॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

जिसके प्यार ने मुझे कवि बना दिया

Posted by सागर नाहर on 4, अगस्त 2008

हिन्दी चिट्ठा जगत  में एक चिट्ठाकार है.. उम्र में 24 पर मन से 4 साल की!  चैट के दौरान मुझसे  बातें भी करती है तो बच्चों की  भाषा में, पोस्ट भी लिखती है तो बच्चों की भाषा में। वैसे अब आप समझ गये होंगे कि वह कौन है.. वह है मेरी बहन डॉ गरिमा। पिछले साल हमारी पहचान हुई  और हमने एक दूसरे को आज तक देखा भी नहीं पर यों लगता है मानों हम एक साथ एक घर में रहते हों; एक दूसरे की खुशियों और तकलीफों को महसूस कर सकते हैं। दरअसल मैं अपने घर में सबसे छोटा हूँ और गरिमा अपने घर में सबसे बड़ी, सो उसे बड़े भाई की कमी अखरती है और मुझे छोटी बहन की..
बस… परसों अचानक ही गरिमा का मन हुआ बड़े भाई की  गोदी में सर रखकर सोना है.. कुछ व्यक्तिगत और भावुक बातों  के बाद मेरे कीबोर्ड से अचानक कुछ कविता रूपी पंक्‍तियाँ निकली, और उसका जवाब  गरिमा ने फिर कविता के रूप में दिया.. फिर तो ऐसा सिलसिला चला कि  एक लम्बी सी कविता बन गई।
गरिमा तो कवियत्री है पर अपन कविता के मामले में एकदम पैदल.. फिर भी  हमारी एक साझा कविता बनी है। कविता को साहित्य की दृष्‍टि से ना पढ़ें, इस में काफ़िया  का अता पता नहीं है। आप इसे चाहें तो कविता कहें या कुछ  और पर बस…बस कविता का भाव देखें।

काश कि तुम मेरे करीब होते,
या खुदा ऐसा मेरे नसीब होते
मै खेलती तुम्हारी बाँहो मे,
मै पलती तुम्हारी छाँव मे,
मेरी आँखो मे तुम्हारा छाया होता,
तुम्हारे छाये पर मेरा भी नसीब होता।

तुम रूठती मैं मनाता, तुम गाती मैं बजाता
सोंधी मिट्टी में पाँव दबाकर घरौंदे हम बनाते।
जाने किन किन सपनों से आशियाना हम सजाते
तुम  कहती, भैया उसने मुझे धक्का दे कर गिराया है
देखो उस मोटू ने मुझको आज रूलाया है।

फिर  मिल हम दोनों  उसका तमाशा बनाते
ताली बजाकर, हँसते और खिलखिलाते
हरेक दिन को हम एक त्योहार बनाते
सबके दिलो मे प्यार मे जगाते।

होली को तुम छुपती फिरती, मैं फिर भी तुम्हें रंग लगाता
दीपावली को फुलझड़ियों से घर रोशन हो जाता
राखी को मेरी कलाई तुम्हारे स्नेह के धागों से बंध जाता
मैं उतार ना पाता ऋण उस कुदरत का जिसने तुम्हे मुझे नवाजा

राखी के दिन मै फूली ना समाती,
भईया की  आरती उतारती
निकलती मेरे दिल से लाखों दुवाएं,
आप पर कोई आँच ना आये
फिर ना कहना कि ये एक ॠण है,
यह ॠण नही कोई मेरा प्यार भला ये दिल है,
बन्धन नही है कोई हम पूरक हैं एक दूजे के, कोई हाशिया नही
हमारे प्यार मे कोई किसी पर मेहरबां नही है
हम हैं एक दूजे के लिये, इतनी सी ही बात है
ऋण नही भईया, ये रिश्ता कुदरत की सौगात है

चलो माना तुम्हारी बात बहना तुम मेरे संग संग हे रहना
फिर अपने जीवन मे एक ऐसा दिना आता
मेरी बहना को अपने हाथों से दुल्हन में बनाता
रो रो मेरा हाल बुरा हो जाता जब दूल्हा तुम्हे ले जाता

इसी एक बात पर हमार झगडा होता
मुझे नही करनी शादी मेरा कहना होता
मुझे रहना है, आपके गोद मे हर पल
मुझसे इससे दूर नही जाना होगा
वादा करो कि ये वादा निभाना होगा
प्यारा सा एक अपना उपवन होता
रंगीन बहारो का एक संगम होता
कभी नही मिटता मेरा बचपन
ऐसा होता तो कितना अच्छा होता?

मैं बनता घोड़ा और तुम होती मुझ पर सवार..
ले जाता तुम्हे परियों के एक अनोखे से संसार
परियां भी जल उठती देख कर हमारा प्यार
ऐसा सुंदर सपना, घर अपना होता
काश ये ख्वाब नही, सच अपना होता

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31 Responses to “जिसके प्यार ने मुझे कवि बना दिया”

  1. kanchan said

    abhut khub….!

  2. mere bhi ek bhaiya hain jinki shadi hal me huyi hai (we blog jagat ke nahi hain).aapki kavita sundar thi.waise bhi jo itna klatmak ho uski kavita sundar to hogi hi.

