॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

हम ऐसे कामों में बड़े माहिर हैं

Posted by सागर नाहर on 5, जुलाई 2008

संजय पटेल जी कहते हैं कि अपने दिल से पूछिये! क्या जनरल मानेकशॉ के साथ ठीक किया हमने ?  भई हमने आज तक यही तो किया है!! क्या सैम बहादुर और क्या जनरल अरोड़ा… यह तस्वीर देखिये।

हिन्दी मिलाप के 19  मई 2005  अंक में छपी थी।

gen. arora

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11 Responses to “हम ऐसे कामों में बड़े माहिर हैं”

  1. 😉

  2. दुखद है. सम्पादको की सीमित सोच का परिणाम है. वैसे सम्पादक नामक प्राणी बचा भी है?
    वैसे देश के नायक अब कूर्सी पर बैठने वाले ही रह गए है शायद.

  3. जी हां, आपकी बात से सहमत हूं।

  4. surjeet said

    bahut accha mudda uthaya. badhai.

  5. राम सिंह said

    सागर जी कया कहे लेकिन अखबर वाले भी सकुलर है जी और सकुलर लोग कोई ऐसा काम नही करते जिससे पाकिसतानियो को कष्ट हो जिस्कै वजह से यहा मौजूद मुस्लमान उन खबरो को पसंद ना करे ,भाई सकुलरता को बरकरार रखने का सवाल है

  6. दुखद!

  7. Dr Anurag said

    दुखद!

  8. सागर भाई;
    आपने बरसों पहले प्रकाशित हुई ये क्लिपिंग लगा कर दिल के ज़ख़्म को और गहरा कर दिया.सही आदमी को श्रेय देने की रिवायत क्या होती है उसका एक उदाहरण देता हूँ.अभी अभी दो तीन दिन पहले कहीं पढ़ा कि जब १९७१ में पूर्वी कमान पर
    पाकिस्तानी फ़ौज के आत्म-समर्पण (जिसे तथाकथित लोक-व्यवहार में युध्दविराम कहा गया)के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री ने जनरल मानेकशा से कहा कि जनरल नियाज़ी के साथ आप काग़ज़ साइन कर आइये…जनरल मानेकशा का जवाब देखिये…बोले:पूर्वी कमान पर दस्तावेज़ साइन होने हैं और वहाँ के प्रभारी जनरल..श्री अरोरा हैं..सो साइन वही करेंगे.ऐसे चोखे लोग थे सागर भाई…अब तो चोट्टाई का ज़माना आ गया है. मेरे यहाँ एक दैनिक खुल्लेआम अग्रेंज़ी अख़बारों को अनुवाद कर तस्वीर सहित स्टोरीज़ छापता है और कोई क्रेडिट भी नहीं देता है.तो ये सब तो चलता ही रहेगा और हम दिल जलाते रहेंगे.चलिये आप जैसे भावुक इंसान ने तो सही व्यक्ति को श्रेय देने की पहल तो की…जय हिन्द.

  9. Lavanya said

    Aapka jajba kabile taarif hai –
    Jaisa Sanjay bhai ne aur Arun bhai ne bhee
    General Manek Shaw ke bare mei likha hai –
    Aajkal Bhartiya News Papers Glorified
    Celebrity Papers bun ker reh gaye hain –

  10. too bad

  11. Alok Pandey said

    एक बार और ऐसे भी हुआ था जब मदर डायना मरी तो पूरे दस दिन तक मीडिया में छायी रही और मदर टेरेसा एक दिन में ही सिमट गयी। क्या करेंगे सागर जी लोगों को यही भाता हैं। न जाने कब लोग इस चंगुल से निकलेंगे। अब देखिये ना सलमान ने बम्बई में लोगों को कुचल कर मार डाला। वह जब जयपुर गया था लोग उसको देखने के लिए, आटोग्राफ लेने के लिए उमड़ पड़े थे। लेकिन वही कोई बिहार का रामलाल तिवारी होता या यूपी का रामप्रसाद यादव तो लोग उसे गाली देते। हत्यारा कहते। ऊफ लोगो का बेंपेदी का लोटा होना। कभी कभी तो मन में आता है
    एक तरफ पतझड़ की मस्ती एक तरफ जलता है सावन
    मन में आता आग लगा दूं धू धू कर जले वतन

    शुक्रिया जो आप ने ऐसे चीज पर लोगों का ध्यान दिलाया और उसे ब्लाग में डाला
    http://www.pandeyalok.wordpress.com

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