॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

माईक्रो पोस्ट: किसी ने तो माना गलती हुई

Posted by सागर नाहर on 2, दिसम्बर 2008

देर सवेर ही सही पर चैनल आज तक को अक्ल आई  और उसने कल (1.12.2008) को सुबह अपने विशेष कार्यक्रम में मुंबई आतंककांड में हुई दस गलतियों में इलेक्ट्रोनिक मीडिया को जरूरत से ज्यादा छूट देने को भी माना/ शामिल किया।

कहीं ऐसा तो नहीं कि आज तक के कैमरामैन  सीधा प्रसारण करने में सही जगह ले पाने में नाकाम रह गये थे, और खुद  प्रसारण नहीं कर पाये तो दूसरों के सर ठीकरा फोड़ दिया?

Advertisements

13 Responses to “माईक्रो पोस्ट: किसी ने तो माना गलती हुई”

  1. एकदम सही । खिसियानी बिल्ली खंबा नोंचे । जिम्न्हें आज तक अकल नहीं आई ,उन्हें अचानक ब्रह्म ग्यान की प्राप्ति । घोर कलयुग है भई घोर कलयुग….।

  2. यू टर्न लेना इनके पेशे का हिस्सा है. कोई आश्चर्य नहीं.

  3. ये भी बेशर्मी मे नेताओं से कम नही है,वो तो गनीमत है शिवराज के इस्तीफ़े को अपनी खबर का असर नही बता रहे हैं।वर्ना अभी तक वही शोर मचाते रहते।

  4. ये लोग लाशें और आतंक बेचते हैं….और सरकार क्या रायल्टी ले रही थी सरकार ने रोका क्यों नहीं

  5. मुर्दा सरकार से क्या उम्मीद करें।

  6. कारण कोई भी बताएं, यही क्‍या कम है कि माना तो ।

  7. Abhishek said

    चलिए आपने बता दिया वरना ये चैनल तो हम कभी ना देखें !

  8. यू टर्न लेना इनके पेशे का हिस्सा है. कोई आश्चर्य नहीं.@संजय बेंगाणी

    sach hai!!!!!!!1

  9. का कहें महाराज !!!

  10. SHUAIB said

    सिर्फ आजकी बात है, वे फिर लौट आएंगे उसी जानिब

  11. bilkul sahi kaha,,,, mere khyal se aisi ghatnao ka live prasaran to katai nahi hona chaiye..

    एहसास अनजाना सा…..

  12. Abhishek said

    Sahi kaha aapne yeh divyagyan inhe khud piche chut jane ki vajah se hi hua hai. Aapki mere blog (gandhivichar.blogspot.com) par tippani ke paripekshya mein maine ek nai post likhi hai. Aapki pratikriya ki pratiksha rahegi.

  13. सागर जी नमस्कार
    मै सिर्फ़ मुंबई के घटनाओं की रिपोर्टिंग के बारे में बात नही करना चाहता. उस वक्त सारा देश सदमे और आश्चर्य में डूबा था और टीवी वालों को एक और मौका मिला सनसनी बेंच कर पैसे कमाने का. लोगों को भी ताज़ा हालात जानने की उत्सुकता बनी हुई थी और सरकारी मीडिया नेताओं के बयान दिखाने में लगी थी. ऐसे में किसी का ध्यान इस ओर नही जा पाया कि मीडिया ने लक्ष्मण रेखा कब पार कर ली. लेकिन कभी मीडिया के लिए लक्ष्मण रेखा खीची भी तो नही गई. इसका एक कड़वा उदाहरण “आरुषी हत्या केस” के दौरान देखा गया जब हत्या के दूसरे या तीसरे दिन एक प्रमुख हिन्दी चैनल ने मृतका का तथाकथित अश्लील वीडियो पूरे दिन दिखाया. पता नही उस चैनल का संदेश क्या था. बीते कुछ सालों से मीडिया और खास कर हिन्दी मीडिया बेहद बेशर्म हो चुकी है . तथाकथित स्वयंभू नम्बर – १ समाचार चैनल भी प्राइम टाइम पर इतनी घटिया सामग्री पेश करते हैं कि हिन्दी का दर्शक होने पर ख़ुद पर दया आती है. कोई ‘स्वर्ग की सीढी’ पर सशरीर ले जाता है तो कोई बिहार के सीतामढी जिले के “चाकरगिल्लू” (?) गावं के ‘हर्हल्ली महतो’ (?) की बहू के ऊपर देवी माता के आने का “ब्रेकिंग न्यूज” सुनाता है. मैंने कभी किसी हिन्दी समाचार चैनल पर सामाजिक सरोकार वाला कार्यक्रम आते नही देखा. कुछ अच्छे कार्यक्रम बनाने के लिए शोध करने पडेंगे, समय खर्च होगा, पेशेवर लोगों को पैसे देने पड़ेंगे आदि. इसकी जरूरत क्या है ? हर गली में इनका एक संवाददाता है जो ब्रेकिंग न्यूज भेज रहा है और वही बिक भी रहा है.
    विनोद श्रीवास्तव

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: