॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

इको फ्रेन्डली गणपति बप्पा मोरय्या

Posted by सागर नाहर on 11, सितम्बर 2008

राधिका बुधकर जी और गणेशजी की चैट सुनकर  मन में  ठान लिया था कि हम इस बार पर्यावरण मित्र   यानि इको फ्रेन्डली गणेशजी की मूर्ति की स्थापना ही करेंगे।

पिछले साल कुछ तमिल लोगों को काली मिट्टी के बने गणेशजी  को केले के पत्ते पर घर ले जाते देखा था, सो इस बार हमने भी वैसे ही गणेशजी की स्थापना करने का निश्‍चय किया। बहुत खोजने के बाद आखिरकार मोंडा मार्केट में मूर्तियाँ बनाती हुई दो तीन स्त्रियाँ दिख गई। हम फटाफट पहुंचे और तीन मूर्तियाँ बनाने का ऑर्डर दे दिया।  एक एक मूर्ति की कीमत मात्र बीस रुपये थी। जबकि बनावटी रंगो से बने गणेशजी की मूर्ति की कीमत ( उतनी ही साइज के) 110 रुपये।

ये मूर्तियाँ सिर्फ मिट्टी से बनी होती है इसमें कोई रंग का उपयोग  नहीं किया जाता है।

हमने  मूर्ति बनाती हुई महिला की कुछ फोटो भी खींची थी परन्तु वे पता नहीं क्यों  मोबाइल से  यहां अपलोड नहीं हो पाई। गणेशजी की स्थापना के बाद दूसरे मोबाईल से दो फॊटों और खींची जो  यहाँ प्रस्तुत है।  पहले में गणेशजी और दूसरी में गणेशजी के साथ मैं और हर्षवर्धन नाहर है।

इस बार हमने  एक फूल भी भगवान को चढ़ाने के लिये नहीं तोड़ा बस दो अगरबत्तियाँ और दीपक जरूर जलाया है .. कुछ हद तक पर्यावरण को बचाने में मदद तो की ही है। 🙂
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फोटो में जो दिख  रहा है वह फूल नहीं लड्डू है

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20 Responses to “इको फ्रेन्डली गणपति बप्पा मोरय्या”

  1. गणेश जी की पूजा जितनी ही प्रकृति की पूजा भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण प्रिय गणेश जी सभी जनो को पर्यावरण चेतना की सद्बुद्धि दें।

  2. गणपति बाप्पा मोरया…..

    पर्यावरण को आस्था से उपर रख या उसमें ही समाहित कर आपने अनुकरणीय कार्य किया है. साधूवाद.

  3. उपत को उपर कर दें

  4. mamta said

    आपने तो एक मिसाल कायम कर दी है।

  5. anitakumar said

    Ganesh ji ki moorthi bahut hi manoram lag rahi hai, BHAGWAN AAP KE GHAR KHUSHIYAN HI KHUSHIYAN LAAYE

  6. मुझे तो सागरचन्द और हर्षवर्धन भी ईको फ्रेण्डली माटी के लग रहे हैं! 🙂

  7. @ ज्ञान दद्दा जी
    शानदार टिप्पणी! और अंग्रेजी में क्या कहते हैं.. Best Complement 🙂
    वाकई हम सब इको फ्रेंडली माटी के ही तो बने हैं। एक ना एक दिन माटी में मिल जायेंगे। शायद जब हम माटी में मिलेंगे, पर्यावरण का थोड़ा बहुत नुकसान जरूर करेंगे परन्तु पृथ्वी को और नुकसान होने से जरूर रोक लेंगे।
    जिन्दा रहेंगे तब तक पता नहीं कित्ता नुकसान रोज रोज करेंगे।

  8. Amit said

    गणेश जी की पूजा जितनी ही प्रकृति की पूजा भी महत्वपूर्ण है।

    और मेरा मानना है कि गणेश जी की पूजा एक बार को न भी होगी तो वे बुरा न मानेंगे, समझ जाएँगे, आखिर ईश्वर के पुत्र हैं, प्रकृति अधिक ज़रूरी है क्योंकि उसके बिना जीवन नहीं। 🙂

    वैसे पूजा अर्चना में अपने यहाँ तो माता जी फूल चढ़ाती हैं लेकिन कहीं और से तोड़ के लाए हुए नहीं। घर के बाहर ही उन्होंने अलग-२ तरह के पुष्पों वाले पौधे लगा रखे हैं जिनमें साल भर पुष्प रहते हैं (गैन्दे का पौधा तो साल भर ही खिलता है) तथा जिनको नियमित पानी आदि दिया जाता है। उसी में से रोज़ाना एकाध पुष्प तोड़ वे अपने ईश्वर को अर्पित करती हैं।

    पुष्प तोड़ प्रयोग करना या ईश्वर को चढ़ाना प्रकृति के खिलाफ़ नहीं है लेकिन जितना उपयोग कर रहे हैं उतना उगाना भी चाहिए ताकि सन्तुलन बना रहे। 🙂

  9. बडे भईया आपने शानदार काम किया है… जैसा कि आप हैं ही…शानदार और जानदार… तो काम भी वैसा ही करेंगे ना 🙂

    छुटकु भी बहुत सुन्दर दिख रहा है 🙂

  10. जे बात । सागर भाई ।
    मुंबई में भी इस साल ईको फ्रैन्‍डली गणपति और ईको फ्रैन्‍डली विसर्जन का ज़ोर है ।
    पर अभी वो दौर थोड़ा दूर है ।
    हम और आप जैसे लोग ही इस बदलाव को दिशा और रफ्तार दे सकते हैं ।
    हर्ष इस बात का है कि हर्ष भी इस बदलाव में सहर्ष शामिल है ।

  11. Harshad Jangla said

    Sagarbhai

    Nice job done.
    Plz continue this approach next yr also.
    God bless Harshvardhan, he looks cute.
    -Harshad Jangla
    Atlanta, USA

  12. premlata said

    उत्तर भारत में किसी भी पूजा के आयोजन में पँडित मिट्टी की छोटी सी ढेली पर कलावा/मौली लपेटकर गणेश जी स्थापित करते हैं|

  13. Abhishek said

    ऐसे छोटे-छोटे प्रयास हम सब करें तो बहुत भला हो जायेगा.

  14. लड्डू गोल नहीं-कैसे लड्डू हैं?? खैर, स्वाद से मतलब!!

    गणपति बाप्पा मोरया…..

  15. सुन्दर मन। बढ़िया पोस्ट!

  16. प्रभु मेरे अवगुण चित्त न धरो… आप जो मेरे ब्लॉग पर लिंक देने की सलाह देकर आए हो तो गुरूजी यहभी बता दो यह लिंक देवें कैसे? मैंने तो पहले ही अर्ज किया था की मुझे अपना चेला बना लो, इस बात की गारंटी है कि चेला बना कर आप को अफ़सोस नही होगा.— संतोष क अग्रवाल

  17. Tarun Goel said

    Save environment as well as culture also.
    Save “EnviroCulture”.

  18. sabse pahle aapka shukriyaa mere
    blog par aane ke liye
    aur aapki puja bahut sachchi lagi
    bhagwaan bas yahi sradhaa chahte hain….
    bahut pavitra sa laga

  19. arunansari said

    aap ki ssocha bhut aacha hai
    aapke subaobade sudhare
    aapke chahat me
    na jane kitne bigde ji
    rasmi pradha ji aap ko nhi bol rha hun ji

  20. arunansari said

    aap ki ssocha bhut aacha hai
    aapke subaobade sudhare
    aapke chahat me
    na jane kitne bigde ji
    rasmi pradha ji aap ko nhi bol rha hun ji
    mera id hai gmail hai
    arunansari@gmail.com hai esi per milo

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