॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

सम्मान का अपमान

Posted by सागर नाहर on 26, जुलाई 2011

देश के एक मंत्री इस हद तक मूर्खता भी कर सकते हैं, और वो भी जयराम रमेश… पता नहीं था।  गांधीजी के वे तथाकथित अनुयायी जो गांधीजी की तरफ उंगली करने पर तलवारें खींच लेते हैं……कुछ कहेंगे?

फोटो राजस्थान पत्रिका से साभार

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11 Responses to “सम्मान का अपमान”

  1. Dipak said

    Sarkaar, Joota mahga hoga soot se.. Neta logo ka koi imaan, dharm, philosohy kuchh nahi hota hai…

    Shayad aapko aapki picchli post yaad hogi Sharad Joshi waali, congress ke 30 saal

    🙂

  2. इनके लिए माला से ज्यादा जुटे मुल्यवान है. कृपया अगली बार माला की जगह जुते…. 🙂

  3. शर्मनाक तक भी नहीं कहा जा सकता…

  4. Shrish said

    अगली बार इन्हें जूतों की माला ही पहनायी जानी चाहिये।

  5. काश कि सूत की पवित्रता का लेश-मात्र अनुमान होता इन तथाकथित नेतागणों को…

  6. rishbh007 said

    ऐसे लोगो का सम्मान करना बंद कर देना चाहिए !

  7. Agar minister aisa karenge to aam logon par bahut bura asar padega.Ye to bahut sharmnaak hai.

  8. बसंत जैन said

    शर्म को भी शर्म आ गयी होगी जयराम की इस हरकत पे !

  9. मेरे लिए निजी तौर पर खुशी की बात यह है कि इस फोटो को खींचने वाला फोटोग्राफर नौशाद अली मेरा दोस्‍त है… मुझे उस पर गर्व है…

  10. सागर जी,

    कृपया निरामिष ब्लॉग पर एक बार अवश्य पधारें, एक शाकाहार जागृति आन्दोलन को प्रोत्साहित करें

    आपकी प्रतीक्षा रहेगी।
    निरामिष: पश्चिम में प्रकाश – भारत के बाहर शाकाहार की परम्परा

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