॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

धोबी से ना जीत पावें तो गदहे के कान उमेठे

Posted by सागर नाहर on 16, अप्रैल 2010

क्या यह कहावत इन्हीं मूर्ख सरकारी अधिकारियों के लिए तो नहीं बनी होगी, जिन्होने यह मूर्खतापूर्ण कदम उठाया

आंध्र प्रदेश सचिवालय हैदराबाद , के बाहर २४ घने पेड़ों को बिला वजह काट दिया गया। इनमें से तो कुछ नीम के भी थे।

किसी का कहना है नक्सलवदियों के आकस्मिक हमले से बचने के लिए यह पेड़ काटे हैं तो किसी का कुछ और लेकिन सही जवाब किसी के पास नहीं।

लेकिन इन पेड़ों के नीचे इस तपती गर्मी में थकान उतारने के लिए दो पल रुकने वालों और ना जाने कितने ही पंछियों को कौन जवाब देगा कि उनका आसरा क्यों छीना गया?

फोटो द हिन्दू “The Hindu” से साभार

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27 Responses to “धोबी से ना जीत पावें तो गदहे के कान उमेठे”

  1. तुग्लकी सब जगह मौजुद हैं.

  2. पेड़ों के साथ हमेशा इसी तरह अत्‍याचार होता रहा है। पेड़ लगाने की कोई वजह नहीं होती लेकिन काटने के सौ बहाने हमेशा तैयार होते हैं।

  3. mamta said

    नेता अपनी जान की परवाह करेंगे की पक्षियों और जनता की करेंगे।
    और अपने देश मे तो यही चलता है।

  4. लानत है

  5. Gyandutt Pandey said

    नक्सली पर्यावरण भी खराब कर रहे हैं! 🙂

  6. अरे …अफ़सोस जनक है ये तो …
    आप मेरी नई प्रविष्टी भी देखिएगा सागर भाई
    – लावण्या

  7. अफसोसजनक कदम…बिना पेड़ काटे भी सुरक्षा के उपाय किये जा सकते थे.

  8. vani geet said

    नीम के २४ पेड एक साथ काट दिए …
    कैसे निर्मोही …!!

  9. ये तो वाकई बेवकूफी भरा कदम है | बल्कि इन पेड़ों को तो सुरक्षा के लिए उपयोग लाया जा सकता था |

  10. ये पेड़ कहा बिच में आते है?बिच में तो आती है कायरता,नपुंसकता|

  11. अन्धेर नगरी चौपट राजा …

  12. pandey deep said

    meri nazar me pad katna ek falte fulte adami ko katne ke barabar hai. hamara to dharm bhi yahi shiksha deta hai.chaliye sahana padega par apne ek nayi kahavat se parichay karvaya iske liye dhanyavaad.

  13. खेत खाए गदहा, जुलाहा पिटाता.
    कितनी ही गलत बात है २४ पेड़ क्या कट गए, आप तो दुखी हो गए !
    लगता है आपके घर में फ्रिज, कूलर और एसी नहीं है. 🙂
    { इन पेड़ काटने वालों को नंगा करके भरी दोपहर में एक किलोमीटर चलवाइए, ये पेड़ खुद लगाना शुरू कर देंगे. }

    • राजीवजी,
      आप शायद इसे झूठ मानें लेकिन यह एकदम सत्य है कि मेरे घर में एसी और कूलर तो दूर एक फ्रिज भी नहीं है।
      और रही दुखी होने की बात तो क्या यह दुखी होने की बात नहीं है? मेरे सामने तो कोई पेड़ की पत्तियाँ नोच ले तो भी मैं दुखी हो जाता हूं।

  14. ajit gupta said

    बेचारे बेजुबान है कोई भी काट ले।

  15. સાગર સાહેબ,
    આપ મારા બ્લોગ પર પધાર્યા ને કોમેન્ટ આપી તે બદલ ખુબ આભાર.મેં હિન્દી બ્લોગ જગત માં હિન્દી મારું સારું નાં હોવા છતાં ઘૂસવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે.કુરુક્ષેત્ર ને હિન્દીમાં મુક્યો છે.ગુજરાતી બ્લોગ જગત માં તો ચાર મહિના માં ૮૦ આર્ટીકલ લખીને મુક્યા છે અને ૧૧,૦૦૦ વ્યૂઅર્સ મેળવી ચુક્યો છું.એસીડ જેવા આર્ટીકલ મુક્યા છે.પણ હિન્દી માં ખબર નથી સફળતા મળે છે કે કેમ?હિન્દી માં મારી લીન્ક છે http://brsinhji.wordpress.com/

  16. aradhana said

    ये लोग ऐसा करते हैं ठेकेदारों को लकड़ी उपलब्ध कराने के लिये…अभी कुछ साल पहले इलाहाबाद युनिवर्सिटी में सारे पेड़ इसी तरह काट डाले गये थे और तर्क इससे भी बचकाना था कि युनिवर्सिटी की सुन्दर इमारतें पेड़ों के चलते दिखाई नहीं देतीं…हद है.

  17. हमारे उज्जैन में भी कुछ समय पहले एक निजी फ़ैक्ट्री में हरे-भरे पेड़ काटे गये थे, क्योंकि “वास्तु” के मुताबिक उनकी “पोजीशन” सही नहीं थी…।
    कौन कहता है कि भारत में शिक्षा का प्रसार हो रहा है?

  18. ePandit said

    वाह नक्सलवादियों से बचने का तरीका मिल गया, सारे जंगल कटवा दो। यह आइडिया सरकार को बताओ जी 🙂

  19. dipak said

    Ab naxali seedha tank bund se nishana lagayenge, 🙂

  20. dipak said

    Aur rahi baat AC, cooler, fridge etc.. kee, to yeh sab “Ati avashyak” vastu nahi hai dukhi hone ke liye. “Sant hridya ice cream samaana”, kuchh bhi dekh kar pighal jaaye..

  21. kavita said

    bejuban pedo ko katane valon ki aankhon par kursi aur doulat ki patti bandhi hai,ye nahi janate ki hame virasat me apane bachchon ke liye shudhdhh hawa aur pani hi chhod kar jana hai,paise to hamare bachche kama lenge.bhagvan inhe sadbudhdhhi de.

  22. satishgalaxy said

    ped to ped hai

  23. archana chaoji said

    मैने कही ये पंक्तियाँ पढी थी————–
    मुझे छोड दो………….मै वॄक्ष हूँ………
    लेने दो मुझे सांसे कि मै सांस देने मे भी दक्ष हूँ…………..

  24. यह एक जगह की कहानी नही है , सब तरफ़ यही हाल है । जरा लखनऊ आ कर देखें , हरा भरा लखनऊ अब पेडॊं के बिना वीरान सा नजर आता है ।

  25. Basant jain surat said

    Ped katna to un murkho ka kam he jinhe ye nahi pata ki ve ped nahi apne bhavishya par kulhadi chala rahe he …mera bharat mahan

  26. Ami Jha said

    I hope they will cut the forest, which are full of Naxalities, based on this.

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