए ???

She: ek sawaal mera bhi hai…. aisi samwedna kis kaam ki… jo chhutki ke baapu ke haath me khaana na de sake

me: कविता अच्छी लगी मुझे .. कम से कम सच तो है

She: mujhe pata hai

She: meri ek puraani kavita…

गर्त के अंधेरे में “वो” कुछ बुझा बुझा सा खोया खोया सा

चला जा रहा था, घर में कदम रखता और बाहर घूम आता

me: ओके

She: आधी रात बीत गई, घर में नहीं जा सका

सामने बीमार गुड़िया चेहरा और हाथ खाली

सुबह बीबी के रोने की आवाज आई

गुड़िया ने बापू की कमजोरी जान ली थी

इसलिये खुद बापूकी तकलीफ को देखकर दुनिया छोड़ कर चलदी

me: ओह..

She: lekin bhaiya ab aise likhne ko man nahi hota kyunki yeh ek sachaayii hai

ab to chain tab aayega jab beemaar gudiya ke bapu ki majboori ko door karne ki koshish ki jaayegii

me: 🙂 मैं कई बार सोचता हूँ, फिर खयाल आता है अभी मैं शायद उस स्थिती में नहीं पहुंचा कि गुड़िया को बचा सकूं

She: haan mai bhi jaanti hoon

lekin bhaiya socho to

jab ham kuchh kar nahi sakte to

kisi ke dard ka tamaasha to kam se kam na banaayen

me: बहुत गहरी बात कर दी  आपने

She: bas isi tamaashe se bachne ke liye likhna band ho gaya

aur padhna bhi ,achha nahi lagta ab

me: 🙂

She: jab ham kuchh likhte hain to… log kahte hain.. waah dil ko chhuu gaya

pucho ki kya chhu gaya?

kisi ka dard?

kisi ki maut?

kisi ke aansoo?

kiski waah waahi ki?

me: 🙂

She: jawaab hai bhaiya?

me: नहीं है, कल लोगों से पूछूं जवाब..? पोस्ट लिख कर?

इस बात के अंश डाल कर?

She : puchhiye

dekhiye kya pratikriya aati hai

है किसी के पास मेरी मित्र के प्रश्‍न का जवाब?

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11 Responses to “भैया है आपके पास कोई जवाब?”

  1. आपकी मित्र कविता लिखने को दर्द का तमाशा बनाना बता रही हैं। उनका कहना है कि जब तक इलाज़ न ढूंढ़ लिया जाए, मर्ज़ की चर्चा करना ही बेमानी है।
    कवि या रचनाकार भी समाज के लिए उतना ही आवश्यक है, जितना रिसर्च करने वाले डॉक्टर। कवि का काम युद्ध में कूदकर तलवार चलाना नहीं है। कुछ लोग तलवार उठाने का जोश जगाने के लिए भी चाहिए होते हैं। इसे वाहवाही बटोरने का माद्यम समझना सिर्फ़ एक सीमित नज़रिए से सोचने का परिणाम है।

  2. @ गौरवजी
    आपकी दूसरी बात सही है पर शायद पहली नहीं, क्यों कि वह खुद एक अच्छी कवियत्री है पर जब उन्हें लगा कि खाली बातों, कविताओं से कुछ नहीं हो रहा तब उन्होने लिखना बंद किया। और हाँ तमाशा नहीं बना रही, इस बात की मैं गारंटी देता हूँ।
    ना ही उनकी बात से यह स्पष्ट होता है कि वह इसे वाहवाही बटोरने से माध्यम समझ सही है।

  3. arun said

    पहले ये बताओ ” वो कौंन थी”
    अरुण जी
    वे मुझे भैया कह कर संबोधित कर रही है, समझ लीजिये मेरी बहन ही होगी। 🙂

  4. समझ रही है*

  5. जवाब में तो पोस्ट ही लिखनी पढ़ेगी…जितना समझ आया है उस पर.

  6. बहुत ही विचारणीय सवाल उठाया है आप की दोस्त ने। बातें दोनों सहीं हैं। किसी की मजबूरी का मजाक न बने, तमाशा न बने, ये संवेदना रखने वाले तो बहुत बिरले ही होगें। मुझे तो वो मशहूर कविता याद आ रही है, “वो तोड़ती पत्थर” । पर दूसरी तरफ़ ये भी सही है कि अगर इन सच्चाइयों के ऊपर न लिखा जाए तो दूसरों की संवेदनाओं को जगाया कैसे जाए। दुनिया में हर अनुभव अपनी जिन्दगी से नहीं मिलता, साहित्य हमें समाज के हर रूप से वाकिफ़ कराता है और ये सच्चाई भी एक रूप है उसी समाज का। कहने का मतलब ये कि सिर्फ़ तालियां बटोरने के लिए अगर कोई किसी के आसुंओ को माध्यम बनाए तो गलत है और अगर सच में उसके दुख से व्यथित है तो जरूर लिखे और अगर हो सके तो रास्ता भी सुझाए, मदद की गुहार लगाए।

