॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

टिप्पणी

Posted by सागर नाहर on 31, अक्टूबर 2006

संजयभाई की इस पोस्ट  पर जब टिप्पणी करने लगा तो बहुत लम्बी होने लगी सो उसे चिठ्ठे के रूप में यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ।

सबसे पहली बात कि मुझे टिप्पणी ना मिलने से कोई शिकायत नहीं है, मैने तो यूं ही मजाकिया लहजे में समीर लाल जी से शिकायत की कि आपने मेरे चिठ्ठे की चर्चा नहीं कि इसलिये उसे मात्र दो ही टिप्पणीयाँ मिली!:) ( वैसे यह बात आपको कैसे पता चली?
दूसरी बात यह है कि मुझे कई बार बहुत लेख अच्छे लगते हैं  जैसे सृजन शिल्पी जी , सुनील जी और उन्मुक्त जी पर टिप्पणी क्या दी जाय यह समझ में नहीं आता, क्यों कि इनके लेखों पर खाली वाह वाह नहीं की जा सकती।
सुनील जी के बहुत सारे लेखॊं पर मैने टिप्पणी नहीं की पर उन्होने जब एक बंगाली फ़िल्म की समीक्षा की जो मुझे बहुत अच्छी लगी  तो टिप्पणी की।
खाली वाह वाह करना मेरी फ़ितरत नहीं अगर लेख अच्छा लगता है तो टिप्प्णी कर देता हूँ वरना जै राम जी की ! जैसे मैने निधि जी के गूगल वाले लेख पर टिप्पणी नहीं की।
आलोचना के लिये मैं हमेशा तैयार हूँ पर कोई करे तब ना 🙂 ताकि मुझे मेरी गल्तियाँ सही करने का मौका मिले।

( कहीं मैं महान लेखक तो नहीं हो गया जिसकी कोई आलोचना नहीं करता?:) )
इस लेख की प्रेरणा भी संजय भाई की उसी पोस्ट से मिली कि

“जब और कुछ न मिले तो टिप्पणी पर लिख कर टिप्पणियाँ बटोर लो”

धन्यवाद संजयभाई एक नया विषय सुझाने के लिये।

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9 Responses to “टिप्पणी”

  1. यहां टिप्पणी, वहां टिप्पणी, जहां देखिये तहां टिप्पणी
    चिट्ठा जब उन्मुक्त लिख रहे, लिखते हैं बस वहां टिप्पणी
    संजय की हो याकि अतुल की या फिर उड़नतश्तरी वाली
    चिट्ठों पर, चिट्ठा चर्चा पर शेष रही है यहां टिप्पणी

  2. kali said

    wah wah, good post 🙂

  3. सही है, लगे रहो सागर भाई!

  4. नाहर जी आपने लिखा कि आपको मेरे लेख अच्छे लगते हैं, मेरा दिन की शुरुवात बहुत अच्छी हुई।

  5. Tarun said

    टिप्पणी का शोर है देखो चारों ओर,
    हर कोई शायद यही कहे होती एक-आध मोर।
    होती एक-आध मोर, हम भी हाफ संचूरी बनाते,
    समीर लाल का रिकार्ड तोड़, नंबर वन कहलाते।।

  6. भाईसा,

    बात पते कि है। टिप्पणीयों का मिलना अपने आप में एक कद्र जैसा है।

    एक और बात जोडना चाहुंगा मिली हुई टिप्पणीयों का प्रतिउत्तर देना भी अति आवश्यक है। इस मामले में अमित और लालाजी अव्वल हैं।

  7. सागर भाई मेरा लेख आपको निशाना बनाने के लिए नहीं था, लेकिन विषय टिप्पणी था तो इसबारे में जो कुछ इससे पूर्व लिखा गया हो उसका उल्लेख करना अच्छा रहता हैं. बात समिरलाल जी तथा सुनिलजी की भी शामिल की थी.
    मैने यह लेख इसलिए लिखा क्योंकि मुझे टिप्पणी करना उतना ही अच्छा लगता हैं जितना की चिट्ठा लिखना. परतुं होता यह हैं की जहाँ टिप्पणी करता हूँ, उम्मीद सिर्फ वाह वाही की होती हैं. और मैं सोच विचार कर टिप्पणी नहीं कर सकता. जो पहली प्रतिक्रिया मन में उठती हैं वही लिखता हूँ.
    तभी शुएब के मार खाने का पढ़ कर भी सच लिखा था की मैं मुस्कुराया था. बेशक मुझे दुःख हुआ था पर अपने देश के हालात पर मुस्कुराया था.
    वैसे कितनी टिप्पणीयाँ हुई गिनना जरा.

  8. @संजय भाई
    आपकी बात का बुरा नहीं लगा बल्कि मजा आया जिससे एक नया चिठ्ठा लिखने की प्रेरणा भी मिली, और राकेशजी खंडेलवाल और कालीजी के पहली बार टिप्पणीयाँ भी मिली। हाँ टिप्पणीयाँ अभी कुछ कम है आपकी टिप्पनी के साथ अभी ७ ही हुई है, समीर लाल जी बरान्बई करने की इच्छा है, उनका रिकर्ड तोड़ने की नहीं
    @उन्मुक्त भाई साहब
    आपकी हर सुबह खुशगवार हो ऐसी कामना करता हूँ। यकीन मानिये आपके हर लेख मुझे अच्छॆ लगते है, आपके ही क्यों लगभग सारे लेख अच्छे लगते हैं, किसी किसी के कुछ लेख कभी कभार सर के उपर से भी निकलते हैं।:)
    @राकेश जी खंडेलवाल
    धन्यवाद, मैं आज धन्य हो गया आपकी कविता रुपी टिप्पणी पा कर ।
    @काली जी, तरूण जी, अनूप भाइ साहब
    धन्यवाद आप सब को मेरा लिखा पसन्द आया.आगे भी इसी तरह प्रोत्साहन की आशा करता हूँ
    @ पंकज भाई
    देखिये आज आपकी सलाह पर अमल कर प्रति उत्तर रूपी टिप्पणी दे रहा हूँ, आगे भी ध्यान रखूंगा।

  9. “समीर लाल जी बरान्बई करने की इच्छा है, उनका रिकर्ड तोड़ने की नहीं”

    समीर लाल जी की बराबरी करने की इच्छा है, उनका रिकार्ड तोड़ने की नहीं” पढ़ें

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