॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

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ब्रह्माण्ड की उत्पति के सिद्धांत पर कुछ सवाल ?

Posted by सागर नाहर on 28, अगस्त 2006

पिछले दिनों विज्ञान विश्व नाम के नये चिट्ठे पर ब्रह्माण्ड की उत्पति पर प्रचलित कुछ सिद्धान्तों पर विस्तृत विवरण दिया था, पढ़ कर बहुत मजा आया पर जिज्ञासु मन में कई सवाल भी पैदा हो गये हैं, अगर कोई इन सवालों का जवाब दे सके तो  मेहरबानी होगी।

  1. अगर बिग बैंग हुआ था  तो उसका केन्द्र रूपी पदार्थ, (अत्याधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दू(infinitesimally small ))कहाँ से आया?
  2. स्टडी स्टेट थियरी के अनुसार कोई बिग बैंग नहीं हुआ था,  अगर बिग बैंग नहीं हुआ था तो पूरे ब्रह्मण्ड में पाया जाने वाला तापमान  जो  आर्नो पेन्झियास और रॉबर्ट विल्सन  के टेलिस्कॉप से 2.700 कल्विन निश्चित हुआ है वह ताप कहाँ से आया?  
  3. डॉ जयन्त नार्लीकर और डॉ फ़्रेड होईल के सिद्धान्त के अनुसार ब्रह्मण्ड फ़ैल नहीं रहा है, हमें आकाश गंगाओं को दूर जाने का भ्रम हो रहा है क्यो  कि हमार पास उस दूरी को मापने के जो यंत्र हैं, वह क्रमश: सिकुड़ते जा रहे हैं।क्या यह थियरी सही है?
  4. भौतिक विज्ञान के नियम स्पेस टाईम पर आधारित है अगर  स्पेस टाईम बिग बैंग के साथ ही उत्पन्न हुआ तो उसके पहले की स्थिती को किस आधार पर समझा जाये?
  5.  अगर समय और काल  का जन्म बिग बैंग के साथ/बाद हुआ हो तोउसके पहलेशब्द का गलत नहीं है?
  6. अगर सारी वस्तुएं ब्रह्मण्ड में स्थित है तो ब्रह्मण्ड खुद किसमें स्थित है?
  7. अगर विशाल काय तारों से लेकर सुक्षम जीवाणु तक सबका अन्त निश्चित है तो प्रकृति कहो या सर्जनहार  का, इन सब को बनाने के पीछे क्या उद्देश्य है?
  8. अनुमानित बिग क्रंच जो लगभग १० खरब वर्ष बाद होगा, क्या वह निश्चित है कि होगा ही क्यों कि बिग बैंग के समय और बाद में पदार्थ और प्रतिपदार्थ के मिलन से जो विस्फ़ोट हुए हैं है, उसमें बहुत सारा पदार्थ नष्ट हो चुका है, तो  क्या फ़िर से  बिग बैंग हो पायेगा? और अगर नहीं हुआ तो क्या ब्रह्मण्ड की समाप्ति हो जायेगी, जहाँ करोड़ों तेज प्रकाश मान तारें हैं, उसकी बजाय सर्वत्र अंधकार छा जायेगा?

 

 

 

 

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कुछ और गणितज्ञ

Posted by सागर नाहर on 22, जुलाई 2006

रत्ना जी ने कुछ दिनों पहले जिसे देखा जिसे इलाहाबाद-लखनऊ पथ पर और अपने चिठ्ठे पर तेजस्वी बच्चे का जिक्र किया जो सड़कों पर अपना “गियान” (ज्ञान) बेचता था, इस दिशा में और अध्ययन किया तो एसे कई और तेजस्वी दुनिया में हो चुके हैं। उनमें से कुछेक का जिक्र यहाँ करना चाहता हुँ।
कार्ल गाऊस:
मात्र तीन वर्ष की उम्र में अपने पिता के ईंट के भट्टे पर खेलते खेलते अपने ज्ञान का पर्चा देना शुरू कर दिया। जब गाऊस ठीक ढंग से बोलना भी नहीं जानते थे। पिता अपने मजदूरों को तनख्वाह देने के लिये जो सूची बना रखी थी उसे देख कर गाऊस बोले ” Total is wrong- Total is wrong” पिता को आश्चर्य हुआ, उन्हे बालक को पूछा कहाँ ? तो गाऊस ने अपनी ऊंगली वहाँ रख दी जहां वाकई जोड़ में गलती थी। 19 वर्ष में ” कार्ल गाऊस फ़्रेडरिक” ने गणित के कई सिद्धान्तों की खोज की और इन्ही गाऊस को हम उनके चुंबकीय खोज के अलावा चुंबकत्व को मापने की ईकाई “गाऊस” के रूप में भी जानते हैं।

जाकी ईनोदी:
रत्ना जी के बताये बच्चे की तरह ईटली के जाकी ईनोदी पशु चराते चराते एक बहुत बड़े गणितज्ञ बने थे, इनोदी अपने ज्ञान को उसी तरह प्रदर्शित किया करते थे जैसे वो नन्हा बालक करता है। फ़र्क यही है कि वो सड़कों पर करता है और इनोदी स्टेज पर करते थे। एक बार उन्होने 1,19,55,06,69,121 का वर्गमूल तो मात्र 23 सैकण्ड में ( 3,45,761) बता दिया था

जेडेडिया बक्स्टन:
अनपढ़, और निपत देहाती, लिखना और पढ़ना बिल्कुल नहीं जानने वाले बक्सटन खेती करते थे, परन्तु दिमाग इतना तेज की खेत में पैदल चल कर उसका क्षेत्रफ़ल सचोट बता देते थे, वैज्ञानिकों ने उनको एक बार आजमाया और बाद में एक नाटक दिखाने ले गये, नाटक के अंत मे बक्सटन ने बताया कि नाटक में कलाकार कितने शब्द बोले और कितने कदम चले, वैज्ञानिकों ने स्क्रिप्ट देखी तो पाया कि बक्सटन बिल्कुल सही थे।

भारतीय गणितज्ञ:

श्याम मराठे:
नाम के इस गणितज्ञ ने 24,24,29,00,77,05,53,98,19,41,87,46,78,26,84,86,96,67,25,193 हाश… इतनी लम्बी संख्या का 23वां वर्गमूल ( 57) कुछ ही मिनीट में बता दिया और वो भी मौखिक।

दिवेश शाह:

शकुन्तला देवी:
इन मानव कम्प्युटर महिला के बारे में बताने की आवश्यकता है?

श्रीनिवास रामानुजन आयंगर:
के बारे में भी कुछ लिखना जरूरी नहीं लगता, क्यों कि हर भारतीय इन्हें अच्छी तरह से जानते हैं।

इन के अलावा लम्बी सुची (लगभग 100 लोगों की)

सौजन्य: सफ़ारी

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