॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

पूत के पाँव पालने में

Posted by सागर नाहर on 16, जनवरी 2009

क्रिसमस की आठ दस दिन की छुट्टियां और उससे पहले दशहरे- दीवाली की छुट्टियों में दोपहर को हर्षवर्धन  और चैतन्य नाहर दोपहर अक्सर गेम खेलने आते रहते  थे। गेम खेलते खेलते पता नहीं कब मेल का एकाउंट खोलना सीख गया। उसे घर में अपनी मम्मी को कहते  सुना मम्मी आज मैने  याहू में अपना एकाउंट बनाया, आज मैने जीमेल में अपना एकाउंट बनाया। 

मैं देख रहा था कई दिनों से वह गेम खेलने के बजाय विकीपीडिया आदि पर ज्यादा  ध्यान दे रहा है, सो मैने उसे रोका भी नहीं। आज शाम ग्राहकी ज्यादा नहीं थी सो मैने उसे बिठाया और खाना खाने चला गया। खाना खाकर आया तब अचानक कम्प्यूटर के मॉनिटर पर  नजर पड़ी तो वहां ब्लॉगर का डेशबोर्ड दिखाई दिया। मेने सोचा कहीं मैं गलती से जीमेल साइन आऊट किये बिना तो घर नहीं चला गया और तुक्के से कहीं उसने ब्लॉगर खोला हो तो मेरा डेशबोर्ड खुल गया हो।

जैसे ही उसने मुझे देखा धड़ाधड़ विन्डो बन्द करने लगा, मैने सोचा कहीं अन्जाने में गलत साईट तो नहीं खोल ली जिसे मुझसे छुपाने के लिये फटाफट उन्हें बन्द कर रहा है, मैने झट से उसका हाथ पकड़ लिया जिससे वह सारी विन्डो बन्द ना कर सके। जब मैने एक एक साईट को देखा तो आश्चर्य चकित रह गया,  क्यों कि  एक तो जीमेल खुला हुआ था, दूसरा हर्षनाहर-स्टेर्न्थस के नाम से एक ब्लॉग और तीसरा उसका डेशबोर्ड!!!!  उसके ब्लॉग वाले पेज पर पोस्ट में बस एक ही लाइन लिखी थी

maine apna blog abhi abhi banaya hai

यानि भाई साहब अपना ब्लॉग बना चुके थे! मैने आज तक उसे ब्लॉग बनाना नहीं सिखाया, मेल खोलना नहीं सिखाया ( अभी  दस साल जो पूरे किये हैं) और महाशय ब्लॉग बनाना सीख गये। कहां मैं अब ब्लॉगिंग के मामले में उदासीन होता जा रहा हूँ तो नया ब्लॉगर तैयार हो रहा है।

किसी ने सच  ही कहा है “पूत के पाँव पालने में ही” नजर आने लगते हैं।

आज अजीब सी खुशी का अहसास हो रहा है, ऐसी खुशी दूसरी बार मिल रही है, पहली बार तो जब तब पापाजी ने गाँव से फोन कर मुझे बताया कि आज  गूगल पर कुछ सर्च करते समय तरुण को( उनके सहायक)  मेरा ब्लॉग दिखा और वह होली वाली पोस्ट पढ़ कर भावुक हो गये। पापाजी ने कहा नियमित लिखा करो जिससे लेखनी सुधर जायेगी।

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22 Responses to “पूत के पाँव पालने में”

  1. विवेक सिंह said

    आखिर बेटा किसका है 🙂 ब्लॉगर का ही ना !

  2. हम्‍म । हर्ष भरी ख़बर ।
    उसे प्रोत्‍साहन दीजिये । और कहिए कि अपने मन की सारी बातें लिखे ।
    कभी कभी आपकी डांट के बारे में भी लिखने की अनुमति रहेगी ।
    हम इंतज़ार कर रहे हैं ।
    बाल और किशोर मन की इतनी बातें सामने आएंगी कि ज़माना चकित रह जाएगा ।

  3. अब साहब यह तो होना ही था, न होता तो आश्चर्य होता. “जीन” का कमाल है 🙂

    ऑनलाइन गेमिंग से बचा लेना, बच्चे नाम रोशन करेंगे. हमारा आशिर्वाद.

