॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

मम्मा, मेरी माँ प्यारी माँ, मम्मा

Posted by सागर नाहर on 31, अक्टूबर 2008

क्या सचमुच अच्छे गीत बनने बंद हो गये हैं?

राधिका बुधकर जी ने अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट कहाँ खो गया संगीत? में पहले किसी पोस्ट में पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में लिखा था

अब जवाब यह हैं कि मुझे सिर्फ़ इतना ही नही लगता कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गाने बनना बंद हो गए हैं ,बल्कि मुझे लगता हैं गीत बनना ही बंद हो गए हैं । संगीत किसे कहेंगे हम ,वह जो जिसमें मधुर स्वर ,उपयुक्त लय ,सुंदर बोल हो और उसे जिसे उसी सुन्दरता से गाया गया हो

माँ, मेरी माँ
प्यारी माँ..मम्मा
ओ माँ
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ..मम्मा
बिगड़ी किस्मत भी संवर जायेगी
जिन्दगी तराने खुशी के गायेगी
तेरे होते किसका डर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ , प्यारी माँ.. मम्मा
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
पर तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
दुनियाँ में जीने से ज्यादा
उलझन है माँ
तू है अमर का जहाँ
तू गुस्सा करती है
बड़ा अच्छा लगता है
तू कान पकड़ती है
बड़ी जोर से लगता है, मेरी माँ
मेरी माँ..प्यारी माँ
मम्मा, ओ माँ.. प्यारी माँ .. मम्मा
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाऒं का है घर
मेरी माँ..मम्मा

मैने इसी पोस्ट पर अपनी टिप्पणी की थी कि ऐसा नहीं है कि अच्छे गीत नहीं बनते, कई बार अच्छे गीत आते हैं जो भले ही शास्त्रीय संगीत पर आधारित ना होतें हो पर कर्णप्रिय तो होते ही हैं।

ऐसा ही एक गीत मैं आपको सुनाना चाहता हूँ, जो शायद अभी तक रिलीज भी नहीं हुई है, फिल्म दसविदानिया का है, फिल्म के संगीतकार और गायक कैलाश खैर है। यह एक गीत सुनिये… माँ, मेरी माँ.. मम्मा।

इस गीत को आप आंखे बंद कर ध्यान से और शास्त्रीय संगीत के पैमाने में तुलना किये बिना सुनें। सुनिये और बताइये क्या वाकई अच्छे गीत बनना बंद हो गये हैं? क्या इस गीत की लय उपयुक्त नहीं है? क्या बोल सुंदर नहीं है?

मैं आपको इस गीत को यहाँ सुनवाने की बजाय एक दूसरे लिंक कर क्लिक करवा रहा हूँ।

मेरी माँ….मम्मा

इस लिंक पर क्लिक कर गाना सुनिये और साथ में गुनगुनाने ले लिये यहाँ आईये..

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6 Responses to “मम्मा, मेरी माँ प्यारी माँ, मम्मा”

  1. SHUAIB said

    पुराने गीत अच्छे होते थे सम्झमे आते थे पर मुझे संगीत आजका पसंद है। पुराने संगीत सुनने से मुझे नींद आजाती है 😛
    मेरी मां, ये गाना सुनाने के लिए शुक्रिया, बहुत अच्छा लगा।

  2. samkaleen giton ke baare me aapka aaklan bilkul sahi hai.Par jimmewaar
    hum shrota bhi hain jinki ruchi hi vikrit ho gayi hai.

    guptasandhya.blogspot.com

  3. Kailash kher ke sabhi gaane ache lagte hai… aur mai aapki baat se sahmat hu nahar ji ki aaj kal bhi kuch ache sing bante hai.. lekin purane songs jaisi baat kaha.. i love old songs very much.. nice post

    New Post :
    खो देना चहती हूँ तुम्हें..

  4. sanjayoscar said

    hi,
    – your web-bloge is nice and ……….
    -please visit at : sanjayoscar.wordpress.com
    -Sanjay Nimavat

  5. Purvi Parwani said

    Very nice song ! Thanks for posting it ..

  6. sandeep yash said

    priy Nahar ji
    apka blog achcha laga,ismein sadgi hai,saralta hai aur disha hai jiski kami shayad aaj sabse zyada hai.aur haan Manda hamare allahabad(pryag )ki hi ek tehseel hai.saath hi hindi mein na likhne ke liye kshama chahta hoon,dilli mein electronic media mein hoon pichle 14 baron se,prayag ka khoon hai ragon mein,apna fone number likh raha hoon (9818425060).email sandeepyash@indiatimes.com hai.baat hogi to achcha lagega.

    saadar
    sandeep yash

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