  3. अहा! रक्षा बंधन भी आने वाला ही है सागर भाई. आपकी ये साझा कविता सारे भाई-बहनों के लिये एक तोहफ़ा समान है.

  4. ranju said

    सागर जी जिसके लफ्जों में प्यार बसा हो इतनी मासूमियत हो और जो सीधे दिल में उतरती जाए वही कविता है वही काव्य है .बहुत बहुत प्यारी लगी आपकी यह पहली रचना ..गरिमा है ही इतनी प्यारी और मासूम की उस से दिल से प्यार हो जाता है .कोई दिखावा नही कोई चालकी नही उस लड़की में 🙂 और यह कविता उसी की तरह मासूम लिखी है आपने ..राखी का अनमोल तोहफा दिया है आपने यह ..बहुत अच्छे ..अब लिखते रहे ..आप कविता लेखन में पास हो गए 🙂

  5. डा. गरिमा का लेखन अत्यन्त संतुलित और सुन्दर है। और निश्चय ही आपकी पोस्ट सामयिक है!

  6. कविता के भाव महंगाई से भी ऊंचे हैं
    यह सब गए बहुत प्‍यार से सींचे हैं
    सब कुछ सच्‍चा है सब कुछ बहना है
    एक एक शब्‍द शब्‍दकोष रूपी गहना है

  7. क्या बात है! कमाल की जुगलबन्दि हुई है. बहुत सुन्दर.

  8. आप कविता लिखने के मामले में पैदल हैं तो हम कविता पढने के मामले में…फिर भी…
    “वाह वाह, वाह वाह”
    🙂

  9. aflatoon said

    कविता सुँदर है |

  10. वाह बहुत सुंदर जुगलबंदी हुई है जी। गरिमा सचमुच प्यारी है और आप का दिल भी स्नेहपूर्ण है। अच्छा लगा पढ़ कर

  11. bhuvnesh said

    रक्षाबंधन पर आपकी ये प्‍यारी सी पोस्‍ट बहुत अच्‍छी लगी..

  12. kya baat hai sagar bhai bhai bahan ne achcha sama bandha hai

  13. वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह ।
    सागर भाई आप कवि-हृदय तो हैं ही ।
    अब आपने कविताएं भी रचनी शुरू कर दीं ।
    इसे कहते हैं गागर में सागर ।

  14. भाई बहन का रीश्ता ऐसा ही पवित्र और मासुम है !
    -लावण्या

  15. क्या कविता है भाई, हम तो आपके फैन हो गये!

  16. बहुत खूब..सही जुगलबंदी रही भाई बहन की. बेहतरीन!!

  17. Amit said

    वाह सगर जी, छा गए। गरिमा का क्या कहें, वह तो अच्छे बोल और अच्छा लेखन जानती ही है, आप भी कहाँ कवि रस में डूब गए! 🙂 और तुकबंदी को छोड़िए, मामला शानदार बन पड़ा है। 🙂

  18. Nikhilashish said

    अति सुंदर |

  19. Harshad Jangla said

    Sagarbhai

    This has come from your heart. Let anyone call it anything.
    Marmik Rachna.
    -Harshad Jangla
    Atlanta, USA

  20. भाईसा!

    अपनी भी यही हालत है… बस अपन कवि पहले से ही थे… 😉

  21. प्यार सलामत रहे, यही कामना है.

  22. सागर भाई, आप कवि हृदय हैं इसलिये इतनी बढ़िया कविता रची है आप दोनो ने मिलकर, हम भले ही कविता हमारे मामले में “भैंस के बीन” है, लेकिन तारीफ़ तो कर ही सकते हैं…

  23. koshish jor daar hai
    badhaiyaan

  24. Waah ! achchi ban aayi hai kavita ! Bahut khoob !

  25. swayambara said

    rishte to dil se bante hai.apki rachna ne mujhe bhi apne rishte yaad dila diye.badhai.aankho me aansu laane ke liye.ishwar aap bhai-bahan ki jodi ko har bala se bachae.aamin.

  26. Bahut hi sundar kavita nahar ji, lagta hai nahi ki aapne pahli baar kavita likhi hai

    New Post :
    मेरी पहली कविता…… अधूरा प्रयास

  27. Nahar ji 1 mahine se jyada ho gaya.. koi bhi nayi post nahi ? Kaha hai aap

    New Post :
    I don’t want to love you… but I do….

  28. Rekha Srivastava said

    ye rishte bhi upara se ban kar aate hai, pata nahin kabhi bichhud gaye hote hain aur idhar aakar phir mil jaate hain.
    bahan bhai ki jugalbandi khoob sundar ban gayi hai.

  29. arunansari said

    hay rkha ji aap kese hai ji
    mai yahan hyderabad se aap se bat krrhan hunji aap apna id mere yahooi id per ya gmail.com per bhej dena ji rekha aapka nam bhut nice hai rekha bay bay bay

  30. arunansari said

    aapke pyar ne hame pagl bna diya
    pehle to mera dil aacha tha aab chota bna deya
    btao hamara kusur kya hai jo aapne
    hame mujhe dhayal bna deya
    rekha ji

  31. kavindra pulkit said

    I love my sis very much…me uske sath bachpn nh bita paya bt usne mujhe hr vo khusi di h jo me akela nh hasil kr skta..thanks mannu beta

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