  7. सागर भाई,
    अभी कुछ दिन पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी जिस पर टिप्पणी के रूप में एक बात मेरे सामने रखी गयी थी. हालाँकि मैं उस बात से पूरी तरह सहमत नहीं था. मैं उसी टिप्पणी के एक अंश को रख रहा हूँ.
    “कुछ समस्याएँ कभी नहीं बदलती बल्कि और विकराल रूप में सामने आती हैं क्योंकि कविता लिखने से समस्या का समाधान नहीं होता ।”
    पर क्या इससे लोग अपनी भावनायें व्यक्त करना छॊड़ दें?

  8. कविता वही है जो अनायास्, बिना प्रयास, सायास अपने आप ,
    सामने आ जाये –
    कवि सिर्फ माध्यम होता है और जितनी सँवेदना घनी होगी उतनी ही पढनेवाले / पाठक के मन को छूयेगी ..
    जैसे अनिता जी ने महाकवि निराला जी की ” वह तोडती पत्थर ” कविता के बारे मेँ याद दिलाया है, और आपकी बहन / मित्र का कविता सृजन से रुकना भी एक अवस्था है !
    वे दोबारा लिखेँगीँ ..अवश्य !
    सँवेदना भी कभी , कुँठित हो जाती है ..
    परँतु, एक सच्चे ऐहसास वाला मन ,
    कभी दूसरोँ के दुखोँ से ,
    सदा के लिये मुख मोड नहीँ पाता –
    हाँ, हम समस्याओँ को,
    आमूल मिटा सकेँ,
    इतने समर्थ हुए नहीँ ..
    पर,
    कोशिश करते जायेँगेँ —
    That is our Humanity —
    – लावण्या

  9. जिस तरह की कविताएँ आए दिन देखने पढने को मिलती हैं, उनसे कहीं, कहीं ज्यादा सच्ची संवेदना की झलक मिलती है आपकी बहन के कविता ना लिखने के प्रण में.

  10. कुश said

    सागर जी सर्वप्रथम तो आपका धन्यवाद जो आपने मेरी रचना की चर्चा अपनी मित्र से की.. आपकी मित्र का सवाल पूर्णतया सही भी नही है और ग़लत भी नही .. परंतु अभी मैं केवल अपने विचार रखूँगा.. मैं ब्लॉग के माध्यम से अपनी भावनाए व्यक्त करता हू.. मेरा ऐसा सोचना है की यदि मैं किसी के लिए कुछ कर नही
    पाया कम से कम कोई जो सक्षम हो कुछ करने में वो तो इसे पढ़कर कुछ करे.. यदि ना कर पाने की वजह से मैने लिखना ही छोड़ दिया तो ये भी कायरता ही होगी.. एक सवाल मेरा भी आपकी मित्र से.. की यदि मैं ये नही लिखता तो क्या आप इस बारे मैं सागर जी से चर्चा करती.. क्या गुड़िया के विषय में कोई बात होती.. कही पढ़कर या देखकर ही तो हम जान पाएँगे.. और कुछ करेंगे.. फिर जो लिखा गया है उसे किसी ने देखा भी तो होगा..
    एक और बात कोई भी कवि किसी घटना का तमाशा नही बनाता .. और मैने तो बिल्कुल नही बनाया.. आप खुद लेखिका है.. खुद लिखती है.. क्या कवि के शब्द आपको तमाशा नज़र आते है.. क्रपया दोबारा सोचिए और लिखिए.. आपका लिखना ही इस कड़ी में एक योगदान है.. कवि समाज का आईना होता है.. हम ही नही कहेंगे तो कौन कहेगा? आपके नही लिखने से कोई गुड़िया के दर्द समझ ही नही पाएगा..
    और रही वाह वाही की बात तो मुझे नही लगता की मैं या कोई भी कवि लिखते समय ये सोच कर लिखता होगा की उसे कितनी वाह वाही मिलेगी.. हो सकता है मैं ग़लत भी रहु.. पर ये मेरा निजी दृष्टिकोण है.. और भी कई बात करनी है सोच रहा हू एक पोस्ट ही लिख दु.. फिर भी आपका प्रश्न कबिले तारीफ है.. सागर जी आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया इस प्रश्न को यहा पोस्ट करने के लिए..

  11. tasleem said

    aapne ek sanvedansheel mudda uthaya hai. paathkon ki maang par ise aage bhi badhhayen.

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