  4. amit said

    sahi men aakhir beta kiska hai……mastast……..

  5. संगीता पुरी said

    ये हैं इक्‍कीसवी सदी के बच्‍चे……खेल खेल में ही सब कुछ कर सकते हैं ।

  6. amit said

    वाह जी वाह, मुबारक हो, लड़का होशियार व समझदार है! 🙂

    और आपके पिताजी ठीक कहते हैं, व्यक्ति जितना किसी चीज़ का अभ्यास करता है उतना ही उसमें पारंगत होता है। आप नियमित लिखा कीजिए, लेखनी आपकी पहले से ही बढ़िया है और अधिक चमक जाएगी! 🙂 अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि पिछले तीन-सवा तीन वर्ष से नियमित हिन्दी ब्लॉगिंग के कारण मेरी हिन्दी पहले सी तो हो गई है (अभाव महसूस नहीं होता) और साथ ही पहले से अधिक बेहतर महसूस होती है! 🙂

  7. alpana verma said

    हर्ष का ब्लॉग बहुत अच्छा है.टेम्पलेट भी अच्छा चुना है.बस वर्ड वेरिफिकेशन हटवा दिजीये.
    मैं ने अभी देखा.शुरुआत अच्छी है–
    वैसे भी हर्ष आप का बेटा है–कंप्यूटर में रूची होना स्वाभाविक है.
    मेरी शुभकामनाएं और आशीष .

    सच में -बच्चे बहुत जल्दी सीखते हैं आज कल–
    मेरी बिटिया ने भी .tk पर जब अपनी साईट बनाई थी-तो मैं हैरान हो गयी थी.
    स्कूल में कंप्यूटर की शिक्षा प्रथम कक्षा से ही शुरू कर देते हैं.इस लिए भी उन में रूची ज्यादा है.
    आज कल ७-८ साल के के बच्चे भी कंप्यूटर में एक्सपर्ट हो रहे हैं.

  8. sameer lal said

    खूब आशीर्वाद दे देना भई हमारा. दिल बाग बाग हो गया, खूब तरक्की करे. माँ बाप ताऊ चाचा सबका नाम रोशन करे. खास कर ताऊ के खास ध्यान रखे. 🙂

  9. नीरज रोहिल्ला said

    बहुत खूब, बधाई हो ।

  10. itne choti umer mey ye sub to ek uplabdhi hi khenge na…great

    Regards

  11. बडे़ भईया मुझे आज भी आपकी जरूरत होती है ब्लॉग मे और बच्चा इतना होशियार निकला… गज़ब है…

  12. mamta said

    बधाई हो ।

  13. mehek said

    waah naam roushan kar rahe hai janab,mubarak baat.

  14. ranju said

    यह तो बहुत अच्छी बात है .बच्चे ही आगे आए यही दुआ है

  15. सच है जी। हर्ष तो दस साल की उम्र में बने ब्लॉगर। बाद में जन्म के साथ ईमेल-ब्लॉग आईडी बनने लगेगी! 🙂

  16. ये तो खुशी की बात है ! ..
    “होनहार बिरवान के होत चिकने पात “..
    आप बच्चे को स्वयम कुछ खास बातेँ समझा दीजियेगा
    .हमारे भी आशिष और आपके पिताजी को प्रणाम व छोटोँ को स स्नेह आशिष
    स -स्नेह,
    – लावण्या

  17. Chiplunkar said

    Excellent, Brave, Intelligent….

  18. शुभकामनायें!

  19. वाह, वाह। नये ब्लागर का स्वागत है। 🙂

  20. मैने देर से पढा और बहुत गर्वित हुआ हुँ. हर्ष को बहुत बधाई. नियमित लिखेगा तो बहुत खुशी होगी. बस ओनलाइन गेमों से दूर ही रखिएगा.

  21. आदरणीय सागर जी
    आपको बधाई और आपके सुपुत्रजी को ढेरों शुभकामनाएं. उसके दूसरे पोस्ट का हमें इंतजार रहेगा, शायद उसके उदगार हमें हमारे अल्लहड़ दिनों की याद दिला दें.
    विनोद श्रीवास्तव

  22. deepak said

    shubhkamnaye… yeh to hona hi tha. Ab aap dariye aapka critic aur competitor aap se hi paida ho gaya hai

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